भारत में खेलों के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने मेघालय की राजधानी शिलांग में एक विश्वस्तरीय हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर (HATC) स्थापित करने की योजना बनाई है। करीब 150 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह अत्याधुनिक केंद्र एक समय में 450 से अधिक खिलाड़ियों को प्रशिक्षण और आवास की सुविधा प्रदान करेगा।

खेल विज्ञान भवन, एलीट एथलीट्स रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स, इनडोर हीटेड स्विमिंग पूल, प्राकृतिक प्रशिक्षण ट्रेल्स तथा आधुनिक खेल सुविधाओं से लैस यह केंद्र देश के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की तैयारी का माहौल उपलब्ध कराने में अहम भूमिका निभाएगा।

यह परियोजना युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय और भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के माध्यम से लागू की जाएगी। इसे एनएसई फाउंडेशन के कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) कार्यक्रम के तहत सार्वजनिक-निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए शिलांग स्थित मौजूदा स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर को अपग्रेड कर एक आधुनिक हाई-परफॉर्मेंस स्पोर्ट्स हब में बदला जाएगा।

क्या होता है हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर?

हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर ऐसी विशेष प्रशिक्षण सुविधा होती है, जो समुद्र तल से पर्याप्त ऊंचाई पर स्थित होती है। ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हवा में ऑक्सीजन का स्तर अपेक्षाकृत कम होता है, जिससे शरीर को अनुकूलन की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है। इस दौरान शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं का उत्पादन बढ़ता है, जिससे ऑक्सीजन वहन करने की क्षमता बेहतर होती है।

विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे वातावरण में प्रशिक्षण लेने से खिलाड़ियों की सहनशक्ति, कार्डियोवैस्कुलर दक्षता और रिकवरी क्षमता में सुधार होता है। यही कारण है कि दुनिया की कई शीर्ष खेल शक्तियां अपनी ओलंपिक और विश्वस्तरीय तैयारियों में हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग को महत्वपूर्ण स्थान देती हैं।

शिलांग का प्रस्तावित केंद्र प्राकृतिक ऊंचाई और आधुनिक हाइपॉक्सिक सुविधाओं का संयोजन होगा। यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त तीन प्रमुख प्रशिक्षण मॉडल {‘लिव हाई-ट्रेन हाई’, ‘लिव हाई-ट्रेन लो’ और ‘इंटरमिटेंट हाइपॉक्सिक ट्रेनिंग’} उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके साथ ही चिकित्सा सहायता, रिकवरी सेवाएं, व्यक्तिगत पोषण योजना और उच्च स्तरीय आवास सुविधाओं को एकीकृत खेल विज्ञान तंत्र के रूप में विकसित किया जाएगा।

ओलंपिक तैयारियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह परियोजना?

आधुनिक खेलों में ऊंचाई के अनुरूप शारीरिक अनुकूलन (Altitude Adaptation) को उच्च प्रदर्शन का एक महत्वपूर्ण आधार माना जाता है। विशेष रूप से एथलेटिक्स, तैराकी, रोइंग, साइक्लिंग, मुक्केबाजी और कुश्ती जैसे खेलों में इसका प्रभाव स्पष्ट रूप से देखा जाता है।

अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों के अनुसार व्यवस्थित हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग से खिलाड़ियों की एरोबिक क्षमता (VO₂ Max) में 3 से 7 प्रतिशत तक सुधार संभव है। वहीं एंड्योरेंस प्रदर्शन में एक से तीन प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो सकती है। शीर्ष स्तर की प्रतियोगिताओं में यही मामूली अंतर पदक जीतने और पदक से चूक जाने के बीच का फर्क बन जाता है।

प्रस्तावित केंद्र खिलाड़ियों को न केवल बेहतर शारीरिक अनुकूलन का अवसर देगा, बल्कि रिकवरी को बेहतर बनाने और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए पहले से तैयार होने में भी मदद करेगा।

आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा परिसर

परियोजना के तहत एक समर्पित स्पोर्ट्स साइंस बिल्डिंग का निर्माण किया जाएगा, जहां प्रदर्शन विश्लेषण, खेल चिकित्सा, फिजियोथेरेपी, पोषण और रिकवरी से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। खिलाड़ियों के लिए एक आधुनिक एलीट रेजिडेंशियल कॉम्प्लेक्स भी बनाया जाएगा।

इसके अलावा एक इनडोर हीटेड स्विमिंग पूल का निर्माण किया जाएगा, जिससे खिलाड़ी पूरे वर्ष प्रशिक्षण और रिकवरी गतिविधियां जारी रख सकेंगे। इनडोर हीटेड स्विमिंग पूल यह एक छत से ढका हुआ तरणताल होगा। इसके पानी का तापमान नियंत्रित रखा जाएगा, ताकि ठंडे मौसम में भी खिलाड़ी आराम से अभ्यास कर पाएं।

प्राकृतिक पहाड़ी परिवेश का लाभ उठाने के लिए विशेष प्रशिक्षण ट्रेल्स भी विकसित किये जाएंगे, जहां धावक और अन्य खिलाड़ी सहनशक्ति आधारित अभ्यास कर सकेंगे। विशेष प्रशिक्षण ट्रेल्स का मतलब ऐसे प्राकृतिक रास्ते या पगडंडियां जो पहाड़ियों, जंगलों या खुले प्राकृतिक क्षेत्रों से होकर गुजरते हैं। एथलीट इन रास्तों पर दौड़, सहनशक्ति प्रशिक्षण, क्रॉस-कंट्री रनिंग और फिटनेस अभ्यास कर सकेंगे।

साथ ही मौजूदा 8-लेन, 400 मीटर एथलेटिक्स ट्रैक का आधुनिकीकरण किया जाएगा। फुटबॉल मैदान और पूरे कैंपस के बुनियादी ढांचे को भी नए सिरे से विकसित किया जाएगा, जिससे यह केंद्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रशिक्षण शिविरों की मेजबानी करने में सक्षम हो सके।

दुनिया के प्रमुख केंद्रों की तर्ज पर विकसित होगा शिलांग

दुनिया के कई अग्रणी खेल राष्ट्र अपनी सफलता के पीछे हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सुविधाओं को एक महत्वपूर्ण कारक मानते हैं। लगभग 2400 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केन्या का इटेन विश्वस्तरीय लंबी दूरी के धावकों का प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र माना जाता है।

स्विट्जरलैंड का सेंट मोरिट्ज अपनी ओलंपिक स्तर की सुविधाओं और खेल चिकित्सा समर्थन के लिए प्रसिद्ध है। फ्रांस का फॉन्ट रोम्यू राष्ट्रीय स्तर के व्यापक प्रदर्शन और पुनर्वास केंद्र के रूप में स्थापित है।

वहीं अमेरिका के कोलोराडो स्प्रिंग्स और फ्लैगस्टाफ लंबे समय से ओलंपिक और पैरालंपिक खिलाड़ियों के प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र रहे हैं। शिलांग में बनने वाला केंद्र भारत को इसी श्रेणी की विश्वस्तरीय सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

शिलांग क्यों है सबसे उपयुक्त स्थान?

विशेषज्ञों के अनुसार शिलांग प्रभावी और टिकाऊ हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग के लिए आवश्यक लगभग सभी प्राकृतिक परिस्थितियां प्रदान करता है। समुद्र तल से लगभग 1496 मीटर की ऊंचाई इसे मध्यम-ऊंचाई क्षेत्र में रखती है, जहां खिलाड़ी प्रशिक्षण की तीव्रता बनाए रखते हुए ऊंचाई से मिलने वाले शारीरिक लाभ भी प्राप्त कर सकते हैं।

यहां का सालभर अपेक्षाकृत सुहावना मौसम, लगभग 19 डिग्री सेल्सियस का औसत तापमान और स्वच्छ पर्वतीय वातावरण खिलाड़ियों के प्रशिक्षण और रिकवरी दोनों के लिए अनुकूल माना जाता है। आसपास की पहाड़ियां और प्राकृतिक ट्रेल्स क्रॉस-कंट्री रनिंग तथा एंड्योरेंस ट्रेनिंग के लिए आदर्श परिस्थितियां उपलब्ध कराती हैं।

इसके अलावा शिलांग को पूर्वोत्तर भारत का प्रवेश द्वार माना जाता है। यह क्षेत्र हाल के वर्षों में मुक्केबाजी, भारोत्तोलन, फुटबॉल, तीरंदाजी और एथलेटिक्स जैसे खेलों में लगातार प्रतिभाएं दे रहा है। मौजूदा SAI परिसर में परियोजना विकसित होने से लागत नियंत्रण और तेज क्रियान्वयन की संभावना भी बढ़ जाती है।

भारत की दीर्घकालिक खेल महत्वाकांक्षाओं का आधार

भारत ने हाल के वर्षों में ओलंपिक, एशियाई खेलों और राष्ट्रमंडल खेलों में अपना प्रदर्शन बेहतर किया है, लेकिन शीर्ष खेल राष्ट्रों की बराबरी करने के लिए विश्वस्तरीय प्रशिक्षण अवसंरचना का विस्तार आवश्यक माना जाता है।

ऐसे में शिलांग का हाई एल्टीट्यूड ट्रेनिंग सेंटर केवल एक नया खेल परिसर नहीं, बल्कि देश की दीर्घकालिक उच्च-प्रदर्शन खेल रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा साबित हो सकता है। शिलांग की प्राकृतिक विशेषताएं और भारतीय खेल प्राधिकरण की संस्थागत क्षमता मिलकर इसे भारत का प्रमुख हाई एल्टीट्यूड प्रशिक्षण केंद्र बना सकती हैं। भविष्य में यह केंद्र देश के ओलंपिक सपनों को साकार करने की दिशा में एक मजबूत आधारशिला साबित हो सकता है।

भारत के पास विश्वस्तरीय खेल सुविधाएं, लेकिन मनोवैज्ञानिक तैयारी में रह जाती है थोड़ी कमी: बोले फिट इंडिया के निदेशक सुशांत कांडपाल

फिट इंडिया निदेशक सुशांत कांडपाल ने कहा कि भारत खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाओं के मामले में दुनिया के बड़े देशों से पीछे नहीं है। हालांकि, उन्होंने माना कि खिलाड़ियों को मनोवैज्ञानिक तैयारी पर ज्यादा काम करने की जरूरत है। (पूरी खबर पढ़ने के लिए क्लिक करें)