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महेंद्र सिंह धोनी के कारण कप्तान बने विराट कोहली, पाकिस्तान के खिलाफ मैच को बताया करियर का टर्निंग पॉइंट; देखें VIDEO

धोनी ने 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच में टेस्ट से कप्तानी छोड़ी थी। इसके बाद कोहली को कमान सौंपी गई थी। फिर 2016 के अंत में माही ने सीमित ओवरों की कप्तानी भी छोड़ दी और फिर विराट ने तीनों फॉर्मेट में टीम का नेतृत्व किया।

विराट कोहली और महेंद्र सिंह धोनी। (सोर्स – सोशल मीडिया)

महेंद्र सिंह धोनी के बाद विराट कोहली को टीम इंडिया का कप्तान बनाया गया। एक तरफ धोनी शांत और धैर्यवान थे तो दूसरी ओर कोहली आक्रामक हैं। पूर्व कप्तान से स्टाइल नहीं मिलने के बावजूद कोहली उनकी कप्तानी के फैन हैं। विराट ने रविचंद्रन अश्विन के साथ इंस्टाग्राम पर लाइव चैट के दौरान अपनी कप्तानी में धोनी के योगदान के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि उन्हें यह जिम्मेदारी आसानी से नहीं मिली। इसके पीछे भी धोनी का ही योगदान था। कोहली ने साथ ही पाकिस्तान के खिलाफ 2012 में खेली गई शतकीय पारी को करियर का टर्निंग पॉइंट बताया।

कोहली ने कहा, ‘‘जिस दिन मैं भारतीय टीम में आया था, मैं सीखना चाहता था। मैं चारों तरफ खेल से घिरा रहता था। मैंने उन्हें (धोनी) कई सारे सलाह दिए, जिसमें से कई उन्होंने रिजेक्ट कर दिए। इसके बावजूद अगर कोई आइडिया उन्हें पसंद आ जाता था तो वे उसे लेकर मुझसे चर्चा करते थे। वे हमेशा मुझे समझने की कोशिश करते थे। मैं हमेशा उनसे सीखता था। मेरी जिज्ञासा के कारण ही शायद उनमें यह विश्वास आया कि टीम का अगला कप्तान मैं हो सकता हूं।’’

भारतीय कप्तान ने आगे कहा, ‘‘मुझे नहीं लगता कि चयनकर्ताओं ने मुझे अचानक ही कप्तान बना दिया। यह जिम्मेदारी देने से पहले उन्होंने धोनी से पूछा होगा। मुझे विश्वास है कि मेरे कप्तान बनने में धोनी की अहम भूमिका रही है।’’ धोनी ने 2014 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के बीच में टेस्ट से कप्तानी छोड़ी थी। इसके बाद कोहली को कमान सौंपी गई थी। फिर 2016 के अंत में माही ने सीमित ओवरों की कप्तानी भी छोड़ दी और फिर विराट ने तीनों फॉर्मेट में टीम का नेतृत्व किया। कोहली को सीमित ओवरों मे चेज मास्टर कहा जाता है। चेज करते हुए वनडे में उन्होंने 26 शतक लगाए हैं, इनमें से 22 में भारतीय टीम जीती है।

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कोहली ने पाकिस्तान के खिलाफ 2012 में अपनी 183 रन की पारी को भी याद किया। विराट ने कहा, ‘‘पाकिस्तान की गेंदबाजी मजबूत थी। उस टीम में शाहिद अफरीदी, सईद अजमल, उमर गुल, एजाज चीमा और मोहम्मद हफीज थे। मुझे याद है कि मैं पाजी (सचिन तेंदुलकर) के साथ बल्लेबाजी करने से खुश था। उन्होंने 50 रन बनाए और हमने 100 रन से ज्यादा की साझेदारी की थी। वह मेरे लिए यादगार पल था।’’ उस पारी में कोहली ने 148 गेंद की पारी में 22 चौके और 2 छक्के लगाए थे। सचिन ने 52 और रोहित शर्मा ने 68 रन बनाए थे। भारत ने 330 रन के लक्ष्य को 47.5 ओवर में 4 विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया था।

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