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Asian Games 2018: कैंसर से जूझ रहा पिता, बेटे ने जीता गोल्ड

कैंसर से जूझ रहे अपने पिता को पंजाब के एक हॉस्पिटल में छोड़कर एशियन गेम्स के लिए आना तजिंदरपाल सिंह तूर के लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद तूर ने यह कड़ा फैसला लिया और आखिर उनकी मेहनत रंग लाई। पंजाब के मोगा जिले के रहने वाले 23 वर्षीय तजिंदर ने न सिर्फ गोल्ड मेडल जीता बल्कि अपने पांचवें प्रयास में 20.75 मीटर गोला फेंककर एशियाई खेलों में नया रेकॉर्ड भी बना लिया।

तेजेन्दरपाल सिंह । (Reuters Photo)

भारत के तेजेन्दरपाल सिंह तूर ने 18वें एशियाई खेलों के सातवें दिन शनिवार को शॉट पुट स्पर्धा का स्वर्ण पदक जीत लिया। तूर ने एशियाई रिकॉर्ड के साथ पहला स्थान हासिल किया। कैंसर से जूझ रहे अपने पिता को पंजाब के एक हॉस्पिटल में छोड़कर एशियन गेम्स के लिए आना तजिंदरपाल सिंह तूर के लिए आसान नहीं था। इसके बावजूद तूर ने यह कड़ा फैसला लिया और आखिर उनकी मेहनत रंग लाई। पंजाब के मोगा जिले के रहने वाले 23 वर्षीय तजिंदर ने न सिर्फ गोल्ड मेडल जीता बल्कि अपने पांचवें प्रयास में 20.75 मीटर गोला फेंककर एशियाई खेलों में नया रेकॉर्ड भी बना लिया। उन्होंने छह साल पहले के ओम प्रकाश करहाना (20.69 मीटर) के रेकॉर्ड को तोड़ा। तूर ने कहा कि वह गोल्ड मेडल जीतने के बारे में नहीं सोच रहे थे बल्कि उनका लक्ष्य 21 मीटर गोला फेंकना था। गोल्ड मेडल जीतने के बाद उन्होंने कहा, ‘मेरा सिर्फ एक ही लक्ष्य था, 21 मीटर के पार गोला फेंकना। तजिंदरपाल ने कहा कि यह पदक उनके परिवार के लिए काफी मायने रखता है। उन्होंने कहा, ‘यह मेडल मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है क्योंकि इसके लिए मैंने काफी त्याग किए हैं।

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पिछले दो साल से मेरे पिता, करम सिंह, कैंसर से जूझ रहे हैं। हालांकि मेरे परिवार ने कभी मेरा ध्यान भटकने नहीं दिया। उन्होंने मेरा सपना पूरा करने में मेरी मदद की। मेरे परिवार और दोस्तों ने इसके लिए काफी त्याग किए हैं और आज उन सबका नतीजा सामने है।’ तजिंदर ने आगे कहा, ‘मेरे परिवार ने कभी मुझे पिता के साथ हॉस्पिटल में रहने के लिए दबाव नहीं बनाया। मेरी गैरमौजूदगी में मेरे दोस्तों ने हॉस्पिटल के सारे काम संभाले।’

उन्होंने आगे कहा, ‘इस बीच मैं घर ज्यादा नहीं जा पाया हूं क्योंकि मैं धर्मशाला में ट्रेनिंग कर रहा था।’ तूर ने कहा, ‘मैं अब अपने पिता से मिलूंगा लेकिन मैं वहां सिर्फ दो दिनों के लिए रहूंगा। मुझे अब अपने अगले लक्ष्य के लिए तैयार होना है। मेरे कोच एमएस ढिल्लों को भी श्रेय जाता है। उन्होंने मेरे लिए काफी मेहनत की है।’ (भाषा इनपुट के साथ)

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