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सालगावकर एफसी, स्पोर्टिंग क्लब डि गोवा आईलीग से हटे

आईएसएल को देश की मुख्य लीग के रूप में मान्यता देने की वजह से गोवा की दोनों टीमों ने यह फैसला लिया है।

Author नई दिल्ली | June 24, 2016 6:45 PM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर किया गया है।

भारतीय फुटबॉल की दो शीर्ष टीमों सालगावकर एफसी और स्पोर्टिंग क्लब डि गोवा ने एआईएफएफ के घरेलू लीग प्रणाली को नया रूप देने के फैसले को लेकर शुक्रवार (24 जून) को आईलीग के आगामी सत्र से हटने का फैसला किया। गोवा की इन दोनों टीमों ने संयुक्त बयान जारी करके यह फैसला किया। एआईएफएफ 17 मई को विभिन्न हितधारकों से मिला था जिसमें मार्केटिंक सहभागी आईएमजी रिलायंस भी शामिल था और उसने एक तरह से आईएसएल को देश की मुख्य लीग के रूप में मान्यता दे दी जबकि भारत में 2017.18 से त्रिस्तरीय फुटबॉल प्रणाली गठित करने का फैसला किया था।

इन दोनों क्लबों ने बयान में कहा, ‘पिछले कुछ सप्ताहों में सालगावकर फुटबॉल क्लब और स्पोर्टिंग क्लब डि गोवा ने कई दौर की बातचीत की और 17 मई के प्रस्ताव के फुटबॉल पर पड़ने वाले प्रभाव पर विचार विमर्श किया। यह स्पष्ट है कि प्रस्ताव पूरी तरह से भेदभावपूर्ण, खेल भावना के विपरीत, आईलीग क्लबों के लिए अव्यावहारिक और आईलीग में सर्वश्रेष्ठ प्रतिनिधित्व रखने वाले राज्य गोवा की फुटबॉल को प्रभावित करने वाला है।’

इसमें कहा गया है, ‘इसलिए इसके अनिवार्य बनने के लिए एक साल और इंतजार करने के बजाय सालगावकर फुटबॉल क्लब और स्पोर्टिंग क्लब डि गोवा ने आगामी आईलीग से हटने का दुखद फैसला किया।’ एआईएफएफ को अपनी प्रस्तावित योजनाओं के लिए मोहन बागान और ईस्ट बंगाल जैसे क्लबों का विरोध झेलना पड़ा था। सालगावकर और स्पोर्टिंग क्लब का हटना उसके लिए एक और झटका है। गोवा के दोनों क्लबों ने 17 मई की बैठक में हुई घटनाओं का जिक्र किया है और प्रस्ताव को चौंकाने वाला और निराशाजनक करार दिया।

उन्होंने कहा, ‘उस बैठक में विस्तृत प्रस्ताव पेश किया गया जो कि आईलीग और उसके क्लबों के खिलाफ पक्षपातपूर्ण था। इससे आईलीग न दूसरे दर्जे का लीग बन जाएगा। आईएसएल देश का चोटी का लीग बन जाएगा जिसमें किसी तरह का रेलीगेशन नहीं होगा। यह चौंकाने वाला और निराशाजनक था विशेषकर तब जबकि एआईएफएफ और फीफा ने लगातार दावा किए थे कि आईलीग देश में प्रमुख लीग प्रतियोगिता है।’

एआईएफएफ ने मसौदा तैयार किया था उसके अनुसार इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) शीर्ष स्तर की प्रतियोगिता होगी जिसमें रेलीगेशन नहीं होगा। आईलीग और इसके निचले डिवीजन की लीग दूसरी और तीसरी डिवीजन की लीग बन जाएंगे और इन दोनों प्रतियोगिताओं के बीच ही रेलीगेशन और प्रमोशन होगा।

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