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निकहत जरीन कभी खून से सनी आंख के साथ लौटी थीं घर, अब वर्ल्ड चैंपियन को हरा किया उलटफेर

जरीन के अलावा 2013 के एशियाई चैम्पियन शिव थापा, सोनिया लाठेर और परवीन ने भी अपने वर्गों में जीत दर्ज करके क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। हालांकि, दुर्योधन नेगी (69 किग्रा), ब्रजेश यादव (81 किग्रा) और कृष्ण शर्मा (91 किग्रा से अधिक) को हार का सामना करना पड़ा।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: March 18, 2021 3:29 PM
NiKhat Zareen Boxer Mary Komनिकहत जरीन को पहली अंतरराष्ट्रीय जीत 2011 में मिली थी। तब उन्होंने महिला जूनियर और युवा विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था। (सोर्स- इंस्टाग्राम निकहत जरीन)

मुक्केबाजी में भारत की नई चुनौती बनकर उभर रहीं भारत की निकहत जरीन (Nikhat Zareen) ने इस्तांबुल में चल रहे बोसफोरस मुक्केबाजी टूर्नामेंट में उलटफेर किया। निकहत जरीन ने महिलाओं के 51 किग्रा वर्ग में मौजूदा विश्व चैम्पियन पाल्टसेवा एकेटरीना को हराकर क्वार्टर फाइनल में प्रवेश किया। एशियाई चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीतने वाली जरीन ने टूर्नामेंट के दूसरे दिन रूसी मुक्केबाज को 5-0 से हराया।

भारतीय मुक्केबाज को अंतिम-8 (क्वार्टर फाइनल) के मुकाबले में कजाकिस्तान की दो बार की विश्व चैम्पियन किजाइबे नाजिम के खिलाफ एक और कड़ी चुनौती का सामना करना होगा। जरीन के अलावा 2013 के एशियाई चैम्पियन शिव थापा, सोनिया लाठेर और परवीन ने भी अपने वर्गों में जीत दर्ज करके क्वार्टर फाइनल में जगह बनाई। शिव थापा ने पुरुषों के 63 किग्रा वर्ग में कजाकिस्तान के समागुलोव बाघतीयोव को 3-2 से हराया। हालांकि, दुर्योधन नेगी (69 किग्रा), ब्रजेश यादव (81 किग्रा) और कृष्ण शर्मा (91 किग्रा से अधिक) को शुरुआती दौर के मुकाबलों में हार का सामना करना पड़ा।

विश्व चैम्पियनशिप में रजत पदक जीतने वालीं सोनिया लाठेर (57 किग्रा) और परवीन (60 किग्रा) ने महिला वर्ग में अपने-अपने भार वर्ग के दूसरे दौर के मैचों में क्रमशः सुरमेनेली तुगसेनाज और ओजोल एसरा को 5-0 से शिकस्त दी। सुरमेनेली और ओजोल दोनों ही स्थानीय मुक्केबाज हैं और खिताब की प्रबल दावेदार थीं। टूर्नामेंट के छठे दिन छह भारतीय मुक्केबाज अपने-अपने वर्ग का क्वार्टर फाइनल खेलेंगे।

बता दें कि 24 साल की निकहत जरीन ने एक खेल चैनल को दिए इंटरव्यू में बताया था कि वह अपनी पहली प्रतियोगिता के बाद खून से सनी और काली आंख के साथ घर लौटी थीं। इस घटना ने उनकी मां को काफी विचलित कर दिया था। उन्हें देख मां रोने लगी थीं। निकहत ने बताया था कि तभी उन्होंने तय किया था कि वह अगली बार अपने प्रतिद्वंद्वी को धूल चटाएंगी। उसके बाद निकहत ने कभी अपनी मां को रोने का मौका नहीं दिया।

तभी सोच लिया था कि बदला लेना है: निकहत जरीन

निकहत के मुताबिक, हो सकता है कि कुछ लोगों ने इस खेल को बहुत क्रूर समझा होगा और माना होगा कि उनका स्वास्थ्य मुक्केबाजी से अधिक महत्त्वपूर्ण है, लेकिन मैंने जो सोचा, मैं हमेशा इसी तरह सोचती थी कि उसने कैसे मुझे इतनी बुरी तरह से पीटा? मैं अगली बार इसका बदला लूंगी। निकहत ने अपने करियर की शुरुआत एक धावक के रूप में की थी।

पिता हैं पहले कोच

निकहत के पिता मोहम्मद जमील अहमद ने ही उनके शुरुआती कोच थे, लेकिन उन्होंने मुक्केबाजी में नाम रौशन करने की ठान रखी थी। उनकी मां और रिश्तेदार निकहत के फैसले से खुश नहीं थे, लेकिन पिता ने साथ दिया। निकहत को पहली अंतरराष्ट्रीय जीत 2011 में मिली थी। तब उन्होंने तुर्की में एआइबीए महिला जूनियर और युवा विश्व मुक्केबाजी चैम्पियनशिप में स्वर्ण पदक जीता था।

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