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नीरज चोपड़ा को चैलेंज करने वाला जर्मन थ्रोअर 3 थ्रो के बाद हुआ बाहर, सुनील गावस्कर ने कमेंट्री छोड़कर मनाया जश्न; देखें Video

नीरज चोपड़ा ने आज टोक्यो ओलंपिक में देश को वो लम्हा दिया है जिसका भारतवासियों को 13 सालों से इंतजार था। नीरज चोपड़ा को गोल्ड मेडल जीतता देख भारत और इंग्लैंड सीरीज में कमेंट्री कर रहे सुनील गावस्कर भी अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाए। उन्होंने कमेंट्री छोड़कर नीरज चोपड़ा का इवेंट देखा और उनकी जीत का जश्न मनाया।

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नीरज चोपड़ा को चैलेंज कर 3 थ्रो के बाद जर्मन थ्रोअर बाहर, सुनील गावस्कर ने मनाया जश्न (Source: Twitter)
नीरज चोपड़ा ने आज देश को वो लम्हा दिया है जिसका भारतवासियों को 13 सालों से इंतजार था। उन्हें जैवलिन थ्रो में गोल्ड मेडल जीतता देख हर देशवासी खुशी से झूम उठा। वहीं भारत और इंग्लैंड सीरीज में कमेंट्री कर रहे सुनील गावस्कर भी अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाए। उन्होंने कमेंट्री छोड़कर नीरज चोपड़ा का इवेंट देखा और उनकी जीत का जश्न मनाया।

वहीं एक बात और सामने आई वो थी जर्मनी के जैवलिन थ्रोअर जोहानेस वेटर को लेकर। दरअसल ओलंपिक से पहले वेटरन ने भारत के नीरज चोपड़ा को चैलेंज किया था।

वेटर ने कहा था कि, ‘नीरज अच्छे थ्रोअर हैं। फिनलैंड में उनका भाला 86 मीटर की दूरी तय कर सका, लेकिन ओलिंपिक में वे मुझे पीछे नहीं छोड़ पाएंगे।’


पर आज नीरज ने जो किय वो जगजाहिर है। नीरज ने ना ही सिर्फ वेटर को पीछे छोड़ा बल्कि गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया। इस मुकाबले में जर्मन खिलाड़ी 3 राउंड के बाद ही आखिरी-3 में होने के कारण आखिरी राउंड के लिए क्वालीफाई नहीं कर पाए।


नीरज की इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे देश में जश्न का माहौल था। ये जश्न सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि इंग्लैंड के नॉटिंघम में भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे पहले टेस्ट मैच में भी देखने को मिला। टोक्यो में भारत को जीत मिलने के बाद ट्रेंट ब्रिज में बैठे भारतीय दिग्गज क्रिकेटर सुनील गावस्कर भी अपनी भावनाओं को नहीं रोक पाए।

ट्रेंट ब्रिज में सुनील गावस्कर समेत तमाम पूर्व क्रिकेटर नीरज का मैच देखते हुए दिखाई दिए। उन्होंने उनकी जीत के बाद खड़े होकर ताली बजाकर जश्न भी मनाया।

गौरतलब है कि फाइनल में नीरज चोपड़ा ने पहले राउंट में 87.3 मीटर तक थ्रो फेंक कर नंबर एक स्थान कब्जा लिया था। वहीं दूसरे थ्रो में उन्होंने इससे भी ज्यादा 87.58 मीटर तक थ्रो फेंक कर अपने स्वर्ण पदक को पक्का कर लिया था। कोई अन्य खिलाड़ी उनके पास तक नहीं पहुंच पाया था।

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