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एशियाई खेलः सिर्फ स्क्वैश में की जा सकती है सोने की उम्मीद

हाल में भारत ने बैडमिंटन और टेबल टेनिस में भारतीय खिलाड़ियों को राष्ट्रमंडल खेलों की पदक तालिका में सबसे ऊपर देखा। स्क्वैश टीम ने दो रजत पदक हासिल किए जबकि टेनिस इन खेलों का हिस्सा नहीं था।

Author Published on: June 28, 2018 5:42 AM
साइना लंदन और सिंधू रियो ओलंपिक में पदक जीतने का कमाल कर चुकी हैं।

मनोज जोशी

हाल में भारत ने बैडमिंटन और टेबल टेनिस में भारतीय खिलाड़ियों को राष्ट्रमंडल खेलों की पदक तालिका में सबसे ऊपर देखा। स्क्वैश टीम ने दो रजत पदक हासिल किए जबकि टेनिस इन खेलों का हिस्सा नहीं था। मगर बैडमिंटन और टेबल टेनिस में राष्ट्रमंडल खेल के दबदबे की कहानी एशियाई खेलों में हाशिये पर दिखाई देने लगती है। आलम यह है कि 1958 में एशियाई खेलों में शामिल टेबल टेनिस में आज तक भारत को एक कांसे का तमगा भी नसीब नहीं हो सका है। वहीं 1962 से एशियाई खेलों में शामिल बैडमिंटन में भारत को आज तक एक भी सोना या चांदी नसीब नहीं हो सका है। यदि 36 साल पहले अपनी मेजबानी में हासिल पांच कांस्य पदकों को छोड़ दें तो भारत को 1986 और 2014 में ही दो कांसे के तमगे नसीब हो पाए हैं।

स्क्वैश और टेनिस में कहानी थोड़ी अलग है। 20 साल पहले इन खेलों में शामिल स्क्वैश में भारत को अब तक एक स्वर्ण, दो रजत और पांच कांस्य पदक और टेनिस में आठ स्वर्ण, छह रजतद और 15 कांस्य पदक हासिल हुए हैं। मगर इस बार टेनिस में न तो सानिया मिर्जा होंगी और न ही 44 वर्षीय लिएंडर पेस में अब पहले जैसी ऊर्जा बची है। टेबल टेनिस में हाल में मणिका बत्रा ने गोल्ड कोस्ट में उम्मीदें जगाई हैं। उन्होंने एकल खिताब जीतने से पहले विश्व नंबर चार खिलाड़ी को हराकर सनसनी फैला दी थी लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक बड़े उलटफेर से किसी खिलाड़ी से आला दर्जे की चैम्पियनशिप में खिताब जीतने की उम्मीद नहीं की जा सकती।

गोल्ड कोस्ट में तीन स्वर्ण, दो रजदत और तीन कांस्य पदक जीतने से हमें कोई मुगालता नहीं पालना चाहिए। इसी तरह बैडमिंटन में गोल्ड कोस्ट में दो स्वर्ण सहित छह पदक जीतने वाले भारतीय खिलाड़ियों की चुनौती इस बार चीन, दक्षिण कोरिया, इंडोनेशिया, मलयेशिया, थाईलैंड और चीनी ताइपे के सामने हाशिये पर ही दिखाई देती है। यहां तक कि इस साल आयोजित एशियाई चैंपियनशिप में भारत दो कांसे के तमगे ही जीत सका था। बेशक हाल में किदांबी श्रीकांत और एचएस प्रणय से लेकर साइना और सिंधू ने कई रेकॉर्डतोड़ उपलब्धियां हासिल करते हुए कई मौकों पर चीन की दीवार को ढहाया है लेकिन ये सारी उपलब्धियां ग्रांप्री और सुपर सीरीज मुकाबलों तक सीमित हैं।

हालांकि साइना लंदन और सिंधू रियो ओलंपिक में पदक जीतने का कमाल कर चुकी हैं। वहीं जिस स्क्वैश के खेल में भारत का प्रदर्शन गोल्ड कोस्ट में बैडमिंटन और टेबल टेनिस के मुकाबले काफी हल्का रहा है, उस खेल में भारत के चमकने की उम्मीद की जा सकती है। सच तो यह है कि रैकेट स्पोर्ट्स में यही ऐसा खेल है जिसमें भारत को पिछले एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक हासिल हुआ था। पिछले साल एशियाई चैम्पियनशिप में पुरुष और महिला वर्ग के एकल मुकाबलों के फाइनल में पहुंचे कुल चार में से तीन खिलाड़ी भारतीय थे भारत को बड़ी चुनौती मलयेशिया, कुवैत और हांगकांग से ही मिल सकती है। ज़ाहिर है कि इस बार पीवी सिंधू और सायना से उम्मीदें रखें लेकिन उनसे ज़्यादा उम्मीदें जोशना चिनप्पा, दीपिका पल्लिकल, सौरभ घोषाल, हरिंदर, सुनैना, तनवी, रमित और महेश से रखें जो रैकेट स्पोर्ट्स में भारत को सोना दिलाने का कमाल कर सकते हैं।

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