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आख‍िर क्‍यों साथी क्र‍िकेटर्स के भी फोन नहीं उठाते धोनी, खुद माही ने खोला राज

कई क्रिकेटरों की यह शिकायत रही है कि महेंद्र सिंह धोनी शायद ही उठाते हैं। कभी-कभी ही वे फोन का जवाब देते हैं। उन सब की बातें अब सही साबित हो रही है जब धोनी ने कहा कि अब वे टेक्नोलॉजी का प्रयोग करना सीख रहे हैं।

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्‍तान महेंद्र सिंह धोनी। (Photo : Express Archive)

भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी महेंद्र सिंह धोनी अपनी शर्तों पर जिंदगी जीते हैं चाहे वह क्रिकेट के मैदान हो या उनका निजी जीवन। वह अपने दिल की बात सुनते हैं। शांत व्यक्तित्व वाले धोनी फोन का उपयोग काफी कम करते हैं और टेक्नोलॉजी से एक निश्चित दूरी बनाकर चलते हैं। हाल ही में मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बताया कि वे क्यों अपने साथी क्रिकेटरों व अन्य क्रिकेटरों का फोन नहीं उठाते हैं? कई क्रिकेटरों की यह शिकायत रही है कि महेंद्र सिंह धोनी शायद ही फोन उठाते हैं। कभी-कभी ही वे फोन का जवाब देते हैं। उन सब की बातें अब सही साबित हो रही है जब धोनी ने कहा कि अब वे टेक्नोलॉजी का प्रयोग करना सीख रहे हैं। धोनी का कहना है कि वे अपनी खुद की वीडियो को देखते हैं और यह सोंचते हैं कि टेक्नोलॉजी किस तरह से उनकी गलतियों को सुधारने में मददगार साबित हो रहा है।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, धोनी का कहना है कि, “मेरे और टेक्नोलॉजी दोनों के बीच काफी दूरी है। मैं फोन का इस्तेमाल ज्यादा नहीं करता। यही वजह है कि मेरे द्वारा फोन न उठाने की कई बार बात सामने आयी है। लेकिन मैं टेक्नोलॉजी का प्रयोग अच्छे से करता हूं। जब मैं कई सारे वीडियोज देखता हूं तो हैरान रह जाता हूं कि मैं इससे अच्छा खेल सकता था। मैं टेक्नोलॉजी का सही उपयोग करता हूं।” बात 2012 की है, जब वीवीएस लक्ष्मण रिटायर हो रहे थे, उस समय धोनी वहां मौजूद नहीं थे। तब यह अफवाह उड़ा था कि दो क्रिकेटर जानबूझ कर उस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। लेकिन उसके बाद धोनी ने यह साफ किया था कि वास्तव में उस समय हुआ क्या था? लक्ष्मण के विदाई समारोह के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे हैदराबाद के बल्लेबाज उनसे फोन पर संपर्क करने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन वे कॉल उठा नहीं पाए। इस वजह से वे उसमें शामिल नहीं हो पाए। धोनी ने बताया कि, “आपको लगता है कि यह एक विवाद है? लेकिन जो लोग मुझे जानते हैं वे हमेशा शिकायत करते हैं कि मैं ऐसा व्यक्ति हूं, जो आसानी से पकड़ में नहीं आता है। यही कारण है कि लक्ष्मणभाई मुझे पकड़ नहीं पाए।”

उसी कार्यक्रम में धोनी ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ तीसरे एकदिवसीय मैच के बाद मैच बॉल क्यों लिया था। अफवाहें उठीं कि वह खेल के अंत में अंपायर से मैच बॉल मांगने के बाद रिटायर्ड हो सकते हैं। हालांकि, उन्होंने खुलासा किया कि यह वहां के महौल को बेहतर ढंग से समझने में मदद के लिए किया गया था। अनुभवी भारत अरुण को गेंद पर प्रैक्टिस कराना चाहता था। देखता कि कैसे भारतीय गेंदबाज अंग्रेजी गेंदबाजों की तरह स्विंग कर सकते हैं।

 

धोनी वर्षों बाद आइपीएल में अपना बेहतर प्रदर्शन करते हुए वापस फार्म में लौटे, जहां उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स की तरफ से खेलते हुए 425 रन बनाए। कई शानदार बाउंड्री भी खेली। हालांकि, वह इंग्लैंड के खिलाफ एकदिवसीय मैचों की श्रृंखला में अपने प्रदर्शन को दोहरा नहीं सके और अपनी धीमी बल्लेबाजी के लिए स्कैनर के तहत आ गए हैं। दूसरे एकदिवसीय मैच में उन्होंने 59 गेंदों की 37 रनों की पारी खेली। यह मैच आखिरकार भारत 86 रनों से हार गई। तीसरे एकदिवसीय मैच में भी धोनी भारत को हार से बचाने के लिए ज्यादा कुछ नहीं कर सके। हालांकि, यह अनुभवी खिलाड़ी 10,000 एकदिवसीय रनों के यह मुकाम हासिल करने वाले चौथे भारतीय क्रिकेटर बने हैं। साथ ही सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड के बाद 500 अतंरराष्ट्रीय मैच खेलने वाले तीसरे खिलाड़ी हैं।

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