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कोच के बिना तकनीक पर ध्यान दे पाना मुश्किल : नीरज

नीरज अपने फार्म हाउस में ओलंपिक का टिकट कटा चुके भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्ण के साथ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं और विकास नियमित अभ्यास कर रहे हैं।

नीरज अपने फार्म हाउस में ओलंपिक का टिकट कटा चुके भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्ण के साथ रह रहे हैं।

कोरोना महामारी के कारण लागू पूर्णबंदी के बीच पेशेवर मुक्केबाज नीरज गोयत जल्द सबकुछ बेहतर होने की उम्मीद लिए अभ्यास जारी रखे हुए हैं। वे तकनीक से ज्यादा खुद को मानसिक और शारीरिक तौर पर मजबूत करने में जुटे हैं। हालांकि उन्हें एक अदद कोच की जरूरत महसूस हो रही है। उनका मानना है कि कोच के मार्गदर्शन के बगैर खुद को तकनीकी रूप से मजबूत कर पाना काफी मुश्किल है।

नीरज अपने फार्म हाउस में ओलंपिक का टिकट कटा चुके भारतीय मुक्केबाज विकास कृष्ण के साथ रह रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं और विकास नियमित अभ्यास कर रहे हैं। फिलहाल मैं सिर्फ खुद को मानसिक और शारीरिक रूप से फिट रखने की कोशिश कर रहा हूं। पूर्ण अभ्यास कर पाना अभी मुमकिन नहीं है। कोच के मार्गदर्शन के बिना तकनीकी पहलुओं पर काम कर पाना कठिन है।

पूर्णबंदी के दौरान वेबिनार या वीडियो कॉन्फ्रेंस के सहारे खिलाड़ियों को कोचिंग देना कितना कारगर रहा, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि यह सिर्फ खाली समय का बेहतर इस्तेमाल है। मुझे नहीं लगता कि इसके सहारे खिलाड़ियों को वो कोचिंग मिल पाएगी जो उन्हें कैंप में मिलती होगी। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि इसका कोई फायदा नहीं है। कम से कम खिलाड़ी कोच से अपनी बात तो साझा कर पाते हैं।

कैंप और घर के अभ्यास में क्या फर्क है, इस बारे में नीरज ने कहा कि कैंप में अभ्यास करना घर से काफी अलग होता है। वहां 20-30 लोग एक साथ होते हैं। जब कोई दूसरा पसीना बहा रहा होता है तो हमे प्रेरणा मिलती है। थके होने के बाद भी हम अभ्यास जारी रख पाते हैं। घर और कैंप के माहौल में भी काफी अंतर होता है। उन्होंने कहा कि वैसे भी एक पेशेवर मुक्केबाज के तौर पर मैं किसी भी बाउट से कुछ दिन पहले तैयारी शुरू करता हूं। इसलिए मेरी तैयारी पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ा है। हालांकि उन्होंने कोरोना महामारी के कारण पैदा हुए इस हालात और खेल आयोजन के रद्द होने या टाले जाने को लेकर चिंता व्यक्त की।

भारत के लिए नया

भारत में पेशेवर मुक्केबाजी के भविष्य को लेकर बात करते हुए नीरज ने कहा कि यहां के लिए यह नया है। अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देशों में पेशेवर मुक्केबाजों को ही तवज्जो दी जाती है। उम्मीद है धीरे-धीरे भारत में भी पेशेवर मुक्केबाजी का चलन बढ़ेगा। एमेच्योर से पेशेवर मुक्केबाजी का रुख करने वाले भारतीय मुक्केबाजों को सलाह देते हुए नीरज ने कहा कि वे पहले अपना भविष्य सुरक्षित कर लें तभी इसके बारे में सोचें।

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