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निगाह रखिए: फिर निकलेंगे नेमार, रोनाल्डिन्हो और फीगो

यह मत समझें कि यह सितारों का विश्व कप नहीं है। इसमें विलक्षण प्रतिभा वाले कुछ खिलाड़ी होंगे जिनसे हम अनजान हैं। स्टारडम पर पहुंचने की उनकी यह पहली सीढ़ी है।

Author October 5, 2017 5:10 AM
अंडर-17 विश्व कप (Photo-Twitter page FIFA.com)

सुरेश कौशिक
मांच के लिए तैयार हो जाएं। यह मत समझें कि यह सितारों का विश्व कप नहीं है। इसमें विलक्षण प्रतिभा वाले कुछ खिलाड़ी होंगे जिनसे हम अनजान हैं। स्टारडम पर पहुंचने की उनकी यह पहली सीढ़ी है। नेमार, रोनाल्डिन्हो, फीगो, बफन, टाम क्रूस और इनिएस्टा जैसे सुपरस्टार इसी अंडर-17 विश्व कप की खोज हैं। भारत के छह शहरों में छह अक्तूबर से शुरू हो रहे 17वें फीफा अंडर-17 विश्व कप में 24 देशों के पांच सौ से ज्यादा प्रतिभावान खिलाड़ी अपने सिर और पांव की कलाकारी से फुटबॉल प्रेमियों को मोहने कोशिश करेंगे। सपनों की उड़ान के साथ इनकी निगाह होगी विश्व कप खिताब पर।
इनमें मेजबान होने के नाते भारत भी होगा। यह ऐतिहासिक पल है क्योंकि अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल महासंघ (फीफा) की आयोजित टूर्नामेंटों में यह पहला अवसर है जब भारतीय खिलाड़ी दुनिया की बेहतरीन प्रतिभाओं से भिड़ेंगे। यह नन्हें फुटबॉल जादूगरों का विश्व कप है, इसलिए खिताब की दावेदार टीम का नाम उछालना भी आसान नहीं। यहां रैंकिंग के मायने बेमतलब हैं। अगर प्रतिष्ठा ही पैमाना होता तो अफ्रीकी टीमें दक्षिण अमेरिका और यूरोपीय टीमों से ज्यादा सफल नहीं रहती।

वैसे चैंपियन बनने से ही यह तय नहीं हो जाता कि कोई देश फुटबॉल का शक्तिपुंज हो जाए। जिस नाइजीरिया ने 2015 में चिली में हुए अंडर-17 विश्व कप में छठी बार खिताब जीता था, वह इस बार क्वालीफाई ही नहीं करता। शायद क्वालीफाइंग दौर में तय उम्र से ज्यादा खिलाड़ियों का कोई लफड़ा था। नाइजीरिया के तो बाहर होने की वजह रही। पर पुर्तगाल, इटली, अर्जेंटीना और नीदरलैंड जैसे तोप मुल्कों की जूनियर पौध का क्वालीफाई नहीं कर पाना तो और भी अचंभित करता है। इस अंडर-17 विश्व कप में खेलने का हक पाने के लिए अर्जेंटीना को कोलसेबोल चैंपियनशिप में टॉप चार टीमों में आना था पर वह ऐसा नहीं कर पाया। 2013 चैंपियनशिप में जो टीम चौथी आई, उसके आयु वर्ग टूर्नामेंटों में प्रदर्शन के ग्राफ गिरने को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

भारतीय दर्शकों को उनकी कमी काफी खलेगी। ब्राजील और अमेरिका दो ऐसी टीमें हैं जिन्होंने फीफा अंडर-17 विश्व कप में सबसे ज्यादा 15 बार शिरकत की है। दोनों ही टीमें 16वीं बार चुनौती पेश करेंगी। पर 2003 के बाद से ब्राजील का फाइनल तक नहीं पहुंचना यह बताता है कि सफर में छोटी और अनजान टीमें भी पटकनी दे सकती हैं। पर इस बार टीम विंसियस जूनियर को लेकर काफी उत्साहित है। इस खिलाड़ी को ब्राजील का भावी सितारा माना जा रहा है। इसके कौशल की गूंज तो यूरोप में पहुंच चुकी है। तभी तो रिअल मैड्रिड जैसे शीर्ष स्पेनी क्लब ने इसे अच्छी खासी रकम में खरीदा है।  बहरहाल शुक्रवार से शुरू हो रहे विश्व कप में लड़ाई कौशल से कौशल की है। प्रशिक्षकों की रणनीति और शैलियों से टीमें नतीजों को अपने पक्ष में करेंगी। भारतीयों के लिए सीखने को काफी कुछ होगा। जीत न भी सही, खिलाड़ियों के खेल स्तर में इजाफा होता है तो भी सोने पर सुहागा होगा।

 

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