मोहम्मद शमी ने भारतीय टीम के लिए कई ऐसे यादगार स्पैल फेंके हैं जिसने ना सिर्फ टीम इंडिया को जीत दिलाई बल्कि क्रिकेट फैंस का जमकर मनोरंजन भी किया। शमी 2023 वनडे वर्ल्ड कप में ना सिर्फ भारत के लिए बल्कि ओवरऑल सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बॉलर भी रहे थे और उनकी घातक गेंदबाजी ने टीम इंडिया को फाइनल का टिकट कटाने में बड़ी भूमिका निभाई थी। चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के बाद से वो भारतीय टीम से बाहर चल रहे हैं और वापसी की हर कोशिश के बावजूद वो चयनकर्ताओं को प्रभावित करने में असफल रहे हैं तो क्या मान लिया जाए कि उनका इंटरनेशनल क्रिकेट करियर समाप्त हो चुका है।

वैसे देखा जाए तो जिस तरह से उन्हें नजरअंदाज किया जा रहा है ऐसे में अब भारतीय चयनकर्ता शायद ही उन्हें टीम इंडिया की रणनीति का हिस्सा मान रहे हैं। वैसे शमी द्वारा घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी) में गेंदबाजी करने और अपनी फिटनेस साबित करने के बावजूद चयनकर्ता लगातार नई पीढ़ी के गेंदबाजों पर भरोसा जता रहे हैं। आइए जानते हैं वो कौन से 5 कारण हैं जिसकी वजह से ऐसा लग रहा है कि अब शायद ही वो टीम इंडिया में जगह बना पाएं।

गेंदबाजी में बढ़ती प्रतिद्वंदिता

इन दिनों भारतीय टीम के पास तेज गेंदबाजों की एक बड़ी फौज मौजूद है और तेज गेंदबाजी में बढ़ती प्रतिद्वंदिता की वजह से शमी की वापसी का रास्ता लगभग बंद सा नजर आ रहा है। क्रिकेट के हर प्रारूप में चाहे वो टेस्ट प्रारूप हो या फिर वनडे या टी20, भारत के पास हर फॉर्मेट के लिए गेंदबाज मौजूद है। टेस्ट क्रिकेट में जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, आकाश दीप, प्रसिद्ध कृष्णा तो वहीं वनडे एवं टी20 में अर्शदीप सिंह, हर्षित राणा, मयंक यादव, खलील अहमद की मौजूदगी ने शमी की राह मुश्किल कर रखी है।

उम्र और फिटनेस की चुनौतियां

मोहम्मद शमी जल्दी ही 36 साल के हो जाएंगे और तेज गेंदबाजों के लिए इस उम्र में आमतौर पर इंटरनेशनल लेवल पर एक समान गति और सटीकता बनाए रखना काफी चुनौतीपूर्ण होता है। 2023 विश्व कप के बाद शमी को टखने की सर्जरी से गुजरना पड़ा था। लंबी रिकवरी और रिहैबिलिटेशन के कारण वे काफी समय तक अंतरराष्ट्रीय मैदानों से दूर रहे। तेज गेंदबाजी में शरीर पर पड़ने वाले अत्यधिक दबाव को देखते हुए लगातार फिटनेस बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है।

भारतीय चयनकर्ताओं की नजर नए गेंदबाजों पर

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड और मुख्य चयनकर्ता अजीत अगरकर की अगुवाई वाली चयन समिति का मुख्य ध्यान अब भविष्य की टीम तैयार करने पर है। चयनकर्ता अब आकाश दीप, प्रसिद्ध कृष्णा, हर्षित राणा, अर्शदीप सिंह और आकिब नबी जैसे गेंदबाजों को लगातार मौके दे रहे हैं। यही नहीं चयनकर्ता अब जसप्रीत बुमराह और मोहम्मद सिराज की अगुवाई में युवाओं का ऐसा मिश्रण चाहते हैं जो तीनों प्रारूपों में लंबे समय तक खेल सके।

सर्जरी के बाद शमी की गति पर पड़ा प्रभाव

चोट के बाद मैदान पर लौटने पर किसी भी तेज गेंदबाज के लिए अपनी पुरानी रंगत पाना आसान नहीं होता। शमी ने घरेलू क्रिकेट में लंबे ब्रेक के बाद वापसी की थी और उनकी गेंदबाजी में वो लय नजर नहीं आया था जिसके लिए वो जाने जाते हैं। उनकी गति में भी साफ तौर पर फर्क देखा गया था। हालांकि घरेलू मैचों में उनकी सीम पोजीशन और स्विंग बेहतरीन रही है, लेकिन इंटरनेशनल लेवल पर वो लगातार 140 की स्पीड में गेंदबाजी कर लें इस पर अब संदेह है। आईपीएल 2026 में भी वो ज्यादा प्रभावी नहीं लगे थे।

तीनों फॉर्मेट में वर्कलोड का प्रबंधन

भारतीय टीम प्रबंधन अब खिलाड़ियों के वर्कलोड मैनेजमेंट पर बहुत ज्यादा ध्यान दे रहा है। शमी ने घरेलू क्रिकेट में 30-35 ओवर गेंदबाजी करके अपनी मैच फिटनेस साबित करने की कोशिश की है। हालांकि, चयन समिति का मानना है कि रेड-बॉल (टेस्ट) क्रिकेट के भारी वर्कलोड को सहन करने के लिए शमी को अभी और आंकना होगा। सीमित ओवरों के प्रारूप में भी भारत युवाओं को अधिक अवसर दे रहा है। शमी की उम्र अब उनकी राह में बड़ी बाधा बनता नजर आ रहा है।

शमी को है वापसी की उम्मीद

मोहम्मद शमी के सामने कई चुनौतियां हैं, लेकिन इसके वावजूद शमी ने हार नहीं मानी है। उन्होंने अपनी फिटनेस में सुधार करने के लिए अपनी वजन भी कम किया है और घरेलू क्रिकेट में वो लगातार विकेट ले रहे हैं। पिछले रणजी सीजन में उन्होंने 37 विकेट लिए थे जबकि विजय हजारे ट्रॉफी में उन्होंने 15 विकेट लिए थे। शमी का टारगेट अब वनडे वर्ल्ड कप 2027 में खेलना है, लेकिन तब तक वो लगभग 37 साल के हो जाएंगे। वैसे साउथ अफ्रीका जैसी तेज और उछालभरी पिच वाले देशों में शमी का रिकॉर्ड शानदार रहा है, लेकिन प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बरार जैसे गेंदबाजों के आने से शमी की चुनौतियां बढ़ गई हैं।

रोहित नंबर 1, सचिन, सहवाग, कोहली, धोनी से आगे युवराज; वनडे में एक दशक में सबसे ज्यादा 6 लगाने वाले टॉप-7 भारतीय

भारत की तरफ से वनडे प्रारूप में एक दशक में सबसे ज्यादा छक्के लगाने वाले बल्लेबाज रोहित शर्मा हैं। रोहित शर्मा ने ये कमाल 2010 के दशक में किया था और वनडे फॉर्मेट में कुल इतने छक्के लगाए थे। (इस खबर को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)