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गुजरात में क्रिकेटरों के फर्जी सर्टिफिकेट मामले में नाम आने पर भड़के मुनाफ पटेल, बोले- BCA ने पहले जांच क्यों नहीं की?

ह बात सामने आई थी कि गुजरात के बाहर के युवाओं को फर्जी दस्तावेजों के जरिए एसोसिएशन में भर्ती कराया जा रहा था। BCA पिछले कुछ सालों में खेल को एक ‘व्यवसाय’ बनाने के आरोपों के साथ घिरा हुआ है। मुनाफ बड़ौदा के ही रहने वाले हैं और वे BCA में गेंदबाजी कोच भी हैं।

मुनाफ पटेल 2011 में वर्ल्ड कप जीतने वाली टीम के सदस्य थे। (सोर्स – सोशल मीडिया)

गुजरता में फर्जी बर्थ सर्टिफिकेट के सहारे दाखिला लेने का मामला सामने आने के बाद बड़ौदा क्रिकेट एसोसिएशन (BCA) में घमासान मचा हुआ है। इस मामले में टीम इंडिया को 2011 में वर्ल्ड कप जीतने में अपना योगदान देने वाले मुनाफ पटेल का भी नाम सामने आया है। भारत के पूर्व तेज गेंदबाज ने मामले पर अपनी पहली प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई आइडिया नहीं है और अगर ऐसा हुआ है तो BCA रजिस्ट्रेशन के समय जांच क्यों नहीं करता है?

दरअसल, यह बात सामने आई थी कि गुजरात के बाहर के युवाओं को फर्जी दस्तावेजों के जरिए एसोसिएशन में भर्ती कराया जा रहा था। BCA पिछले कुछ सालों में खेल को एक ‘व्यवसाय’ बनाने के आरोपों के साथ घिरा हुआ है। ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं, जहां एसोसिएशन से उसके गलत कामों के लिए पूछताछ की गई है जैसे कि निजी क्रिकेट एकेडमियों के ‘पसंदीदा’ खिलाड़ियों का चयन करना। मुनाफ बड़ौदा के ही रहने वाले हैं और वे BCA में गेंदबाजी कोच भी हैं।

मुनाफ पर आरोप लगे थे कि उन्होंने फर्जी सर्टिफिकेट बनवाने में लड़कों की मदद की है। इस पर मुनाफ ने कहा, ‘‘मैं बड़ौदा में कई अन्य खिलाड़ियों की तरह इस क्रिकेटर की मदद कर रहा हूं। उसके पास अच्छी क्षमता है और उसे समर्थन की जरूरत है। लेकिन उसने जो सर्टिफिकेट जमा किए हैं उसका मुझे कोई अंदाजा नहीं है। BCA ने उसे पंजीकृत करने और यहां तक कि उसे ग्रीन कार्ड देने से पहले उसके सर्टिफिकेट की जांच क्यों नहीं की?’’


हाल ही में हुए घोटाले की बात करें तो गैर-गुजरात निवासी शिवम भारद्वाज को फर्जी दस्तावेजों के जरिए बीसीए में दाखिला दिया गया था। शिवम को अंडर -16 टीम में शामिल किया गया था। बाद में पता चला कि भारद्वाज की उम्र 16 वर्ष से अधिक थी। इस मामले की और जांच की गई और उसके दस्तावेजों जैसे स्कूल छोड़ने का प्रमाण पत्र और आधार कार्ड को जांचा गया था। जब स्कूल प्रशासन से इस बारे में पूछा गया तो स्कूल ने जवाब दिया कि ‘शिवम भारद्वाज’ नाम के किसी छात्र ने वहां पढ़ाई नहीं की है। इसके अलावा भारद्वाज का आधार कार्ड भी फर्जी निकला था।

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