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क्रिकेट में फिर जागा ‘फिक्सिंग’ का भूत

क्रिकेट प्रशंसकों की यादों में 2000 का साल भयावह रात की तरह दर्ज है। एक स्टिंग ने खेल जगत को हिला कर रख दिया था।

मैच फिक्सिंग से क्रिकेट पर संकट।

क्रिकेट प्रशंसकों की यादों में 2000 का साल भयावह रात की तरह दर्ज है। एक स्टिंग ने खेल जगत को हिला कर रख दिया था। पुलिस भारत के कुछ बेहतरीन खिलाड़ियों पर फिक्सिंग का आरोप लगा रही थी और क्रिकेट में आस्था रखने वाले प्रशंसकों का विश्वास ताश के पत्तों की तरह बिखर रहा था। वो दौर बीता और 2013 में इंडियन प्रीमियर लीग के दौरान स्पॉट फिक्सिंग की घटना ने क्रिकेट को ‘जेंटलमैन’ का खेल कहे जाने पर सवाल खड़ा कर दिया।

जिम्बाब्वे के पूर्व कप्तान और अपने जमाने के शानदार गेंदबाज हीथ स्ट्रीक पर भ्रष्टाचार के मामले में विश्व क्रिकेट संस्था द्वारा आठ साल का प्रतिबंध लगाने की खबर ने एक बार फिर इस खेल पर फिक्सिंग के काले बादल मडराने के संकेत दे दिए हैं। इस खबर ने क्रिकेट के दीवानों की आस्था को गहरी चोट पहुंचाई है। साथ ही खेल प्रशासकों के फिक्सिंग पर रोक लगाने के लिए उठाए कदमों को नाकाफी साबित कर दिया है।

दरअसल, किसी भी खेल में सट्टेबाजी को रोक पाना आसान नहीं है। खास कर जब टूर्नामेंट की व्यस्तता हो। हालांकि नई तकनीक और कारगर उपायों से क्रिकेट में फिक्सिंग पर रोक का दावा करने वाले प्रशासकों के लिए स्ट्रीक का मामला किसी चुनौती से कम नहीं। फटाफट क्रिकेट की शुरुआत से काफी पहले भी मैच पर सटोरियों की निगाहें होती थीं लेकिन आइपीएल और इसके जैसे तमाम प्रीमियर लीग के मारफत इन्होंने पैर पसारना शुरू कर दिया।

इन पर रोक लगाने की वकालत करने वाले दिग्गज भी यह मानते हैं कि फिक्सिंग को पूरी तरह रोक पाना काफी मुश्किल है। यही कारण है कि एक तरफ खेल संहिता ला कर इस तरह के कृत के खिलाफ मजबूत कानून बनाने की बात होती है तो दूसरी तरफ सट्टेबाजी को कानूनी जामा पहना कर इसे खेल का हिस्सा बनाने की भी वकालत की जाती है। लेकिन, इन सब के बीच उन प्रशंसकों की सुध कोई नहीं लेता जो क्रिकेट को धर्म और खिलाड़ियों को भगवान मानते हैं।

हीथ स्ट्रीक का मामला

हीथ अपने जमाने के धुरंधर खिलाड़ियों में से एक हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने 2017 से 2018 के बीच कई मैचों की अंदरूनी जानकारी सट्टेबाजों तक पहुंचाई। इस दौरान वे आइपीएल फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइटराइडर्स के गेंदबाजी कोच भी थे। अपने देश के लिए भी कोचिंग की। साथ ही बांग्लादेश प्रीमियर लीग और अफगानिस्तान प्रीमियर लीग में भी बतौर कोच काम किया। विश्व क्रिकेट संस्था के मुताबिक उन्होंने 2018 की जिम्बाब्वे, श्रीलंका और बांग्लादेश बीच खेले गए त्रिकोणिय शृंखला की जानकारी भी साझा की। उन्होंने चार खिलाड़ियों को सटोरिए से मिलवाया। इसमें एक किसी देश का कप्तान भी है।

स्ट्रीक की आइसीसी के सामने दी गई जानकारी ने क्रिकेट जगत को झकझोर दिया है। इस सब के लिए उन्हें पैसे और कुछ उपहार दिए गए। विश्व संस्था की मिली जानकारी के मुताबिक स्ट्रीक जल्द ही जिम्बाब्वे में एक प्रीमियर लीग शुरू करने की तैयारी में थे और इसके लिए सट्टेबाज उनकी मदद कर रहे थे। इसके अलावा भी उन्होंने आइसीसी को कई ऐसी जानकारी दी जो क्रिकेट पर विश्वास रखने वालों के लिए बड़ा झटका है।

स्ट्रीक का यह कदम काफी चौकाने वाला है। अकसर यह देखा गया है कि बुकी के संपर्क में वही खिलाड़ी या कोच आते हैं जिन्हें पैसे की सख्त आवश्यकता होती है। कभी-कभी अपने करिअर से निराश खिलाड़ी और कोच भी उनके जाल में फंस जाते हैं। लेकिन स्ट्रीक के मामले में ऐसा कुछ नहीं है।

जिम्बाब्वे के लिए खेलते हुए उनका करिअर शानदार रहा। उन्होंने 65 टैस्ट में 216 विकेट लिए और करीब दो हजार रन बनाए। वहीं 189 एकदिवसीय मुकाबलों में 2943 रन बनाने के अलावा 239 विकेट भी हासिल किए। क्रिकेट से संन्यास के बाद उन्होंने कोचिंग में हाथ आजमाया और यहां भी उन्हें कामयाबी मिली। उनके मार्गदर्शन में कई टीमों ने सफलता हासिल की। प्रीमियर लीग में कोचिंग के लिए उन्हें अच्छा भुगतान भी किया जाता रहा है। ऐेसे में स्ट्रीक के सट्टेबाजों के जाल में फंसने की घटना पर से परदा उठना बाकी है।

आइपीएल फ्रेंचाइजी पर भी खतरा

स्ट्रीक 2016 और 2017 में आइपीएल फ्रेंचाइजी गुजरात लायंस के गेंदबाजी कोच थे। 2018 में वे कोलकाता से जुड़े। विश्व क्रिकेट संस्था के मुताबिक इसी दौरान उन्होंने टीम की अंदरूनी जानकारी सट्टेबाजों की दी। ऐसे में फ्रेंचाइजी भी जांच के घेरे में आ सकती है। इससे पहले स्पॉट फिक्सिंग मामले में दो फ्रेंचाइजियों पर कार्रवाई हो चुकी है। हालांकि टीम मैनेजमेंट से जुड़े लोगों और खिलाड़ियों के लिए कोड आॅफ कंडक्ट अलग-अलग हैं।

यही कारण है कि 2013 में श्रीसंत, अजीत चंदीला और अंकित चव्हान के स्पॉट फिक्सिंग मामले में गिरफ्तार होने के बाद भी राजस्थान रॉयल्स पर कार्रवाई नहीं हुई थी। लेकिन जब टीम मैनेजमेंट का हिस्सा रहे लोंगों की भी इसमें संलिप्तता पाई गई तब जाकर चेन्नई सुपरकिंग्स और राजस्थान रॉयल्स को बैन किया गया।

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