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फुटबॉल: अब भी भारत के लिए खेलना चाहते हैं संडरलैंड के पूर्व स्ट्राइकर माइकल चोपड़ा

माइकल चोपड़ा ने पूर्व में कहा था कि भारत की तरफ से खेलने के लिए वह अपना ब्रिटिश पासपोर्ट वापस करने के लिए तैयार हैं।

Author नई दिल्ली | September 8, 2016 20:03 pm
न्यूकास्टल और संडरलैंड के पूर्व स्ट्राइकर माइकल चोपड़ा। (रॉयटर्स फाइल फोटो)

न्यूकास्टल और संडरलैंड के पूर्व स्ट्राइकर माइकल चोपड़ा ने कहा कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल में भारत का प्रतिनिधित्व करने की उम्मीद अब भी नहीं छोड़ी है। चोपड़ा ने पूर्व में कहा था कि भारत की तरफ से खेलने के लिए वह अपना ब्रिटिश पासपोर्ट वापस करने के लिए तैयार हैं। इस स्ट्राइकर ने जूनियर स्तर पर इंग्लैंड का प्रतिनिधित्व किया था लेकिन फीफा नियमों के अनुसार वह भारत का प्रतिनिधित्व करने के योग्य है क्योंकि उनके दादा-दादी 1950 के दशक में जालंधर से जाकर इंग्लैंड में बस गए थे। उन्होंने कहा, ‘मैं अब भी भारत की तरफ से खेलना चाहता हूं और असल में अब मैं इसके लिए प्रक्रिया में हूं। मैं सही कदम आगे बढ़ाने के संबंध में वकीलों से बात कर रहा हूं। मैंने पहले जितना सोचा था इमसें उससे ज्यादा समय लग रहा है।’

इंग्लिश प्रीमियर लीग में खेलने वाले चोपड़ा को आईएसएल में 2014 के पहले सत्र में केरल ब्लास्टर्स ने अपनी टीम में रखा था लेकिन वह उम्मीदों के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर पाए थे। वह चोटिल भी हो गए थे और यहां तक कि उन्होंने एटलेटिको डि कोलकाता के खिलाफ फाइनल के लिए टीम में जगह बनाई लेकिन इसका अंत सुखद नहीं रहा। इसके बाद 2015 के अगले सत्र में चोपड़ा के नाम पर केरल ब्लास्टर्स या आईएसएल की अन्य सात फ्रेंचाइजी टीमों में से किसी ने भी विचार नहीं किया। लेकिन अब केरल ब्लास्टर्स ने फिर से उन्हें अपनी टीम में शामिल किया है और उन्होंने पिछले तीन सप्ताह में पुणे में कड़ा अभ्यास करके अपनी फिटनेस साबित की है। सचिन तेंदुलकर के स्वामित्व वाली टीम ने अब चोपड़ा को जो मौका दिया है वह उसका पूरा फायदा उठाना चाहते हैं।

चोपड़ा ने कहा, ‘मेरा मानना है कि कुछ चीजें गलत हो गई थी। मैंने आईएसएल को कम करके आंकने की गलती की थी। मैंने सोचा था कि इसमें खेलना आसान होगा और इसके बाद मेरी मांसपेशियों में खिंचाव आ गया जिससे मेरी परेशानी बढ़ गई।’ उन्होंने कहा, ‘जब मुझे एटलेटिको डि कोलकाता के खिलाफ खेलना था तो मेरे टखने में चोट लग गयी जिसके कारण मुझे आईएसएल से बाहर हो जाना चाहिए था लेकिन मैं वापसी के प्रतिबद्ध था तथा सेमीफाइनल और फाइनल में अपनी भूमिका निभाना चाहता था। दर्द के बावजूद मैं खेला था। मुझे अब भी उस दिन की यादें सताती हैं कि कैसे कोलकाता के गोलकीपर ने आखिरी पांच मिनट में गोल बचाया।’ चोपड़ा ने आईएसएल में अपने पिछले अनुभव से कड़ा सबक लिया है और इस बार वह उसकी भरपायी करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा, ‘इस बार मैंने अलग तरह से तैयारी की है। मैं जानता हूं कि मुझसे क्या उम्मीद की जा रही है और इस सत्र में मैं फिट रहना चाहता हूं। मैंने तीन सप्ताह तक डीएसके के साथ अभ्यास किया है।’

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