तीरंदाज बनना चाहती थीं मीराबाई चानू; 8वीं की किताब ने बदली किस्मत, ओलंपिक मेडल जीतने में लकड़ियों का भी है योगदान

मीराबाई चानू बचपन से तीरंदाज बनना चाहती थीं लेकिन पढ़ाई के दौरान आठवीं कक्षा की एक किताब के चैप्टर ने उनकी किस्मत बदल दी। वहीं ये भी बताया जाता है कि वेटलिफ्टिंग के करियर में आगे बढ़ने में चानू का सहारा लकड़ी के गट्ठर भी बने।

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तीरंदाज बनना चाहती थीं मीराबई चानू, 8वीं की किताब ने बदली किस्मत (Source: Twitter)

भारत के लिए टोक्यो ओलंपिक में आज का दिन ऐतिहासिक रहा है। इस इतिहास को लिखने वाली महिला का नाम है मीराबाई चानू जिन्होंने क्लीन एवं जर्क में 115 किग्रा और स्नैच में 87 किग्रा सहित कुल 202 किग्रा वजन उठाकर रजत पदक अपने नाम किया। चानू का इस मुकाम तक पहुंचने का सफर काफी दिलचस्प रहा है।

कहा जाता है कि वे बचपन से तीरंदाज बनना चाहती थीं लेकिन पढ़ाई के दौरान आठवीं कक्षा की एक किताब के चैप्टर ने उनकी किस्मत बदल दी। वहीं ये भी बताया जाता है कि वेटलिफ्टिंग के करियर में आगे बढ़ने में चानू का सहारा लकड़ी के गट्ठर भी बने।

लकड़ी उठाते-उठाते बनीं देश की महान वेटलिफ्टर

भारत को टोक्यो ओलंपिक में पहला पदक दिलाने वाली चानू का जन्म इम्फाल के नोंगपोक काकचिंग गांव में 8 अगस्त, 1994 को हुआ था। वे एक खासा साधारण परिवार से थीं अक्सर वे खाना बनाने के लिए चूल्हे की लकड़ी लेने जाया करती थीं। महज 12 साल की उम्र से ही चानू बड़े-बड़े लकड़ी के गट्ठर उठाया करती थीं। किसे पता था कि लकड़ी उठाते-उठाते ये 12 साल की लड़की एक दिन विदेश में देश का तिरंगा ऊंचा करेगी।

8वीं की किताब ने चानू को तीरंदाजी से वेटलिफ्टिंग की ओर खींचा

मीराबाई चानू के लिए अक्सर एक बात बताई जाती है कि वे बचपन से एक तीरंदाज बनने का सपना देखती थीं। पढ़ाई के दौरान एक बार 8वीं कक्षा के एक चैप्टर ने चानू के सपने और मन दोनों को बदल दिया। तीरंदाज के तौर पर ट्रेनिंग न मिलने के बाद जब वह स्कूल लौटीं तो उन्होंने किताब में भारत की महान वेटलिफ्टर कुंजरानी देवी (Kunjarani Devi) की सफलता की कहानी पढ़ी। बस यहीं से उनका सपना बदल गया और उन्होंने वेटलिफ्टर बनने का फैसला किया। बाद में पूर्व इंटरनेशनल वेटलिफ्टर अनीता चानू उनकी कोच बनीं।

गौरतलब है भारतीय महिला स्टार भारोत्तोलक मीरा बाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक की 49 किग्रा स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया है। मीरा बाई चानू ओलंपिक गेम्स के पहले दिन मेडल जीतने वाली पहली महिला बन गई हैं।

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