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मैच में पानी बांटने के दौरान सचिन तेंदुलकर से पहली बार मिले थे महेंद्र सिंह धोनी, इंटरव्यू में माही ने सुनाई थी कहानी

धोनी को कप्तान बनाने में मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का अहम योगदान रहा है। उन्होंने 2007 टी20 वर्ल्ड कप में कप्तान के लिए धोनी का नाम सुझाया था। माही उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे और टीम इंडिया को दो वर्ल्ड कप दिलाए।

महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान बनाने में सचिन तेंदुलकर का अहम योगदान था। (फाइल)

भारतीय क्रिकेट के पूर्व दिग्गज महेंद्र सिंह धोनी को कप्तान बनाने में मास्टर-ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का अहम योगदान रहा है। उन्होंने 2007 टी20 वर्ल्ड कप में कप्तान के लिए धोनी का नाम सुझाया था। माही उनकी उम्मीदों पर खरे उतरे और टीम इंडिया को दो वर्ल्ड कप दिलाए। इसके अलावा चैंपियंस ट्रॉफी भी जीती और टेस्ट में नंबर एक भी बने। एक बार जब धोनी से पूछा गया कि वे पहली बार सचिन से कब मिले थे तो उन्होंने विस्तार से बताया था। माही पहली बार सचिन से 21 साल पहले 2000-01 में मिले थे।

धोनी ने मशहूर पत्रकार राजदीप सरदेसाई के एक कार्यक्रम के दौरान बताया था, ‘‘मैं पहली बार सचिन से बहुत पहले 2000-01 या 2001-02 सीजन में मिला था। मुझे साल ठीक से याद नहीं है। हम दिलीप ट्रॉफी खेल रहा था। उस समय ईस्ट जोन की टीम में था। दो मैचों में मैंने अच्छे से खिलाड़ियों को पानी पिलाया था। मैच पुणे में था और सचिन खेल रहे थे। हमने उस मैच में बात नहीं की थी। सचिन 190 रन के आसपास खेल रहे थे और मैं सौभाग्यशाली था कि उन्हें देख रहा था। मैं क्रीज पर पानी लेकर गया था। उस समय वे वहीं थे। मैंने अपने साथियों को पानी दिया। तभी सचिन ने मुझसे कहा- क्या मुझे भी पानी मिल सकता है।’’

धोनी ने इसके आगे बताया, ‘‘वह मेरे लिए खास पल था। मैं रांची से आता हूं और कभी नहीं सोचा था कि सचिन से मिलूंगा। वह ऐसा पल था कि मैं उन्हें ड्रिंक दे रहा था।’’ सचिन को कप्तानी करने के अनुभव पर धोनी ने कहा, ‘‘मैं मैदान से बाहर अभी भी सचिन से बात करने में शर्माता हूं। बांग्लादेश दौरे पर हमारी कुछ खास बातचीत नहीं हुई। इसके बाद हम भारत में पाकिस्तान के खिलाफ खेलने वाले थे। पहला मैच कोच्ची और दूसरा मैच विशाखापट्टनम में था। वीरू पा (वीरेंद्र सहवाग) ने पहले मैच में शतक लगाया था और सचिन ने 5 विकेट लिए थे।’’

धोनी ने इसके आगे कहा था, ‘‘जब वो गेंदबाजी करने आते थे तो मुझसे पूछते थे कि लेग स्पिन डालूं या ऑफ स्पिन। तेज डालूं या मिक्स करके डालूं। इससे मेरी झिझक खत्म होने लगी थी। उसके बाद से जब भी वो मुझे पूछते थे तो मुझे जवाब देने के लिए तैयार रहना होता था। अगर वो कहते थे कि ऑफ स्पिन डालता हूं तो मैं कभी कह देता था लेग स्पिन ज्यादा कारगर होगा। उन्होंने काफी आराम से बात की और मेरी झिझक को कम किया। इसके बावजूद मैं आज भी उनसे मैदान के बाहर बात करने में शर्माता हूं।’’

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