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कोहली ही नहीं, कुंबले और सचिन ने भी भयंकर दर्द के साथ खेला था मैच

बहादुरी की कई मिसालें क्रिकेट के मैदान पर मौजूद हैं। कई बार ऐसा हुआ कि क्रिकेटर्स ने अपने दर्द को किनारे रखकर देश को आगे रखा और खेल का स्तर बढ़ाया।
Author नई दिल्ली | May 20, 2016 14:40 pm
एक टेस्ट मैच जीतने के बाद वापस ड्रेसिंग रूम की तरफ जाते सहवाग, कुंबले और ​सचिन। – फाइल फोटो

विराट कोहली इन दिनों अपने करियर के सबसे बेहतरीन फार्म में हैं। इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) के इस सीजन में चौथा शतक जड़ने के बाद उनकी तुलना सर डॉन ब्रैडमैन और सचिन तेंदुलकर जैसे दिग्गजों से होने लगी है। विराट आईपीएल में 4,000 रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए हैं। उनकी ये उपलब्धि इसलिए खास हो जाती है क्योंकि पिछले दो मैचों में उन्होंने चोट से जूझते हुए टीम के लिए रन बटोरे हैं ताकि रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर अंतिम चार में जगह बना सके।

‘भद्रजनों का खेल’ कहे जाने वाले क्रिकेट में चोट लगना आम बात है। उनमें से कई चोट तो ऐसी होती हैं कि खिलाड़ी का करियर और जिंदगी दांव पर लग जाता है। लेकिन बहादुरी की कई मिसालें क्रिकेट के मैदान पर मौजूद हैं। कई बार ऐसा हुआ कि क्रिकेटर्स ने अपने दर्द को किनारे रखकर देश को आगे रखा और खेल का स्तर बढ़ाया।

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ऐसे वाकये जब भारतीय क्रिकेटर्स ने चोट को मुंह चिढ़ाया और भयंकर दर्द के बावजूद मैदान पर उतरे।

अनिल कुंबले, वेस्टइंडीज बनाम भारत, चौथा टेस्ट, एंटीगुआ, 2002

पांच मैचों की श्रृ्ंखला में वेस्टइंडीज ने तीसरा टेस्ट जीत कर बराबरी कर ली थी। चौथे मैच में भारत को पहले बैटिंग करनी पड़ी और टीम ने लक्ष्मण और अजय रात्रा के शतकों की बदौलत नौ विकेट पर 513 रन का स्कोर खड़ा किया। इसी पारी में 7वें नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरे कुंबले को मर्वन डिल्लन की एक बाउंसर ने घायल कर दिया। हेलमेट पहने होने के बावजूद उनका जबड़ा टूट गया था। लगातार खून बहने के बावजूद कुंबले ने वापस लौटने से मना कर दिया और बल्लेबाजी जारी रखी।

टूटे हुए जबड़े के साथ कोई भी मैच खेलने नहीं उतरेगा। लेकिन कुंबले चेहरे पर पट्टियां बांधकर मैदान पर उतरे। कुंबले ने 14 ओवर गेंदबाजी की और ब्रायल लारा का विकेट पाने में कामयाब रहे। अलग दिन कुंबले को इलाज के लिए वापस जबरदस्ती बंगलौर भेजा गया।

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सचिन तेंदुलकर, भारत बनाम पाकिस्तान, पहला टेस्ट, चेन्नई, 1999

ये यादगार मैच था। भारत और पाकिस्तान दशकों बाद टेस्ट मैच खेल रहे थे। दोनों देशों के बीच क्रिकेट मैच के दौरान रोमांच जगजाहिर है। उस वक्त सचिन जबरदस्त फार्म में थे और वसीम अकरम, वकार यूनुस के साथ उनका मुकाबला क्रिकेट प्रेमियों के लिए जैकपॉट से कम नहीं था। पहली पारी में 16 रन की लीड लेने के बाद भारत ने पाकिस्तान को 286 पर समेट दिया। भारत को जीत के लिए 271 रन चाहिए थे लेकिन उसके पांच बल्लेबाज 82 रन पर ही आउट हो चुके थे। अब सारा दारोमदार सचिन पर था जो पीठ के दर्द से जूझ रहे थे।

चौथे दिन का पूरा खेल सचिन के जज्बे और पाकिस्तानी गेंदबाजी के बीच किसी जंग जैसा चला। तेंदुलकर का साथ देने के लिए दूसरे छोर पर नयन मोंगिया मौजूद थे। तेंदुलकर ने पूरी तन्मयता के साथ बल्लेबाजी करते हुए अपना 18वां टेस्ट शतक जड़ा। सचिन भारत को जीत की दहलीज पर जा चुके थे कि सकलैन मुश्ताक की एक गेंद पर मिड आॅड फील्डर को कैच थमा बैठे। इसके बाद पुछल्ले बल्लेबाज टिककर नहीं खेल सके और पाकिस्तान 12 रन से जीत दर्ज करने में कामयाब रहा।

भारत पाकिस्तान के बीच टेस्ट मैच से इतर ये मैच कई वजहों से याद किया जाता है। मैदान पर भीड़ ने पाकिस्तानी टीम की जीत के बाद खड़े होकर हौसलाअफजाई की। लेकिन तेंदुलकर दबाव के बीच दर्द से जूझने एक साहसिक पारी खेलकर दिल जीत चुके थे।

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