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कोविड-19: ‘मेरा पैसा और समय सब बर्बाद हो गया’, एशियाड पदक विजेता दुती चंद ने कहा- उम्मीदों पर फिर गया पानी

दुती ने कहा, ‘मैं अक्टूबर से टीम बनाकर अभ्यास कर रही थी। उसमें कोच, सहायक कोच, ट्रेनर, रनिंग पार्टनर समेत 10 सदस्य थे। हर महीने उन पर साढ़े चार लाख रुपए खर्च हो रहे थे। इसमें मेरी खुराक भी शामिल थी। अब तक 30 लाख रुपए खर्च कर चुकी हूं।’

Author नई दिल्ली | Updated: April 30, 2020 6:11 PM
एशियाई खेलों की दोहरी रजत पदक विजेता भारत की शीर्ष फर्राटा धाविका दुती चंद

‘कोरोना महामारी के कारण ओलंपिक की तैयारियों पर खर्च हुआ मेरा पूरा पैसा, समय सब बर्बाद हो गया। अब मुझे नए सिरे से शुरुआत के लिए मदद मिलेगी या नहीं, यह भी तय नहीं है।’ यह कहना है एशियाई खेलों की दोहरी रजत पदक विजेता भारत की शीर्ष फर्राटा धाविका दुती चंद का। कोरोना वायरस महामारी और उसके बाद दुनिया भर में लागू लॉकडाउन के कारण खेल ठप होने से न सिर्फ ओडिशा की इस एथलीट की तैयारियों को झटका लगा है, बल्कि कोचों और विदेश में प्रशिक्षण की व्यवस्था पर अपनी जेब से तीस लाख रुपए भी खर्च करना पड़े।

दुती ने भुवनेश्वर से फोन पर दिए इंटरव्यू में कहा, ‘मैं अक्टूबर से एक टीम बनाकर अभ्यास कर रही थी। उसमें कोच, सहायक कोच, ट्रेनर, रनिंग पार्टनर समेत 10 सदस्य थे। हर महीने उन पर साढ़े चार लाख रुपए खर्च हो रहे थे। इसमें मेरी खुराक भी शामिल थी। अब तक 30 लाख रुपए खर्च कर चुकी हूं।’

जकार्ता एशियाई खेल 2018 में 100 मीटर की रजत पदक विजेता दुती खेल मंत्रालय की टारगेट ओलंपिक पोडियम योजना (टॉप्स) का हिस्सा नहीं है। उनका प्रायोजन ओडिशा सरकार और केआईआईटी कर रहे थे, लेकिन वे टोक्यो ओलंपिक 2020 तक ही था। ओलंपिक स्थगित होने के बाद मौजूदा हालात को देखते हुए उसके आगे जारी रहने पर भी दुती को संदेह है।

ओडिशा माइनिंग कारपोरेशन में कार्यरत इस एथलीट ने कहा, ‘कोरोना महामारी के कारण देश और प्रदेश ही नहीं, बल्कि दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा रही है। अब मूलभूत सुविधाओं पर पूरा फोकस है। ऐसे में आगे प्रायोजन मिलेगा या नहीं, कुछ कह नहीं सकते।’ उन्होंने कहा, ‘मैंने जर्मनी में तीन महीने तक अभ्यास करने के लिए हवाई टिकट बुक करा ली थी। उसका पैसा भी वापस नहीं मिला। इसके अलावा वहां 20 लाख रुपए एडवांस दिए थे, वे भी अब तक नहीं मिले।’

दुती ने यह भी कहा कि अभ्यास रुकने से उनकी लय भी टूट गई है। अब उन्हें रफ्तार पकड़ने में छह महीने लगेंगे। उन्होंने कहा, ‘हमारा अभ्यास शेड्यूल ऐसा था कि अक्टूबर से धीरे धीरे रफ्तार पकड़ते हैं और मार्च से कड़ा अभ्यास शुरू होता है, जबकि अप्रैल में पूरी रफ्तार पकड़ लेते हैं। मैंने मार्च से जून तक जर्मनी में अभ्यास के बाद सीधे टोक्यो जाने की सोची थी, लेकिन सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया।’

उन्होंने कहा कि अगले साल ओलंपिक होंगे या नहीं, इसे लेकर भी संशय है। दुती ने कहा, ‘अभी कोरोना महामारी का प्रभाव कम नहीं हुआ है। ना ही इसकी कोई वैक्सीन बनी है। मुझे नहीं लगता कि वैक्सीन आने तक कोई खेल होगा। विदेश जाने का तो सवाल ही नहीं होता। भारत में एथलेटिक्स के अभ्यास के लिए उतनी सुविधायें नहीं हैं। ना ही कोई बड़ा टूर्नामेंट होना है।’

उन्होंने कहा कि ओलंपिक क्वालीफिकेशन के लिए विदेश में तैयारी बहुत जरूरी है। दुती ने कहा, ‘जितने भी भारतीय एथलीटों ने ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया है, विदेश में तैयारी के दम पर ही किया है। फिर चाहे वह नीरज चोपड़ा (भालाफेंक) हों या 400 रिले टीम हो।’

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