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नरेंद्र मोदीजी ने सौरव गांगुली को फोन किया, पर किसानों की मौत पर कुछ नहीं बोले? भाजपा प्रवक्ता बोलीं, किसान जिदबाजी छोड़ 2 कदम आगे बढ़ें

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारे 57 किसानों की शहादत हो चुकी है। इस ठंड में कभी उन पर पानी की बौछारें की जाती हैं। कभी रात के अंधेरे में उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाते हैंक्यों? वे 6 साल से मोदीजी की मन की बात सुनते आए हैं। लेकिन उनकी मन की बात मोदीजी सुनने से मना कर रहे हैं।’

Author Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: January 7, 2021 8:07 AM
farmers Punjab Haryana Western Uttar Pradesh Delhi Border Farmer lawsदिल्ली के विभिन्न बॉर्डर्स पर करीब 52 दिन से ज्यादा समय से हजारों किसान प्रदर्शन कर रहे हैं। (सोर्स- अमित मेहरा/इंडियन एक्सप्रेस)

किसान आंदोलन को डेढ़ महीने से भी ज्यादा का वक्त हो गया है, लेकिन अब तक इसका हल नहीं निकला है। तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलनरत किसानों और सरकार की बातचीत अब तक बेनतीजा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी बुधवार को इस मामले में चिंता जताई। इस मामले को लेकर न्यूज चैनल्स पर चर्चाओं का दौर जारी है। पक्ष और विपक्ष एक दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। न्यूज24 चैनल की एक डिबेट में भाजपा प्रवक्ता संजू वर्मा ने कहा कि किसानों को जिदबाजी छोड़कर 2 कदम बढ़ाने होंगे।

कांग्रेस की प्रवक्ता राधिका खेड़े ने इस मुद्दे पर चर्चा के दौरान सवाल उठाया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीजी सौरव गांगुली का हालचाल जानने के लिए उन्हें फोन कर सकते हैं, लेकिन 57 किसानों की मौत पर उन्होंने कुछ नहीं किया। एक ट्वीट भी नहीं किया। एंकर मानव गुप्ता ने राधिका खेड़े से पूछा, ‘हालात और खराब होने वाले हैं, क्योंकि किसान कह रहे हैं कि अब हमारा धैर्य जवाब दे रहा है। अब हम ट्रैक्टर मार्च निकालेंगे। उसके बाद 26 जनवरी की परेड में घुसकर हम अपने ट्रैक्टरों के साथ शामिल होंगे। आप देख पा रही हैं, क्या हालात होने वाले हैं, दिल्ली के बार्डर्स पर, दिल्ली के अंदर। और ये क्यों हो रहा है? कौन जिम्मेदार है इसके लिए?’

राधिका खेड़े ने कहा, ‘एक महीने से ऊपर हो चुका है। हमारे 57 किसानों की शहादत हो चुकी है। इस ठंड में कभी उन पर पानी की बौछारें की जाती हैं। कभी उनके रास्ते में गड्ढे खोदे जाते हैं। कभी रात के अंधेरे में उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े जाते हैं। इस कारण उन्हें कभी-कभी खुले आसमान के नीचे सोना पड़ता है, क्यों? क्योंकि वे शांतिपूर्ण तरीके से सरकार से अपनी बात मनवाना चाहते हैं। छह साल से वे मोदीजी की मन की बात सुनते आए हैं। लेकिन उनकी मन की बात मोदीजी सुनने से मना कर रहे हैं।’

राधिका खेड़े ने कहा, ‘क्यों, क्या वे किसान इस देश के नागरिक नहीं हैं, जो 57 मौते हुईं हैं। हमने देखा किस तरीके से मोदीजी ने एक-दो दिन पहले सौरव गांगुलीजी से उनकी हेल्थ के बारे में फोन करके पूछा, लेकिन इन डेढ़ महीनों में क्या एक बार भी मोदीजी ने शोक जताया, कि मेरे इतने किसान भाइयों की मौत हो गई। मैं दिल से दुखी हूं। बड़े-बड़े भाषण देते हैं। मन की बात करते हैं, लेकिन एक ट्वीट कुछ नहीं आया।’

 

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एंकर ने इस संबंध में संजू वर्मा से पूछा कि क्या करेंगे, कैसे हैंडल करेंगे हालात को, तो उन्होंने कहा, ‘दिक्कत तो दिल्ली वासियों को नहीं, सभी को होगी। हमको देखकर भी बहुत दुख होता है, जब किसान भाई ठंड में ठिठुरकर वहां बैठे हैं, पर मैंने पिछली बार भी कहा था और फिर दोहराऊंगी कि जब कोई मसला हो उसका हल तभी निकलता है जब दोनों पक्ष समझौते की तरफ बढ़ें।’

 

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संजू वर्मा ने आगे कहा, ‘मैं यह साफ-साफ कहना चाहूंगी और आपको भी यह जानकारी है कि सरकार ने अपनी तरफ से कोई कमी नहीं छोड़ी। सरकार दो नहीं छह कदम आगे बढ़ने को तैयार है, पर किसान भाइयों को भी 2 कदम आगे बढ़ना पड़ेगा। आप यदि जिदबाजी पर उतर आएंगे और जो कांग्रेस के नेता, आम आदमी पार्टी के नेता किसानों के कंधों पर बंदूक रखकर सियासी रोटियां सेंक रहे हैं।’

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