भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी ने बताया है कि क्यों उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास के बाद कमेंट्री बॉक्स का रुख नहीं किया। धोनी ने कहा कि वह आंकड़ों को ध्यान में नहीं रख पाते और इस कारण से कमेंट्री नहीं कर पाते। संन्यास के बाद अमूमन खिलाड़ी कमेंट्री बॉक्स का रुख करते हुए। वर्तमान समय में तो संन्यास नहीं लिए खिलाड़ी भी कमेंट्री करने लगे हैं। धोनी के साथ खेल चुके भारत के विकेटकीपर बल्लेबाज दिनेश कार्तिक इसके उदाहरण हैं।

धोनी ने जतिन सप्रू से यूट्यूब पर बात करते हुए कहा, ‘कमेंट्री बहुत मुश्किल होती है। मुझे लगता है कि खेल को बताने और उस प्रोसेस में ऐसे जोन में जाने के बीच एक बहुत महीन लाइन होती है, जहां आप मैच खेलने वाले लोगों की आलोचना करने लगते हैं। यह बहुत पतली लाइन है।’

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धोनी ने बताई कमेंट्री की कला

धोनी ने कहा, ‘अक्सर, आपको यह एहसास भी नहीं होता कि आप जो कर रहे हैं, वह शायद थोड़ा गलत है। आप हमेशा दूसरी तरफ रहना चाहेंगे, जहां आप खेल के बारे में बता रहे हों। अगर आपको लगता है कि कुछ गलत है तो आप उसे कह देते हैं, लेकिन उसे कैसे कहना है, यह भी एक कला है, उसे विनम्रता से कैसे पेश करना है ताकि किसी को बुरा न लगे। अगर टीम हार रही है, तो उसके पीछे कुछ कारण होते हैं और आपको उन कारणों को बिना किसी को बुरा लगाए बताने की कला आनी चाहिए। यही कमेंट्री की कला है।’

धोनी को आंकड़े नहीं रहते याद

धोनी को लगता है कि आंकड़ों याद न रख पाने की वजह से उन्हें कमेंट्री करने में दिक्कत होगी। उन्होंने कहा, ‘मैं आंकड़ों के मामले में अच्छा नहीं हूं…लेकिन बहुत से लोग हैं जो आंकड़ों के मामले में बहुत अच्छे हैं। उन्हें आंकड़े पता होते हैं…अगर आप मुझसे मेरे आंकड़े के बारे में पूछेंगे, तो मैं सोच में पड़ जाऊंगा और कुछ लोग ऐसे हैं जिन्हें न सिर्फ भारतीय क्रिकेट टीम या भारतीय खिलाड़ियों के बल्कि पूरे दौर के सभी खिलाड़ियों के आंकड़े पता होते हैं।”

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