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पाकिस्तान सरकार ने पीसीबी को भारत से क्रिकेट पर किसी भी तरह की बातचीत से रोका

पाकिस्तान सरकार ने अपने क्रिकेट बोर्ड को बीसीसीआइ से लंबे समय से लंबित चल रहे द्विपक्षीय सीरीज के मुद्दे पर किसी भी तरह की बातचीत करने की शुरुआत करने से रोक दिया है जो दोनों देशों के बीच अस्थिर राजनीतिक संबंधों के कारण बार बार विफल रही है।

कराची | May 30, 2016 1:59 AM
पत्रकारों और अन्य लोगों के सामने पीटीआई के समर्थन में नारे लगा रहे लोगों ने पीसीबी अध्यक्ष के साथ मारपीट की। नजम सेठी को बीते दिनों आम सहमति से पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का सदस्य बनाया गया था। (FILE PHOTO)

पाकिस्तान सरकार ने अपने क्रिकेट बोर्ड को बीसीसीआइ से लंबे समय से लंबित चल रहे द्विपक्षीय सीरीज के मुद्दे पर किसी भी तरह की बातचीत करने की शुरुआत करने से रोक दिया है जो दोनों देशों के बीच अस्थिर राजनीतिक संबंधों के कारण बार बार विफल रही है। पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के अध्यक्ष शहरयार खान ने कहा कि जब तक सरकार नए निर्देश नहीं देती, तब तक पीसीबी निकट भविष्य में द्विपक्षीय क्रिकेट संबंधों की शुरुआत करने के लिए भारतीय बोर्ड से किसी तरह की बातचीत नहीं करेगा।

खान ने कहा कि सरकार ने हमें स्पष्ट कर दिया है कि हमें अपने भारतीय समकक्ष से किसी भी तरह की बातचीत नहीं करनी है और न ही अगले आदेश तक भारत-पाक क्रिकेट संबंधों पर किसी तरह की बयानबाजी करनी है। खान ने कहा कि यही कारण है कि हालिया आइसीसी बैठक में पीसीबी ने बीसीसीआइ अधिकारियों से किसी भी तरह की चर्चा नहीं की। उन्होंने हालांकि कहा कि अनुराग ठाकुर का बीसीसीआइ का नया अध्यक्ष बनना भारत-पाक के बीच भविष्य की बातचीत के लिए एक सकारात्मक चीज है। खान ने कहा कि ठाकुर बीसीसीआइ और सरकार दोनों का प्रतिनिधित्व करते हैं और इसलिए जब समय आएगा तो एक व्यक्ति से बात करना आसान होगा।

इस बीच शहरयार ने संकेत दिए कि वे दो साल पूरे करने के बाद 20 अगस्त को अपने पद से हट सकते हैं। उन्होंने कहा- बता दूं कि मैंने अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है कि मैं पद से हटूंगा या नहीं, लेकिन जब मुझे शुरू में अध्यक्ष नियुक्त किया गया था तो मुख्य सरंक्षक ने मुझे दो साल का समय दिया था जो 20 अगस्त को खत्म होगा। खान ने पाकिस्तान में मौजूदा क्रिकेट हालात पर अपनी निराशा जताई।

वेस्ट इंडीज के खिलाफ पाकिस्तान की ‘घरेलू’ सीरीज श्रीलंका में होनी मुश्किल- पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के इस साल वेस्ट इंडीज के खिलाफ अपनी ‘घरेलू’ सीरीज का आयोजन श्रीलंका में कराने के फैसले पर अमल किए जाने की संभावना काफी कम है और इस सीरीज का आयोजन संयुक्त अरब अमीरात में ही हो सकता है। बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी ने इसकी पुष्टि करते कहा कि उन्होंने वेस्ट इंडीज के खिलाफ शृंखला श्रीलंका या बांग्लादेश में आयोजित कराने का फै२सला किया था लेकिन इस साल इसके होने की संभावना नहीं है।

उन्होंने कहा कि हमें यूएई में अपनी घरेलू सीरीज कराने को लेकर मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि खर्चे काफी अधिक हैं और इसके अलावा अन्य मामले भी हैं। लेकिन ऐसा लगता है कि इस साल हमें वेस्ट इंडीज शृंखला वहीं करानी होगी। अधिकारी ने कहा कि श्रीलंका और बांग्लादेश बोर्ड के साथ बात हुई है और दोनों पाकिस्तान को अपनी ‘घरेलू’ सीरीज के आयोजन की स्वीकृति देने को तैयार थे। उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से पाकिस्तान के संदर्भ में बांग्लादेश में मौजूदा हालात आदर्श नहीं है और श्रीलंका में सीरीज के आयोजन की समस्या यह है कि सितंबर-अक्तूबर में उनके अधिकांश मुख्य स्थलों पर भारी बारिश होती है।

पीसीबी को इंग्लैंड दौरे के लिए आमिर को वीजा मिलने का भरोसा- पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को भरोसा है कि बाएं हाथ के दागी तेज गेंदबाज मोहम्मद आमिर को इन गर्मियों में ब्रिटेन में इंग्लैंड के खिलाफ शृंखला के लिए जल्द ही वीजा जारी हो जाएगा। बोर्ड के एक शीर्ष अधिकारी ने आज कहा कि आमिर का वीजा हासिल करने के लिए जो भी प्रयास कए गए हैं उनका नतीजा अगले हफ्ते तक सामने आने की उम्मीद है। अधिकारी ने कहा कि हमारे पास ऐसा कोई कारण नहीं है कि आमिर को वीजा नहीं मिले क्योंकि हम इंग्लैंड एवं वेल्स क्रिकेट बोर्ड और ब्रिटेन के अधिकारियों के संपर्क में हैं। हमें बताया गया है कि सलमान बट और मोहम्मद आसिफ का इंग्लैंड दौरे पर स्वागत नहीं है लेकिन आमिर का मामला अलग है।

अधिकारी ने बताया कि इस्लामाबाद में ब्रिटेन उच्चायोग को वीजा के लिए दस्तावेज भेजते समय पीसीबी ने आमिर के लिए अलग मामला तैयार किया है। वर्ष 2010 में पाकिस्तान के इंग्लैंड दौरे पर पूर्व कप्तान सलमान बट और साथी तेज गेंदबाज मोहम्मद आसिफ के साथ आमिर को आइसीसी ने स्पॉट फिक्सिंग का दोषी पाया था और बाद में लंदन की क्राउन अदालत ने भी उन्हें सजा सुनाई थी। पांच साल के प्रतिबंध के बाद आमिर ने जनवरी में न्यूजीलैंड दौरे पर वापसी की थी। ब्रिटिश नियमों के अनुसार किसी विदेशी का वीजा आवेदन 10 साल तक खारिज किया जा सकता है, अगर उसने ब्रिटेन में एक से चार साल की सजा काटी है।

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