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क्‍या होगा सुशील कुमार का? रेसलिंग फेडरेशन ने हाई कोर्ट से कहा-नरसिंह यादव हैं बेहतर

डब्ल्यूएफआई ने हालांकि सप्ष्ट किया कि इस वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए सुशील कुमार की तुलना में नरसिंह सर्वश्रेष्ठ पहलवान है और चयन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया गया है।

Author नई दिल्ली | May 27, 2016 9:54 PM
पहलवान सुशील कुमार । (फाइल फोटो)

भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने शुक्रवार (27 मई) को दिल्ली उच्च न्यायालय में कहा कि पहलवान नरसिंह पंचम यादव रियो ओलंपिक में 74 किग्रा फ्रीस्टाइल वर्ग में ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार से बेहतर दांव हैं। नरसिंह ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप 2015 में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिए ओलंपिक कोटा हासिल किया था और डब्ल्यूएफआई ने कहा कि वह ‘सबसे सुयोग्य पहलवान’ और सुशील की तुलना में बेहतर प्रतिभागी है। सुशील पिछले दो वर्षों में चयन ट्रायल के दौरान लगातार उसका सामना करने से बचता रहा।

सुशील ने इन दावों के जवाब में आरोप लगाया कि उन्हें ओलंपिक में 74 किग्रा भार वर्ग में भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका देने के लिए ट्रायल पर इसलिए विचार नहीं किया जा रहा है क्योंकि उन्होंने प्रो कुश्ती लीग में हिस्सा नहीं लिया था। सुशील की तरफ से शामिल हुए सीनियर वकील अमित सिब्बल ने न्यायमूर्ति मनमोहन से कहा, ‘वे (डब्ल्यूएफआई) इस तरह का मनमाना फैसला नहीं कर सकते क्योंकि आपने (सुशील) प्रो कुश्ती लीग में हिस्सा नहीं लिया और इसलिए आपको ट्रायल का मौका नहीं दिया जाएगा। सुशील केवल ट्रायल के लिए कह रहा है।’

डब्ल्यूएफआई ने हालांकि सप्ष्ट किया कि इस वर्ग में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिए नरसिंह सर्वश्रेष्ठ पहलवान है और चयन निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किया गया है। महासंघ ने अदालत में पेश हलफनामे में कहा, ‘प्रतिवादी संख्या पांच (नरसिंह) को आगामी ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए सर्वश्रेष्ठ पहलवान आंका गया है। चयन पूरी तरह से निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से किए गए। याचिका में किसी तरह के पूर्वाग्रह या पक्षपात का आरोप लगाया गया है।’ इस अवसर पर नरसिंह भी अदालत में उपस्थित थे।

डब्ल्यूएफआई ने कहा कि नरसिंह 74 किग्रा फ्रीस्टाइल में बेहतर प्रतिभागी है क्योंकि वह 2006 से इस भार वर्ग में पूरे दबदबे के साथ खेल रहा है जबकि सुशील जनवरी 2014 तक 66 किग्रा भार वर्ग में खेलता रहा है। रियो के लिए अभ्यास शिविर में अपना नाम नहीं होने के बाद 32 वर्षीय सुशील ने उच्च न्यायालय में याचिका दाखिल करके डब्ल्यूएफआई को ट्रायल करवाने का निर्देश देने का आग्रह किया जिससे यह तय हो सके कि रियो खेलों में 74 किग्रा फ्रीस्टाइल में भारत का प्रतिनिधित्व कौन करेगा।

डब्ल्यूएफआई ने अदालत से कहा कि 26 वर्षीय नरसिंह को 74 किग्रा भार वर्ग में रियो ओलंपिक में भेजने का फैसला पहलवानों के अपने भार वर्ग में उपलब्धियों, वर्तमान प्रदर्शन और अभ्यास शिविरों में मुख्य कोच और ट्रेनरों के आकलन के बाद पूरे विचार विमर्श के बाद किया गया। नरसिंह की तरफ से उपस्थित सीनियर एडवोकेट निदेश गुप्ता ने कहा कि उनके मुवक्किल का नाम ओलंपिक के लिए भेजा गया क्योंकि उन्होंने देश के लिए कोटा हासिल किया था।

उन्होंने कहा, ‘यदि आज ट्रायल कराए जाते हैं तो फिर क्वालीफिकेशन प्रतियोगिता को व्यर्थ माना जाएगा।’ इसके साथ ही उन्होंने आगे कहा कि राष्ट्रीय प्रतिष्ठा को लेकर कोई विवाद नहीं है। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष प्रक्रिया से चयन किया गया है और मनमाना या दुराग्रहपूर्ण जैसा कुछ नहीं हुआ है।

सुशील के इस आरोप पर कि उन्हें ट्रायल का मौका इसलिए नहीं दिया गया क्योंकि उन्होंने प्रो कुश्ती लीग में हिस्सा नहीं लिया था, डब्ल्यूएफआई ने कहा कि सुशील के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया नहीं अपनाया गया। डब्ल्यूएफआई के वकील ने कहा, ‘आज तक भारत में या हमारी जानकारी के हिसाब से यहां तक कि विश्व में भी एक भी वाकया ऐसा नहीं है जबकि देश के लिए कोटा हासिल करने वाले खिलाड़ी को ओलंपिक में नहीं भेजा गया हो। प्रतियोगिता के लिए पहलवान को भेजना देश का अधिकार है।’

उन्होंने इसके साथ ही कहा कि ओलंपिक में जो 18 पहलवान इस भार वर्ग में भाग लेने जा रहे हैं नरसिंह ने उनमें से छह को हराया है। हालांकि सुशील के वकील ने कहा कि डब्ल्यूएफआई को पदक जीतने की संभावना बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए और जहां तक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की बात है तो उनका मुवक्किल काफी आगे है।

उन्होंने कहा, ‘निष्पक्ष चयन और राजनीतिक या अन्य तरह के प्रभाव कम करने के लिए ट्रायल का आयोजन सबसे बेहतर तरीका है। ओलंपिक सबसे बड़ी प्रतियोगिता है और ट्रायल की जरूरत है जो कि निष्पक्ष तरीके से और अग्रिम नोटिस पर किया जाना चाहिए। पारदर्शिता के लिए ऐसा करना चाहिए। याचिकाकर्ता (सुशील) भारत का सबसे सफल खिलाड़ी है और व्यक्तिगत स्पर्धा में दो ओलंपिक पदक जीत चुका है।’

सुशील के वकील ने यह भी कहा कि उनका मुवक्किल पदक का प्रबल दावेदार और बेजोड़ खिलाड़ी है और यदि ट्रायल नहीं कराये गए तो इस स्पर्धा में भारत की पदक जीतने की संभावना क्षीण हो जाएगी। उन्होंने कहा कि चयन ट्रायल पिछले साल जुलाई में किया गया और सुशील इसलिए भाग नहीं ले पाया क्योंकि तब वह चोटिल थे। अदालत ने इस मामले में आगे की बहस के लिए 30 मई की तारीख मुकर्रर की तथा डब्ल्यूएफआई और नरसिंह के वकील से शनिवार (28 मई) तक लिखित सारांश दायर करने को कहा।

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