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भेजने थे खि‍लाड़ी, पर बैडमि‍ंटन असोसि‍एशन के अफसरों ने अपने बच्‍चों को भेज दि‍या जापान

इस टूर्नामेंट के लिए न तो किसी तरह का ट्रायल हुआ और न ही योग्य बैडमिंटन खिलाड़ियों को न्योता देने के लिए किसी तरह का विज्ञापन छपवाया गया।

चित्र का इस्तेमाल सिर्फ प्रतीक के तौर पर किया गया है।

भारतीय बैडमिंटन असोसिएशन (बीआईए) के अफसरों के खिलाफ बड़ी धांधलेबाजी का खुलासा हुआ है, जिसके बाद बीआईए के अध्यक्ष अखिलेश दास गुप्ता निशाने पर आ गए हैं। आरोप है कि अधिकारियों ने अपने बच्चों को एक सद्भावना यात्रा के तहत जापान भेज दिया, जिनमें से ज्यादा अयोग्य थे। अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी। वह डीसीबीए के कुछ अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश के संबंध में मंत्रालय को एक रिपोर्ट भेज चुकी है।

यह है मामला: टाइम्स अॉफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2014 में जापानी सरकार ने यूथ स्पोर्ट्स एक्सचेंज प्रोग्राम का आयोजन किया था और जिन खिलाड़ियों को इस फ्रेंडली टूर्नामेंट में खेलने के लिए भेजा गया था, वह असल में बीआईए और उसकी दिल्ली यूनिट-दिल्ली कैपिटल बैडमिंटन असोसिएशन के अधिकारियों के बच्चे और उनके रिश्तेदार थे। इस टूर्नामेंट का सारा खर्चा जापानी सरकार ने उठाया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इनमें से कई खिलाड़ी तो टूर्नामेंट में खेलने के योग्य भी नहीं थे।

हुआ भारी भेदभाव: इस टूर्नामेंट के लिए न तो किसी तरह का ट्रायल हुआ और न ही योग्य बैडमिंटन खिलाड़ियों को न्योता देने के लिए किसी तरह का विज्ञापन छपवाया गया। इस टूर्नामेंट के चयन करने का मापदंड था कि खिलाड़ियों की उम्र 17-23 के बीच होनी चाहिए और उन्हें देश को क्षेत्रीय या राज्य स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया हो। लेकिन जिन खिलाड़ियों को भेजा गया था, लेकिन इस नियम की भी अनदेखी की गई। जांच में पा चला है कि टीम के 23 खिलाड़ियों में से 7 बीएआई के अफसरों के बच्चे और करीबी रिश्तेदार थे। वहीं गुप्ता ने सीबीआई को पताया कि यह एक सिटी एक्सचेंज प्रोग्राम था और इसका बीआईए से कोई लेना-देना नहीं था। डीसीबीए ने बच्चों का चयन किया था क्योंकि यह टूर्नामेंट दिल्ली और तोक्यो के बीच था। उन्होंने कहा कि जहां तक उनकी बेटी की बात है, वह तोक्यो गई थी क्योंकि उसका डीसीबीए ने चयन किया था और मैं उस सिलेक्शन का हिस्सा नहीं था।

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