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मुश्किल में बीसीसीआई के सचिव जय शाह, बोर्ड में CAG की प्रतिनिधि ने कहा- उन्हें काउंसिल की बैठक में हिस्सा लेने का अधिकार नहीं

बीसीसीआई ने कूलिंग-ऑफ क्लॉज को रद्द करने के लिए कहा है। इसके लिए उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यदि संशोधन की अनुमति दी जाती है, तो सौरव गांगुली और शाह 2025 तक अध्यक्ष और सचिव पद पर बने रहेंगे।

जय शाह पिछले साल बीसीसीआई के सचिव बने थे। (सोर्स – सोशल मीडिया)

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के सचिन जय शाह मुश्किलों में घिरते नजर आ रहे हैं। बोर्ड में CAG की प्रतिनिधि अलका रेहानी भारद्वाज ने कहा है कि उन्हें काउंसिल की बैठकों में अब हिस्सा नहीं लेना चाहिए। दरअसल, जय शाह का कार्यकाल खत्म हो चुका है। वे मौजूदा नियमों के मुताबिक कूलिंग ऑफ पीरियड में चले गए हैं। इसके खिलाफ बीसीसीआई ने सुप्रीम कोर्ट में अपील भी की है। प्रशासकों की समिति (सीओए) ने नियम बनाया था कि कोई भी व्यक्ति राज्य क्रिकेट संघ या बीसीसीआई में लगातार 6 साल किसी भी पद पर बना रहता है, तो उसे 3 साल के अनिवार्य ब्रेक पर जाना होगा। इसे सुप्रीम कोर्ट ने भी मंजूरी दी थी।

हमारे सहयोगी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, BCCI के संविधान में कूलिंग-ऑफ क्लॉज की ओर इशारा करते हुए अलका रेहानी ने 17 जुलाई को होने वाली काउंसिल की बैठक में सचिव जय शाह को हिस्सा नहीं लेने के लिए कहा है। लोढ़ा समिति के नियमों के लागू होने के बाद रेहानी बीसीसीआई में CAG की पहली प्रतिनिधि हैं। उनका कहना है कि काउंसिल की बैठक में संयुक्त सचिव हिस्सा लें। सचिव का पद फिलहाल खाली है। क्योंकि अब न तो जय शाह का कार्यकाल बढ़ाया गया और ना ही नए सचिव का चुनाव हुआ है।

बीसीसीआई ने कूलिंग-ऑफ क्लॉज को रद्द करने के लिए कहा है। इसके लिए उसने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। यदि संशोधन की अनुमति दी जाती है, तो सौरव गांगुली और शाह 2025 तक अध्यक्ष और सचिव पद पर बने रहेंगे। मौजूदा बीसीसीआई संविधान के अनुसार, गांगुली का कार्यकाल अगले महीने समाप्त होगा। इसलिए वे बैठक में हिस्सा ले सकते हैं। दिसंबर 2019 में अपनी वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में बीसीसीआई ने लोढ़ा समिति द्वारा बोर्ड के संविधान में किए गए सभी प्रमुख सुधारों से किनारा करने का फैसला लिया था।

जब गांगुली अध्यक्ष बने थे तब उनके पास अपने छह साल के कार्यकाल में केवल 278 दिन बचे थे। उन्होंने बाकी का समय सीएबी (क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल) अध्यक्ष और संयुक्त सचिव के रूप में बिताया था। बोर्ड के एक अधिकारी ने कहा कि चूंकि मामला न्यायिक है, इसलिए यथास्थिति बनाए रखी जानी चाहिए। शाह ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, लेकिन उनकी टीम के एक सदस्य ने कहा, ‘‘एजीएम ने संविधान में संशोधन किया, हम इसे लेकर उच्चतम न्यायालय गए हुए है। अदालत ने हमारा आवेदन स्वीकार कर लिया है। बोर्ड यथास्थिति बनाए रखेगा और जय बैठक में भाग लेंगे।’’

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