मेडल जीतने के बावजूद सीधे DSP नहीं बन पाएंगे हरियाणा के खिलाड़ी? सूबे में नई खेल नीति लागू करने की तैयारी में खट्टर सरकार

हरियाणा के खेल राज्य मंत्री संदीप सिंह का कहना है कि नई खेल नीति लागू होने के बाद हर खिलाड़ी मेडल जीतने पर डीएसपी के पद के लिए दावेदारी नहीं जता पाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर का पदक जीतने के साथ-साथ डीएसपी पद के लिए शैक्षणिक योग्यता होना भी जरूरी है।

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: December 10, 2020 4:28 PM
Sandeep Singh Haryanaहरियाणा के खेल राज्य मंत्री संदीप सिंह। (फाइल फोटो)

हरियाणा की मनोहर लाल खट्टर सरकार प्रदेश में नई खेल नीति लागू करने की तैयारी कर रही है। इसके लागू होने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने के बावजूद वही खिलाड़ी पुलिस विभाग में सीधे DSP (पुलिस उपाधीक्षक) बन पाएंगे, जो मेडल के साथ-साथ शैक्षणिक योग्यता के मानकों पर भी खरा उतरते हों। अमर उजाला की एक रिपोर्ट में हरियाणा के खेल राज्य मंत्री संदीप सिंह ने यह जानकारी दी है।

रिपोर्ट के मुताबिक, संदीप सिंह का कहना है कि नई खेल नीति लागू होने के बाद हर खिलाड़ी मेडल जीतने पर डीएसपी के पद के लिए दावेदारी नहीं जता पाएगा। अंतरराष्ट्रीय स्तर का पदक जीतने के साथ-साथ डीएसपी पद के लिए शैक्षणिक योग्यता होना भी जरूरी है। हालांकि, संदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि खेल कोटे से सीधे डीएसपी की भर्ती पर प्रतिबंध नहीं लगा जा रहा है, लेकिन अब पहले से कड़े मानदंड होंगे। सरकार खेल नीति में अहम संशोधन करने जा रही है। संशोधन को लेकर अभी प्राथमिक चरण में हैं। मुख्यमंत्री मनोहर लाल के साथ खेल नीति में संशोधन को लेकर चर्चा हुई है। उन्होंने इसे हरी झंडी दी है। नीति में कौन-कौन से संशोधन किए जाएंगे, इसे लेकर अभी बैठकों का दौर शुरू होगा। बैठकों में सर्वसम्मति के साथ लिए जाने वाले निर्णय के अनुसार खेल नीति में बदलाव किया जाएगा।

संदीप सिंह ने दावा किया कि सरकार खेल नीति को खिलाड़ियों के लिए और हितैषी बनाएगी। उन्होंने कहा कि खेल कोटे से सीधे डीएसपी का पद खिलाड़ियों को मिलता रहेगा। यह रैंक तो खिलाड़ियों के साथ चलता रहेगा, लेकिन उनका मुख्य काम खेलने और खेलों को बढ़ावा देना होगा। खेल कोटे से सरकारी नौकरी में आए खिलाड़ियों को खेल से जोड़कर रखना और खिलाना सरकार की मुख्य प्राथमिकता है।

संदीप सिंह ने बताया कि जिन विभागों में खेल कोटे से भर्ती हो रही है, उनमें भर्तियां होती रहेंगी। जिन विभागों में नहीं हो रही, उनमें भी खेल कोटे से नौकरी दिलाने के प्रयास जारी हैं। मेडल और योग्यता के आधार पर खिलाड़ियों को डीएसपी के समकक्ष पदों पर भी नौकरी दिलाई जाएगी। संदीप सिंह ने कहा, मेरी कोशिश है कि खेल विभाग में खिलाड़ियों को अधिक से अधिक नौकरी मिले ताकि खेलों को बढ़ावा देने के साथ ही नए खिलाड़ी तैयार करने में उनकी मदद ली जा सके।

संदीप सिंह ने बताया कि नौकरी पेशा खिलाड़ियों में खेल के प्रति अब भी उतना ही जुनून है, जितना नौकरी पाने से पहले था। उनके पास अनेक खिलाड़ियों के फोन आते हैं। खिलाड़ी मिलने भी आते हैं। खिलाड़ी कहते हैं कि वे खेल से जुड़े रहना चाहते हैं, चाहे उन्हें पूरा दिन खेल के मैदान में ही रखो। संदीप सिंह ने कहा कि ऐसे नौकरी पेशा खिलाड़ियों को खेल में आगे बढ़ाया जाएगा। उनके अनुभव का फायदा लेकर खिलाड़ियों की नई पौध विकसित की जाएगी, न कि उन्हें कागजी कामों में उलझा कर उनकी प्रतिभा को खत्म किया जाएगा।

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