ताज़ा खबर
 

Rio Paralympics में गोल्‍ड मेडलिस्‍ट मरियप्‍पन की मां बेचती है सब्‍जी, इलाज के लिए 3 लाख का कर्ज है बाकी

पेरालिंपिक खेलों में यह भारत का तीसरा ही स्‍वर्ण पदक है। इससे पहले 1972 में मुरलीकांत पेटकर ने स्विमिंग और 2004 में देवेंद्र झाझडि़या ने जेवेलियन थ्रो में गोल्‍ड जीता था।

Author September 10, 2016 4:12 PM
मरियप्‍पन थंगावेलु ने रियो पेरालिंपिक में हाई जंप में गोल्‍ड मेडल जीत इतिहास रच दिया। (Photo: Reuters)

मरियप्‍पन थंगावेलु ने रियो पेरालिंपिक में हाई जंप में गोल्‍ड मेडल जीत इतिहास रच दिया। वे भारत के पहले गोल्‍ड मेडलिस्‍ट हैं जिन्‍होंने पेरालिंपिक्‍स में हाई जंप में गोल्‍ड जीता। उन्‍होंने 1.89 मीटर की जंप लगाई। इसी स्पर्धा में भारत के वरुण सिंह भाटी ने कांस्‍य पदक जीता। मेडल जीतने के बाद राष्‍ट्रपति प्रणव मुखर्जी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्‍य हस्तियों ने इनकी तारीफ की। लेकिन थंगावेलू ने यह सफलता हासिल करने से पहले काफी संघर्षों का सामना किया। तमिलनाडु के सलेम जिले के पेरियावडमगेट्टी गांव में जन्‍मे थंगावेलू का परिवार काफी गरीब है। उनकी मां सब्जियां बेचकर परिवार चलाती हैं। उनके पिता ने 10 साल पहले परिवार को छोड़ दिया था। थंगावेलू ने अपने इलाज के लिए तीन लाख रुपये का लोन लिया जो अभी तक बकाया है।

शुरुआती दिनों में थंगावेलू वॉलीबॉल खेलते थे। जब वे पांच साल के थे तो स्‍कूल जाते समय एक गाड़ी के नीचे उनका दायां पैर आ गया था। इसके चलते उनके दाएं पैर में स्‍थायी रूप से कमी रह गई। इस दुर्घटना का केस उनका परिवार अभी भी लड़ रहा है। फिजिकल एजुकेशन इंस्‍ट्रक्‍टर ने उन्‍हें हाई जंप में पारंगत किया। 14 साल की उम्र में उन्‍होंनें सक्षम खिलाडि़यों से मुकाबला किया। इस प्रतियोगिता में वे दूसरे स्‍थान पर रहे। 18 साल की उम्र में कोच सत्‍यनारायण ने नेशनल पेरा एथलेटिक्‍स चैंपियनशिप में उन्‍हें पहली बार देखा। इसके बाद उन्‍होंने थंंगावेलू को प्रशिक्षण दिया। पिछले साल वे वर्ल्‍ड नंबर वन बन गए। आईपीसी ट्यूनीशिया ग्रांड प्रिक्‍स में 1.78 की जंप लगाकर उन्‍होंने गोल्‍ड जीतने के साथ ही पेरालिंपिक्‍स के लिए क्‍वालिफाई भी कर लिया।

रियो-पैरालंपिक खेलों के ऊंची कूद स्पर्धा में भारत के मरियप्पन थांगावेलू ने लगाई स्वर्णिम छलांग, वरुण भाटी ने जीता कांस्य पदक

थंगावेलू बिजनेस एडमिनिस्‍ट्रेशन में ग्रेजुएट भी हैं। इसके बाद से वे नौकरी की तलाश कर रहे हैं। उनका परिवार एक कमरे के परिवार में रहता है, जिसके लिए वे 500 रुपये प्रति महीने चुकाते हैं। गोल्‍ड मेडल जीतने के बाद खेल मंत्रालय ने 75 लाख और तमिलनाडु सरकार ने दो करोड़ रुपये देने का एलान किया है। पेरालिंपिक खेलों में यह भारत का तीसरा ही स्‍वर्ण पदक है। इससे पहले 1972 में मुरलीकांत पेटकर ने स्विमिंग और 2004 में देवेंद्र झाझडि़या ने जेवेलियन थ्रो में गोल्‍ड जीता था।

Video: रियो पैरा ओलंपिक में भारत की ‘दाल रोटी’ को सबसे ज्यादा मिस कर रहा है यह खिलाड़ी

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App