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गोल्ड जीतने पर दुती चंद के मां-बाप ने बांटी मिठाइयां, लेकिन बेटी के समलैंगिक रिश्ते पर सख्त आपत्ति

दुति के माता-पिता ने कहा कि "वह इसका विरोध करना जारी रखेंगे, लेकिन हमारी शुभकामनाएं हमेशा उसके साथ हैं। हम चाहते हैं कि वह और कामयाबी हासिल करे और देश और राज्य का मान बढ़ाए।"

भारतीय एथलीट दुती चंद ने इटली में जारी खेलों में स्वर्ण पदक जीता है। (file pic)

भारतीय खिलाड़ी दुति चंद उस वक्त विवादों में आ गई थीं, जब उन्होंने समलैंगिक रिश्ते की बात स्वीकारी थी। दुति के इस खुलासे के बाद ना सिर्फ उनके परिवार वाले बल्कि गांव के लोग भी नाराज हुए थे और उनका कहना था कि दुति चंद ने उनके सिर शर्म से झुकाए हैं। हालांकि उस विवाद के 2 माह बाद दुति चंद फिर से सुर्खियों में हैं। इस बार वह अपनी निजी जिन्दगी को लेकर नहीं बल्कि अपने खेल की वजह से चर्चा में आयी हैं। बता दें कि दुति चंद ने इटली के नेपोली में खेले जा रहे वर्ल्ड यूनिवर्सियाड खेलों में 100 मीटर स्प्रिंट प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया है।

दुति की सफलता की इतनी खुशी थी कि उनके माता-पिता ने गांव में जमकर मिठाईयां बांटी। गांव वाले भी दुति की इस जीत से काफी खुश दिखाई दिए। हालांकि दुति के माता-पिता अभी भी उनके समलैंगिक रिश्ते के खिलाफ हैं और उनका कहना है कि इस बात को लेकर उनके रुख में कोई बदलाव नहीं आया है। दुति के माता-पिता ने कहा कि “वह इसका विरोध करना जारी रखेंगे, लेकिन हमारी शुभकामनाएं हमेशा उसके साथ हैं। हम चाहते हैं कि वह और कामयाबी हासिल करे और देश और राज्य का मान बढ़ाए।”

दुति की बड़ी बहन सरस्वती ने भी अपनी बहन को बधाई दी। बता दें कि दुति ने अपनी बहन सरस्वती पर आरोप लगाया था कि उसने पैसों के लिए उसे ब्लैकमेल किया था। सरस्वती ने कहा कि ‘दुति ने गोल्ड मेडल जीता, हम इस बात से बेहद खुश हैं। वह राज्य के युवाओं की प्रेरणा स्त्रोत है और हमें उस पर गर्व है।’ वहीं दुति चंद ने अपना मेडल अपनी यूनिवर्सिटी KIIT और इसके फाउंडर और बीजद सांसद अच्युत सामंत और राज्य के लोगों को समर्पित किया।

दुति चंद किसी अन्तरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में 100 मीटर रेस में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बन गई हैं। दुति चंद ने इस रेस को पूरा करने में 11.32 सेकेंड का समय लिया। टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में दुति चंद ने बताया कि “यह मेरे परिवार, मेरी बड़ी बहन सरस्वती और मां अखुजी को संदेश है, जो मेरे समलैंगिक रिश्ते के खिलाफ हैं। यह स्वर्ण पदक उन्हें और मेरे सभी आलोचकों को मेरा जवाब है कि मैं अपनी निजी जिन्दगी और एथलेटिक्स करियर दोनों को संभाल सकती हूं। मुझे उनकी सलाह की कोई जरुरत नहीं है। मैं अपने फैसले लेने के लिए मैच्योर हूं।”

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