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‘कैप्टन कूल’ महेंद्र सिंह धोनी ने इंटरनेशनल मैच में अंपायर को दिखाई थी अंगुली, IPL में भी कई मौकों पर खो चुके हैं आपा

2010 में धर्मशाला के मैदान पर चेन्नई सुपरकिंग्स का मुकाबला किंग्स इलेवन पंजाब से था। प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए सीएसके को जीत चाहिए थी। पंजाब ने 192 रन का लक्ष्य दिया। चेन्नई को जब प्रति ओवर 9 रन बनाने थे तब धोनी बल्लेबाजी के लिए आए थे। उन्होंने फिर तूफानी बल्लेबाजी की।

महेंद्र सिंह धोनी गुस्से में बिली बॉडेन से भीड़ गए थे। (सोर्स – सोशल मीडिया)

टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी 7 जुलाई को 39 साल के हो गए। वे पिछले एक साल से पेशेवर क्रिकेट से दूर हैं। यूं तो धोनी मैदान पर शांत और कूल होने के लिए ज्यादा मशहूर हैं। लेकिन, क्रिकेट के मैदान पर कई बार वे आपा खोते भी नजर आए हैं। पिछले साल ही धोनी आईपीएल के एक मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम से बीच मैदान पर चले गए और अंपायर से बहस करने लगे। यह धोनी के करियर का सबसे बड़ा विवाद साबित हुआ। हालांकि, उन पर प्रतिबंध नहीं लगा, लेकिन उनके फैंस ने भी इसे पसंद नहीं किया। हम आपको यहां 4 ऐसे मौकों को बता रहे हैं जब धोनी को गुस्सा आया।

पहला मौका: भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच ब्रिस्बेन के मैदान 2011-12 में एक मुकाबला खेला जा रहा था। माइकल हसी बल्लेबाजी कर रहे थे और सुरेश रैना गेंदबाजी। हसी रैना की गेंद को खेलने से चूक गए और माही ने उसे स्टंप कर दिया। थर्ड अंपायर ने आउट करार दिया। असल विवाद यहीं से शुरू हुआ। थर्ड अंपायर के आउट देने के बावजूद मैदान पर खड़े अंपायर ने हसी को नॉट आउट करार दिया और हसी को पवेलियन जाने से रोक दिया। इस पर धोनी गुस्से में आ गए। वे अंपायर से भीड़ गए। फिर मशहूर अंपायर बिली बॉडेन ने उन्हें समझाया और मामला शांत किया।

दूसरा मौका: भारत और बांग्लादेश के बीच 2015 में मीरपुर में वनडे मुकाबला चल रहा था। 25 ओवर तक भारत के 4 विकेट गिर चुके थे। 25वें ओवर में मुस्तफिजुर गेंदबाजी के लिए आए। ओवर की दूसर गेंद पर धोनी रन के लिए दौड़े और मुस्तफिजुर से टकरा गए। उन्होंने गुस्से में बांग्लादेशी गेंदबाज को कोहनी मार दी। फिर अंपायर को कहा कि गेंदबाज उनके रास्ते में आया। मुस्तफिजुर इससे पहले मैच के दौरान कई बार भारतीय खिलाड़ियों के रास्ते में आए थे। इससे माही गुस्से में थे। धोनी से टकराने के कारण मुस्तफिजुर को मैदान छोड़कर बाहर जाना पड़ा।

तीसरा मौका: 2010 में धर्मशाला के मैदान पर चेन्नई सुपरकिंग्स का मुकाबला किंग्स इलेवन पंजाब से था। प्लेऑफ में जगह बनाने के लिए सीएसके को जीत चाहिए थी। पंजाब ने 192 रन का लक्ष्य दिया। चेन्नई को जब प्रति ओवर 9 रन बनाने थे तब धोनी बल्लेबाजी के लिए आए थे। 2 ओवर में 29 रन बनाने थे। आखिरी ओवर में 16 रन की जरूरत थी। इरफान पठान गेंदबाजी के लिए आए। पिच टूटने लगी थी। इससे लग रहा था गेंदबाज को मदद मिलेगी। धोनी पहली गेंद पर चौका, दूसरी गेंद पर दो रन और फिर तीसरी और चौथी गेंद पर छक्का मार दिया। धोनी ने 29 गेंद पर 54 रन बनाए थे। मैच जीतने के बाद वे इतने गुस्से में जश्न मनाने रहे थे जैसे पठान से लड़ लेंगे। धोनी को आईपीएल इससे पहले इतने गुस्से में नहीं देखा गया था।

चौथा मौका: आईपीएल के पिछले सीजन में सीएसके का मुकाबला होमग्राउंड पर राजस्थान रॉयल्स से था। आखिरी ओवर में बेन स्टोक्स गेंदबाजी के लिए आए थे। सामने थे मिशेल सैंटनर। उन्होंने चौथी गेंद पर दो रन लिए। मुख्य अंपायर ने कमर से ऊपर होने के कारण गेंद को नो-बॉल करार दिया। फिर लेग अंपायर की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आने पर निर्णय वापस ले लिया। इस पर धोनी गुस्से में आ गए। वे डगआउट से गुस्से में सीधे अंपायर की ओर चल दिए। अंपायर्स और धोनी के बीच मैदान बहस जमकर बहस हुई, इसके बावजूद फैसला नहीं बदला गया। धोनी मैदान से बाहर चले गए। धोनी पर आचार संहिता के उल्लंघन के लिए मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया गया।

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