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विवादों से भरे 2016 में भारतीय कुश्ती को शर्मसार होने से बचाया साक्षी मलिक ने

साक्षी ने महिलाओं के 58 किग्रा फ्रीस्टाइल के कांस्य पदक के लिये खेले गये प्लेऑफ मुकाबले में 0-5 से पिछड़ने के बाद किर्गीस्तान की आइसुलु टिनिबेकोवा को 8-5 से हराया।

Author नई दिल्ली | Updated: December 19, 2016 8:30 PM
Sakshi Malik, Sakshi Malik News, Sakshi Malik latest news, Indian wrestling in 2016, Sakshi Malik Rio, Indian wrestling news, Indian wrestling Latest newsरियो ओलंपिक 2016 में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने वाली साक्षी मलिक। (Source: Reuters)

एक पहलवान के डोप में पकड़े जाने के बाद अदालत में चली जंग के कारण भारतीय कुश्ती वर्ष 2016 में विवादों में फंसी रही लेकिन आखिर में साक्षी मलिक ने रियो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर उसे शर्मसार होने से बचा दिया। साल में अधिकतर समय कुश्ती गलत कारणों से सुर्खियों में रही। ओलंपिक से पहले की तैयारियां उथल पुथल भरी रही क्योंकि दो बार के ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार को रियो खेलों से दो महीने पहले पता चला कि उन्हें टीम में नहीं चुना गया है। इसके बाद कई ऐसी घटनाएं हुई जिससे खेल को बदनामी झेलनी पड़ी लेकिन साक्षी ने ब्राजीली शहर में भारत के लिये पहला पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया। वह ओलंपिक पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनी। भारत जब रियो में पदक के लिये जूझ रहा था तब साक्षी के मलिक ने उसके लिये संजीवनी का काम किया। बाद में बैडमिंटन खिलाड़ी पी वी सिंधु ने रजत पदक हासिल किया।

साक्षी ने महिलाओं के 58 किग्रा फ्रीस्टाइल के कांस्य पदक के लिये खेले गये प्लेऑफ मुकाबले में 0-5 से पिछड़ने के बाद किर्गीस्तान की आइसुलु टिनिबेकोवा को 8-5 से हराया। उनके इस पदक के कारण आठ सदस्यीय कुश्ती दल के लचर प्रदर्शन पर भी किसी का ध्यान नहीं गया। भारतीय टीम में पहली बार तीन महिला पहलवान शामिल थी लेकिन केवल साक्षी ही पदक जीतने में सफल रही। लंदन ओलंपिक के कांस्य पदक विजेता योगेश्वर दत्त से काफी उम्मीद थी लेकिन वह क्वॉलीफाईंग दौर में ही बाहर हो गये। साक्षी के चमत्कारिक प्रदर्शन से कुछ राहत मिली क्योंकि नरसिंह यादव के बाहर होने से भारत काफी निराशा में था। नरसिंह पर डोप परीक्षण में नाकाम रहने के कारण चार साल का प्रतिबंध लगा दिया गया क्योंकि खेल पंचाट (कैस) ने राष्ट्रीय डोपिंग रोधी एजेंसी (नाडा) द्वारा इस पहलवान को दिये गये क्लीन चिट के फैसले को बदल दिया था।

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने नरसिंह के मुकाबले से तीन दिन पहले नाडा के फैसले को कैस में चुनौती दी थी। इस 27 वर्षीय पहलवान का नाम वजन कराने के लिये ओलंपिक कार्यक्रम की आधिकारिक सूची में दर्ज था लेकिन कैस के फैसले ने उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। यहां तक कि ओलंपिक से पहले जो कुछ हुआ वह नरसिंह और भारतीय टीम के लिये अच्छा नहीं रहा। विशेषकर नरसिंह के लिये परेशानियां खत्म नहीं हुई। इसकी शुरुआत 74 किग्रा में ओलंपिक सीट पर दावेदारी से हुई और आखिर में मामला अदालत में चला गया। नरसिंह अदालत में जीत गया लेकिन इसके बाद उनका परीक्षण प्रतिबंधित पदार्थ के सेवन के लिये पाजीटिव पाया गया। इससे पहले सितंबर 2015 में नरसिंह ने लास वेगास में विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतकर भारत के लिये ओलंपिक कोटा हासिल किया था।

नरसिंह को हालांकि पता था कि उनका ओलंपिक में जाना पक्का नहीं है क्योंकि सुशील भी इस भार वर्ग में खेलते हैं। डब्ल्यूएफआई के नियमों के अनुसार कोटा देश को मिलता है और इसलिए पूर्व विश्व चैंपियन सुशील ने 74 किग्रा भार वर्ग में ट्रायल कराने को कहा। नरसिंह ने सीट पर अपनी दावेदारी जतायी और भारतीय कुश्ती महासंघ (डब्ल्यूएफआई) ने भी उन्हें ही रियो के लिये चुना क्योंकि उसका मानना था कि ट्रायल करवाने पर अन्य भार वर्गों के पहलवान भी ऐसी मांग करेंगे। ऐसी स्थिति में सुशील दिल्ली उच्च न्यायालय चले गये। बीजिंग 2008 में कांस्य और लंदन 2012 में रजत पदक जीतने वाले सुशील की याचिका हालांकि अदालत ने खारिज कर दी। नरसिंह के लिये रास्ता साफ हो गया और वह तैयारियों में जुट गये लेकिन ओलंपिक शुरू होने से एक पखवाड़े पहले वह डोपिंग में फंस गये।

नरसिंह निर्दोष होने का दावा करते रहे। उन्होंने कहा कि उनके पानी और खाने में प्रतिबंधित पदार्थ मिलाकर उनके खिलाफ साजिश की गयी। डब्ल्यूएफआई ने भी उनका साथ दिया लेकिन उनमें से कोई भी इसके पक्ष में पर्याप्त साक्ष्य नहीं दे पाये। साल में अधिकतर समय विवादों से घिरे खेल में अब सब की निगाहें पेशेवर कुश्ती लीग पर टिकी थी लेकिन उसे भी अगले साल के लिये स्थगित कर दिया गया। इसका कारण विमुद्रीकरण बताया गया। पीडब्ल्यूएल दो का आयोजन दो से 19 जनवरी 2017 को किया जाएगा। अब कुश्ती 2017 में सुखद शुरूआत की उम्मीद ही कर सकती है।

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