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रियो-पैरालंपिक खेलों के ऊंची कूद स्पर्धा में भारत के मरियप्पन थांगावेलू ने लगाई स्वर्णिम छलांग, वरुण भाटी ने जीता कांस्य पदक

थांगावेलू ने 1.89 मीटर की जंप लगाते हुए सोना जीता, जबकि भाटी ने 1.86 मीटर की जंप लगाते हुए कांस्य अपने नाम किया।

Author रियो डे जेनेरो | September 10, 2016 3:28 PM
रियो पैरालंपिक खेलों के ऊंची कूद स्पर्धा में मरियप्पन थांगावेलू ने गोल्ड पर कब्जा जमाते हुए इतिहास रच दिया तो वहीं, वरुण भाटी ने इसी प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। इस प्रतिस्पर्धा का रजत पदक अमेरिका के सैम ग्रेवी को मिला। थांगावेलू ने 1.89 मीटर की जंप लगाते हुए सोना जीता, जबकि भाटी ने 1.86 मीटर की जंप लगाते हुए कांस्य अपने नाम किया। मरियप्‍पन थंगावेलु ने रियो पेरालिंपिक में हाई जंप में गोल्‍ड मेडल जीत इतिहास रच दिया। वे भारत के पहले गोल्‍ड मेडलिस्‍ट हैं जिन्‍होंने पेरालिंपिक्‍स में हाई जंप में गोल्‍ड जीता। उन्‍होंने 1.89 मीटर की जंप लगाई। (रियो परालम्पिक खेलों में टी42 ऊंची कूद में स्वर्ण पदक जीतने वाले मरियाप्पन थंगावेलू (बाएं) और कांस्य पदक विजेता वरुण भाटी। REUTERS/Ricardo Moraes)

रियो ओलंपिक के दौरान भारतीय खिलाड़ियों को पोडीयम पर स्वर्ण पदक के लिए खड़े होते हुए देखने का सपना संजोने वाले खेलप्रेमियों को निराशा हाथ लगी थी। लेकिन, उनका यह सपना पूरा किया है भारत के पैरालंपिक एथलीट मरियप्पन थांगावेलू ने। रियो पैरालंपिक खेलों के ऊंची कूद स्पर्धा में मरियप्पन थांगावेलू ने गोल्ड पर कब्जा जमाते हुए इतिहास रच दिया तो वहीं, वरुण भाटी ने इसी प्रतिस्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर भारत को दोहरी खुशी दी। इस प्रतिस्पर्धा का रजत पदक अमेरिका के सैम ग्रेवी को मिला। उधर, भारत के ही संदीप भाला फेंक स्पर्धा का कांस्य पदक जीतने से चूक गए और वह चौथे स्थान पर रहे।

थांगावेलू ने 1.89 मीटर की जंप लगाते हुए सोना जीता, जबकि भाटी ने 1.86 मीटर की जंप लगाते हुए कांस्य अपने नाम किया। वह पैरालंपिक खेलों में मुरलीकांत पेटकर (स्वीमिंग 1972 हेजवर्ग) और देवेंद्र झाझरिया (भाला फेंक, एथेंस 2004 ) के बाद गोल्ड जीतने वाले तीसरे भारतीय हैं। थांगावेलू और भाटी की इस सफलता के बाद अभी तक के सभी पैरालंपिक खेलों में भारत के कुल पदकों की संख्या 10 हो गई है, जिसमें 3 स्वर्ण, तीन रजत और चार कांस्य शामिल है। गौरतलब है कि 18 सितंबर तक चलने वाले पैरालंपिक खेलों में दो शरणार्थियों सहित 4,344 एथलीट हिस्सा ले रहे हैं। जबकि 154 देशों में इसका लाइव प्रसारण किया जा रहा है। पैरालिंपिक्स की शुरुआत 1948 में हुई थी। इसकी सबसे कामयाब खिलाड़ी त्रिशा ज़ोर्न हैं, उन्होंने कुल 55 मेडल जीते, जिनमें 41 स्वर्ण पदक शामिल हैं।

इस खेलों की तैयारी में कई अड़चने भी सामने आईं जब ब्राजील की सरकार को इस खेलों के आयोजन के लिए आपातकालीन ऋण की व्यवस्था करनी पड़ी। अंतरराष्ट्रीय पैरालंपिक समिति (आइपीसी) के अध्यक्ष फिलिप क्रावेन ने कहा कि पैरालंपिक खेलों के आयोजन में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा है। जिसमें बजट में कटौती, टिकटों की बिक्री में कमी और ब्राजील में पिछले कई दशकों में सबसे खराब मंदी का दौर भी शामिल है।

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रियो पैरालंपिक में पुरुषों के ऊंची कूद स्पर्धा में भारत के मरियप्पन थांगावेलू छलांग लगाते हुए। (PC: REUTERS/Ricardo Moraes) रियो पैरालंपिक में पुरुषों के ऊंची कूद स्पर्धा में भारत के मरियप्पन थांगावेलू छलांग लगाते हुए। (PC: REUTERS/Ricardo Moraes)

 

 

 

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