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बस्तर में बनेगी निशानेबाजी और तीरंदाजी अकादमी

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि बस्तर अंचल में निशानेबाजी और तीरंदाजी अकादमी खुलने से वहां के आदिवासी युवाओं को इन दोनों खेलों में आगे आने का अवसर मिलेगा।

Author रायपुर | September 16, 2016 4:52 PM
चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (Source: Reuters)

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित बस्तर क्षेत्र में निशानेबाजी और तीरंदाजी अकादमी बनाई जाएगी। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार (16 सितंबर) को यहां बताया कि पिछले दिनों मुख्यमंत्री रमन सिंह की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में बस्तर संभाग में निशानेबाजी और तीरंदाजी अकादमी तथा भिलाई में बास्केटबाल तथा टेनिस अकादमी जल्द शुरू करने का फैसला किया गया। साथ ही तैराकी को बढ़ावा देने के लिए भिलाई में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप स्वीमिंग पुल बनाने का फैसला लिया गया।

बैठक में केन्द्रीय इस्पात मंत्रालय की सचिव अरुणा शर्मा, राज्य सरकार के मुख्य सचिव विवेक ढांड, भारतीय इस्पात प्राधिकरण (सेल) के अध्यक्ष पीके सिंह और केन्द्र तथा राज्य सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। बस्तर में निशानेबाजी और तीरंदाजी अकादमी की स्थापना राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) तथा भिलाई में बास्केटबाल और टेनिस अकादमी की स्थापना भिलाई इस्पात संयंत्र के सहयोग से कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी (सीएसआर) के तहत की जाएगी।

अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री ने बैठक में कहा कि बस्तर अंचल में निशानेबाजी और तीरंदाजी अकादमी खुलने से वहां के आदिवासी युवाओं को इन दोनों खेलों में आगे आने का अवसर मिलेगा। इसी तरह भिलाई में युवाओं को बास्केटबाल और टेनिस में अवसर मिलेंगे। मुख्यमंत्री ने राज्य के खिलाड़ियों को केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों में नौकरी देने के लिए खेल कोटा पुन: शुरू करने का भी प्रस्ताव दिया।

रमन सिंह ने बैठक में एनएमडीसी के अधिकारियों को बस्तर अंचल में विश्व स्तरीय एथलेटिक्स ट्रैक बनाने के लिए भी कार्य योजना तैयार करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने बताया कि नक्सल प्रभावित बस्तर में राज्य सरकार नक्सल समस्या के समाधान की कोशिश कर रही है। खेल अकादमी की स्थापना से वहां के युवाओं को बेहतर अवसर मिलेंगे। अधिकारियों ने बताया कि अकादमियों का मुख्य उद्देश्य राज्य के आदिवासी बाहुल्य और नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में खेल प्रतिभाओं की खोज करना और उन्हें बेहतर प्रशिक्षण देकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करना है जिससे इस क्षेत्र के युवा राज्य और देश की तरक्की में भागीदार बन सकें। उन्होंने बताया कि खेल अकादियों का पहला चरण मार्च 2018 से शुरू होने की संभावना है।

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