मेरठ के कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम में हुई जिला एवं मंडल स्तरीय सब जूनियर मुक्केबाजी प्रतियोगिता के चयन ट्रायल में नियमों की अनदेखी और चिकित्सा सुविधा के अभाव का गंभीर मामला सामने आया है। चयन ट्रायल के 70+ किग्रा भार वर्ग में ग्रेटर नोएडा के मुक्केबाज अगस्त्या बाघ का शिवम कुमार से हुआ। शिवम कुमार ने बाउट के बीच अगस्त्या बाघ के कमर के नीचे प्रहार किया।

अगस्त्या ने इसकी रेफरी से तत्काल शिकायत की, लेकिन उनकी अपील को नजरअंदाज कर दिया गया। अगस्त्या कमर के नीचे हुए प्रहार से विचलित तो हुए, लेकिन फिर भी उन्होंने बाउट नहीं छोड़ी। छह फीट दो इंच लंबे अगस्त्या बाघ ने हाल ही में नोएडा में आयोजिता जिला ओलंपिक गेम्स में बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक जीता था।

चयन ट्रायल का वीडियो देखने पर 0:54 सेकंड पर दिख रहा है कि शिवम कुमार ने अगस्त्या पर कमर के नीचे प्रहार किया। अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी नियमों के अनुसार इस तरह का प्रहार फाउल होता है, लेकिन रेफरी सचिन ने न तो मैच रोका, न चेतावनी दी और न ही फाउल घोषित किया। यही नहीं, रेफरी नियम विरुद्ध जाकर शिवम कुमार को विजेता घोषित कर दिया।

खास बात यह भी थी कि बाउट के दौरान रिंग के पास कोई चिकित्सक मौजूद नहीं था। इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन के नियमों के अनुसार हर आधिकारिक मुकाबले में रिंग साइड डॉक्टर अनिवार्य है, ताकि चोट लगने पर खिलाड़ी को तुरंत उपचार मिल पाए। Video के आधार पर किन नियमों का उल्लंघन हुआ।

विश्व स्तर पर बॉक्सिंग के प्रमुख और आवश्यक नियम, जिसे बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया भी पालन करती है। यह मुक्केबाजी की सभी श्रेणियों में लागू होते हैं।

  1. वैध प्रहार (Legal Punches) : मुक्केबाज केवल अपने बंद ग्लव् (मुक्के) के सामने के हिस्से से ही वार कर सकते हैं।
  2. टार्गेट एरिया (Target Area) : प्रहार केवल प्रतिद्वंदी के शरीर के सामने या साइड के हिस्से पर, कमर से ऊपर (सिर और छाती/पेट) ही किया जा सकता है।
  3. रिंग और रेफरी : मैच हमेशा एक चौकोर रिंग में होता है और रिंग के अंदर एक रेफरी मौजूद रहता है जो नियमों का पालन करवाता है।
  4. फाउल और अवैध हरकतें (Fouls & Illegal Moves)
  5. मैच के दौरान निम्नलिखित हरकतें पूरी तरह प्रतिबंधित हैं और ऐसा करने पर अंक काटे जा सकते हैं या खिलाड़ी को अयोग्य (Disqualified) घोषित किया जा सकता है –
  6. कमर के नीचे वार करना (Low Blow) : बेल्ट या कमर के नीचे पंच मारना मना है।
  7. सिर के पीछे मारना (Rabbit Punch) : गर्दन या सिर के पिछले हिस्से पर वार करना वर्जित है।
  8. पकड़ना या कुश्ती (Clinching/Wrestling) : प्रतिद्वंदी को पकड़ना, गले लगाना या कुश्ती करना मना है।
  9. अन्य अवैध प्रहार : कोहनी (Elbow), सिर (Headbutt), घुटने से मारना या प्रतिद्वंदी को धक्का देना फाउल माना जाता है।
  10. गिरे हुए खिलाड़ी पर वार : यदि कोई खिलाड़ी रिंग में गिर जाता है, तो उस पर हमला नहीं किया जा सकता।

अगस्त्या के परिजन (दादा) अशोक बाघ ने आरोप लगाया कि सब कुछ पहले से तय था। उन्होंने जनसत्ता संवाददाता को बताया, ‘‘मुझसे लोगों ने कहा था कि यहां सब ‘सेटिंग’ से चलता है, जिसके लिए यहां पर दो-तीन दिन पहले दस्तक देनी पड़ती है।’’ अशोक बाघ का कहना है कि रेफरी ने जानबूझकर नियमों को दरकिनार कर उनके पौत्र की जान खतरे में डाली। पीड़ित दादा ने खेल महासंघ से तुरंत हस्तक्षेप और न्याय की मांग की है।

इस संबंध में कैलाश प्रकाश स्पोर्ट्स स्टेडियम के क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी जितेंद्र यादव ने कहा, ‘‘मुक्केबाजी विशेषज्ञ और जिला सचिव चयन ट्रायल में निर्णय लेते हैं। मैं मुक्केबाजी का विशेषज्ञ नहीं हूं। अगर चयन ट्रायल में कोई गलतियां होती हैं तो उस पर कोच, रेफरी ज्यादा जानकार होते हैं।’’

जितेंद्र यादव ने माना कि गौतमबुद्ध नगर से कई अभिभावकों की शिकायतें आईं हैं। उन्होंने कहा, ‘‘यहां (गौतम बुद्ध नगर) से ज्यादा शिकायतें रहती हैं। बाकी अन्य जिलों से ट्रायल में कोई शिकायत नहीं आईं। उन्होंने कहा, ‘‘इस संबंध में उत्तर प्रदेश के सचिव प्रमोद से बात की है और जहां भी कमी है, उसमें सुधार किया जाएगा।’’

रेफरी के फैसले पर जितेंद्र यादव ने कहा, ‘‘निर्णय देने का अधिकार रेफरी का है। मेरे निर्णय देने से कुछ नहीं होगा। अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित सतीश यादव भी चयन ट्रायल में रहते हैं, लेकिन छात्रावास की छुट्टी होने के कारण वह उपस्थित नहीं थे।’’

इस संबंध में जब कोच अभिषेक द्विवेदी से बात करने की काफी कोशिश की गई, लेकिन बात नहीं हो पाई। वाट्सएप और एसएमएस के जरिये भी कोच से इस विषय में उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनकी ओर से कोई जवाब नहीं आया।

मेरठ सब जूनियर बॉक्सिंग ट्रायल विवाद: खिलाड़ी को लो ब्लो के बाद भी नहीं मिला फाउल, चिकित्सा सुविधा पर भी सवाल।

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