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ड्रैग फ्लिकर रघुनाथ ने कहा, 2014 एशियाड के स्वर्ण के बाद हॉकी टीम आत्मविश्वास हासिल किया

शीर्ष ड्रैग फ्लिकर वी आर रघुनाथ ने ने कहा, "2014 से पहले हमारी रैंकिंग 12, 13 थी लेकिन हाल में हम छठे नंबर पर काबिज रहे और हम विश्व रैंकिंग में हमारा स्थान सातवां है।’’

Author बेंगलुरु | May 10, 2016 8:39 PM
शीर्ष ड्रैग फ्लिकर वी आर रघुनाथ। (एक्सप्रेस फाइल फोटो)

शीर्ष ड्रैग फ्लिकर वी आर रघुनाथ ने कहा कि 2014 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्होंने जो आत्मविश्वास हासिल किया, उसी की बदौलत भारतीय पुरुष हॉकी टीम हालिया वर्षों में विश्व स्तर पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने में सफल रही। रघुनाथ ने चैम्पियंस ट्रॉफी से पहले कहा, ‘‘2014 में एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक जीतने के बाद टीम ने दोबारा खुद पर भरोसा करना शुरू कर दिया। हम कभी भी उस मंच से नीचे नहीं आना चाहते थे, हम सिर्फ ऊपर ही बढ़ना चाहते थे। 2014 से पहले हमारी रैंकिंग 12, 13 थी लेकिन हाल में हम छठे नंबर पर काबिज रहे और हम विश्व रैंकिंग में हमारा स्थान सातवां है।’’

इस 27 वर्षीय डिफेंडर ने कहा, ‘‘कोई भी प्रतिद्वंद्वी अब हमें हल्के में नहीं लेता है और बतौर टीम वे हमारी बात करते हैं जो नॉकआउट में अच्छा प्रदर्शन करती है। मेरा मानना है कि हमारे पास अच्छा मौका है और हम आगामी टूर्नामेंट में सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।’’ वह टीम के वरिष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं लेकिन रघुनाथ ने कहा कि कोई भी आत्ममुग्ध नहीं हो सकता।

रघुनाथ ने कहा, ‘‘कोई भी भारतीय टीम में अपने स्थान को हल्के में नहीं ले सकता, आपको लगातार खुद को साबित करना होगा। जो भी अच्छा प्रदर्शन करेगा, वो टीम में रहेगा और व्यक्तिगत रूप से कहूं तो मैं ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी और नीदरलैंड जैसी बड़ी टीमों के खिलाफ आगामी टूर्नामेंट में खुद का परीक्षण करना चाहूंगा और अपने प्रदर्शन का आकलन करना चाहता हूं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘प्राथमिकता होगी कि ज्यादा से ज्यादा पेनल्टी कॉर्नर को गोल में तब्दील किया जाए ताकि मेरी टीम पहले दो क्वार्टर में सहज स्थिति में रहे।’’

रियो ओलंपिक के लिए यहां साई सेंटर में चल रही तैयारियों के बारे में बात करते हुए रघुनाथ ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि हम किसी भी बड़े टूर्नामेंट के लिए पहले से कहीं ज्यादा बेहतरीन तरीके से तैयार हैं, भले ही यह शारीरिक, मानसिक और मनोवैज्ञानिक रूप से हो। हम सिर्फ व्यक्तिगत रूप से सुधरने पर ही ध्यान नहीं लगाए हुए बल्कि हम एक दूसरे को भी प्रेरित करते हैं और खुद को कहते हैं कि इस बार ओलंपिक में अपनी छाप छोड़ने के लिए हमें बतौर इकाई एकजुट होकर प्रदर्शन करने की जरूरत है।’’

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