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‘सचिन के आउट होते ही देवदास देखने चले गए थे मेरे माता-पिता, बेटे की बैटिंग नहीं देखी’, कैफ ने सुनाई नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल की कहानी

उस मैच में भारतीय टीम को 326 रनों के लक्ष्य मिला था। कैफ 109 गेंद पर 87 रन बनाकर नाबाद थे। उन्होंने 6 चौके और 2 छक्के लगाए थे। भारत ने फाइनल में इंग्लैंड को हरा दिया था।

Mohammad Kaif, Schin Tendulkar, Yuvraj Singh, natwest series, kaifमोहम्मद कैफ और युवराज सिंह ने मिलकर भारत को जीत दिलाई थी। (सोर्स – सोशल मीडिया)

भारतीय क्रिकेट में अगर यादगार जीत की बात होती है तो लोग सौरव गांगुली की कप्तानी में खेली गई नेटवेस्ट ट्रॉफी को जरूर याद करते हैं। टीम इंडिया कई फाइनल हारने के बाद उस टूर्नामेंट में जीती थी। भारत ने मेजबान इंग्लैंड को फाइनल में हरा दिया था। 2002 में खेले गए उस मैच से जुड़ कई किस्से अब तक लोगों के सामने आ चुके हैं। टीम की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले मोहम्मद कैफ ने एक इंटरव्यू में कहा था कि जब सचिन तेंदुलकर आउट होकर पवेलियन जा रहे थे तो लोग स्टेडियम से बाहर जाने लगे। यही नहीं भारत में लोगों ने टीवी देखना बंद कर दिया था।

कैफ ने स्पोर्ट्स एंकर गौरव कपूर के यूट्यूब चैनल ‘ऑकट्री स्पोर्ट्स’ को दिए गए इंटरव्यू में ये बातें कही थीं। कैफ ने नेटवेस्ट ट्रॉफी के फाइनल को याद करते हुए कहा था, ‘‘मेरे लिए वह एक मौका था। सचिन जब आउट होने के बाद बाहर जा रहे थे तो मैं मैदान में अंदर जा रहा था। उनके आउट होने के बाद दर्शक स्टेडियम से बाहर जाने लगे थे। मैंने मन ही मन कहा कि मुझे भी देख लो। यहां तक मेरे माता-पिता भी मूवी देखने चले गए थे। उस समय शाहरुख खान की फिल्म आई थी देवदास। मेरे घर के पास थिएटर था। मेरे घरवाले मूवी देखने चले गए। बेटे की लाइव बैटिंग नहीं देखी। जब मैच जीत गए तो मोहल्ले के लोग घर आए। वहां ताला बंद था। उन्हें लगा कि कैफ ने मैच जीता दिया है तो उनके माता-पिता घर में हैं। लोग ताला बंद होने के बाद भी दरवाजे को ठोक रहे थे। बाद में उन्हें पता चला कि सभी देवदास देखने गए हैं। वे वहां भी पहुंच गए और फिल्म के दौरान ही माता-पिता को जीत के बारे में बताया।’’

कैफ ने आगे कहा, ‘‘मेरा बैटिंग का कोई प्लान था नहीं। मुझे बस गेंद को देखना था। मुझे पता था कि यह मेरे लिए बेहतरीन चांस था। नंबर 7 पर ऐसा चांस बार-बार नहीं आता है। सचिन और सहवाग बार-बार आउट नहीं होते। 25-25 ओवर बार-बार खेलने को नहीं मिलेंगे। हमेशा 7-8 ओवर खेलने के लिए मिलता था। युवराज सिंह जिस तरह फॉर्म में थे तो मेरा रोल था बस साथ देना। अगर उनके साथ अच्छी दोस्ती नहीं होती तो इतनी अच्छी साझेदारी भी नहीं कर पाते। हमारे बीच बेहतरीन तालमेल था। हमलोग सारी बातें खुलकर करते हैं। कुछ छुपा नहीं था। कई बार तो आंखों के इशारों से ही रन लेते थे। उसको पता है कि कैफ कैसे खेलता है और मुझे पता है कि युवराज कैसे खेलता है।’’

उस मैच में भारतीय टीम को 326 रनों के लक्ष्य मिला था। वीरेंद्र सहवाग 45 और सौरव गांगुली ने 60 रन की पारी खेली थी। दिनेश मोंगिया 9 और सचिन तेंदुलकर 14 रन बनाए थे। राहुल द्रविड़ ने 5 रन बनाए थे। इसके बाद युवराज और कैफ ने पारी को संभाला था। युवराज 63 गेंद पर 69 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। उन्होंने 9 चौके और एक छक्के लगाए थे। कैफ ने इसके बाद हरभजन सिंह के साथ उन्होंने 47 रन की साझेदारी की थी। हरभजन ने 13 गेंद पर 15 रन की पारी खेली थी। इसके बाद अनिल कुंबले खाता खोले बगैर आउट हो गए थे। कैफ ने इसके बाद जहीर खान के साथ मिलकर नाबाद 12 रन की साझेदारी की और टीम इंडिया को जीत दिलाई थी। कैफ 109 गेंद पर 87 रन बनाकर नाबाद थे। उन्होंने 6 चौके और 2 छक्के लगाए थे।

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