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स्टार शूटर जीतू राय को उग्रवादी इलाके में मिली पहली पोस्टिंग, 1 साल के बेटे से दूर निभा रहे ड्यूटी; चीन पर भी रखते हैं पैनी नजर

फौज की नौकरी को लेकर जीतू राय का कहना है, ''मुझे उनकी बहुत याद आती है, लेकिन मैं जो कर रहा हूं इसे मैंने खुद चुना है। मैं लगातार उनसे बात करता हूं और जब मुझे छुट्टी लेने की अनुमति होगी तो मैं उनसे जाकर मिलूंगा।''

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए कई खिताब जीत चुके निशानेबाज जीतू राय

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश के लिए कई खिताब जीत चुके निशानेबाज जीतू राय ने कहा कि वह भारतीय सेना के सूबेदार मेजर के तौर पर देश सेवा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। राय इन दिनों पूर्वोत्तर भारत के संवेदनशील क्षेत्रों में से एक मणिपुर में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। 33 साल के इस निशानेबाज ने यहां पहुंचने से पहले इस क्षेत्र की पूरी जानकरी ले ली थी। राय को अपनी रेजिमेंट 11 गोरखा राइफल्स से इस क्षेत्र में जुड़े हुए एक महीना हो गया। सोशल मीडिया पर जीतू की तस्वीर शेयर उन्हें ढेरों बधाइयां दे रहे हैं। जानकारी के लिए बता दें कि पूर्वोत्तर राज्य का यह क्षेत्र उग्रवाद प्रभावित रह चुका है। संकट के दिनों में जीतू अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से कर रहे हैं।

हाल ही में राय ने एक इंटरव्यू दिया जिसमें उन्होंने मणिपुर के आस-पास के इलाकों की समस्याओं को लेकर तमाम बातें साझा कीं। उन्होंने कहा, पूर्वोत्तर में उग्रवाद के चलते यहां हमें हर समय पहरा देना होगा। मुझे इस पर बहुत गर्व है। मैं अपनी नौकरी से प्यार कर रहा हूं, कितने लोगों को ऐसे अवसर मिलते हैं।”

बकौल जीतू फौजी के तौर पर जीतू भारत-चीन सीमा पर हो रही गतिविधियों पर भी नजर रखे हैं। उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के कहा कि अगर आदेश मिला तो वह वहां जाने के लिए तैयार रहेंगे। खेल रत्न पुरस्कार से 2016 में सम्मानित होने वाले इस निशानेबाज ने कहा, ”सूबेदार मेजर यही कम करते हैं। वे उन टीमों का नेतृत्व करते हैं जहां वे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मैं भारतीय सेना और अपने देश की सेवा करने के लिए हमेशा तैयार रहता हूं।”

जब जीतू से पूछा गया कि क्या आपको उग्रवाद क्षेत्रों में ड्यूटी करने से डर नहीं लगता। तब उन्होंने कहा, उन्हें किसी से कोई भय नहीं है। वह परिवार से दूर अकेले रह रहे हैं। पद्मश्री से सम्मानित जीतू की पत्नी और डेढ़ साल का बेटा इंदौर में रहते हैं। तैनाती से पहले जीतू भी अपने परिवार के साथ रहते थे लेकिन फिलहाल वे अपना पूरा योगदान देश को दे रहे हैं।

फौज की नौकरी को लेकर जीतू का कहना है, ”मुझे उनकी बहुत याद आती है, लेकिन मैं जो कर रहा हूं इसे मैंने खुद चुना है। मैं लगातार उनसे बात करता हूं और जब मुझे छुट्टी लेने की अनुमति होगी तो मैं उनसे जाकर मिलूंगा।” विश्व चैम्पियनशिन, एशियाई और राष्ट्रमंडल खेलों अलावा कई खिताब जीतने वाले इस ओलंपियन ने कहा कि वह अपने नये काम में ढल गये है। उन्होंने कहा, ”मुझे यह बहुत पसंद है। मैं पहले भी पूर्वोत्तर का दौरा कर चुका हूं इसलिए मैं यहां ठीक हूं।” नये काम के जुनून के कारण अब निशानेबाजी उनके लिए दूसरी प्रथमिकता बन गयी है।

मेजर जीतू राय

उन्होंने कहा, ”इस समय मेरे लिए सेना पहली प्राथमिकता है और निशानेबाजी दूसरी है। मैं हालांकि अपना अभ्यास जारी रखता हूं और जहां भी जाता हूं पिस्तौल ले जाता हूं।” कई विश्व कप में स्वर्ण पदक जीतने वाले इस निशानेबाज ने हाल के दिनों के खराब प्रदर्शन पर पूछे जाने पर कहा, ”मैंने इतना भी बुरी नहीं किया है और मैं अभी भी एयर पिस्टल की राष्ट्रीय रैंकिंग में हूं।

मैं अपनी तरफ से पूरी कोशिश कर रहा हूं और मुझे भरोसा है कि मैं फिर से अच्छा कर पाऊंगा।” रियो ओलंपिक के फाइनल में पहुंचने वाले राय ने कहा, ”मैं राष्ट्रीय टीम में वापसी के लिए कड़ी मेहनत करूंगा और ओलंपिक का भी लक्ष्य रखूंगा।” नेपाल में जन्मे राय भारत से बस गए और 2006 में सेना में भर्ती हुए।

भाषा के इनपुट के साथ।

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