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रास में उठी हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद के परिवार को आर्थिक मदद देने की मांग

मोहम्मद शाहिद (56 वर्ष) का बुधवार (20 जुलाई) को गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था।

Author नई दिल्ली | July 21, 2016 9:51 PM
मोहम्मद शाहिद दिल्ली एशियाई खेल 1982 में रजत पदक जीतने वाली भारतीय टीम में भी शामिल थे। (एक्सप्रेस फोटो)

महान हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद के निधन के एक दिन बाद राज्यसभा में कई सदस्यों ने उनके परिवार को हरसंभव मदद दिए जाने की मांग की। उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान बीजद के दिलीप टिर्की ने यह मुद्दा उठाते हुए कहा कि मोहम्मद शाहिद कई हॉकी खिलाड़ियों के आदर्श थे और उनकी हॉकी स्टिक का कमाल यह था कि 1980 से 1990 के दशक में टीमें कहती थीं ‘अगर शाहिद हमारी टीम में हों तो हम दुनिया की किसी भी टीम को हरा देंगे।’

उन्होंने कहा कि मास्को में हुए ओलंपिक खेलों में शाहिद की टीम ने भारत को स्वर्ण पदक दिलाया था। लेकिन क्रिकेट को छोड़ कर अन्य खेलों के वह दिग्गज खिलाड़ी उपेक्षित होते जा रहे हैं जिन्होंने देश के लिए पदक जीते। भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान रहे टिर्की ने कहा कि शाहिद के परिवार को किसी भी तरह की समस्या नहीं होनी चाहिए और सरकार को उनकी मदद करनी चाहिए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई सदस्यों ने टिर्की के इस मुद्दे से स्वयं को संबद्ध किया। उप सभापति पी जे कुरियन ने कहा ‘मुझे लगता है कि पूरा सदन आपकी इस बात से सहमत है।’

एक सदस्य ने मांग की कि शाहिद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी के रहने वाले थे और वहां उनका एक स्मारक बनवाया जाना चाहिए। संसदीय मामलों के राज्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि जब शाहिद अस्पताल में भर्ती थे तब उनके इलाज का खर्च सरकार ने वहन किया था और उनके लिए दस लाख रुपए की वित्तीय सहायता का ऐलान भी किया था।

कांग्रेस के सत्यव्रत चतुर्वेदी सहित कुछ सदस्यों ने कहा कि ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक विजेता टीम की अगुवाई करने वाले शाहिद को आसन की ओर से श्रद्धांजलि दी जानी चाहिए थी। कुरियन ने कहा कि वह सदस्यों की भावना से सभापति हामिद अंसारी को अवगत करा देंगे। मास्को ओलंपिक (1980) की स्वर्ण पदक विजेता भारतीय हॉकी टीम के अहम सदस्य और अपने ड्रिबलिंग कौशल का लोहा दुनिया भर में मनवाने वाले शाहिद (56 वर्ष) का बुधवार (20 जुलाई) को गुड़गांव के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया था। उनके कई महत्वपूर्ण अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।

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