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‘चोकर्स’ का जिन्न सवार रहा दक्षिण अफ्रीका के कंधे पर

क्षिण अफ्रीका का सफर विश्व कप क्रिकेट में न्यूजीलैंड ने रोक दिया। दक्षिण अफ्रीकी टीम एक बार फिर सेमीफाइनल से आगे नहीं बढ़ पाई। क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली इस टीम ने बड़े मुकाबलों में अब तक कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की है। इसी वजह से इसके माथे पर चोकर्स का ठप्पा बरसों […]

Author March 25, 2015 8:39 AM
क्रिकेट वर्ल्ड कप के फाइनल में पहुंचा न्यूजीलैंड

क्षिण अफ्रीका का सफर विश्व कप क्रिकेट में न्यूजीलैंड ने रोक दिया। दक्षिण अफ्रीकी टीम एक बार फिर सेमीफाइनल से आगे नहीं बढ़ पाई। क्रिकेट में बेहतरीन प्रदर्शन करने वाली इस टीम ने बड़े मुकाबलों में अब तक कोई बड़ी उपलब्धि हासिल नहीं की है। इसी वजह से इसके माथे पर चोकर्स का ठप्पा बरसों से चस्पां है।

मंगलवार को उसके पास मौका था इस ठप्पे से निजात पाने का। लेकिन क्रिकेट के रुख का कोई ठीक नहीं कि वह कब किसे गच्चा दे जाए। दक्षिण अफ्रीकी टीम फिर एक बार गच्चा खा गई। वह दबाव में अपने को संयमित नहीं रख पाई और बिखर गई।

विश्व क्रिकेट में दक्षिण अफ्रीकी टीम अपने क्षेत्ररक्षण के लिए खूब जानी जाती है। इसी विश्व कप में उसके क्षेत्ररक्षकों ने कुछ बेहतरीन कैच लपक जीत के भटक रहे रास्ते को अपनी ओर मोड़ लिया था। लेकिन मंगलवार को वे ऐसा नहीं कर पाए। उन्होंने कैच भी टपकाए और रन आउट के मौके भी गंवाए। इन चूके मौकों की वजह से मैच उनकी मुट्ठी से फिसल गया। कुछ खराब क्षेत्ररक्षण, कुछ असंतुलित गेंदबाजी और कुछ किस्मत ने दक्षिण अफ्रीका को फाइनल खेलने से महरूम कर दिया।


बारिश इस बार भी दक्षिण अफ्रीकी टीम के लिए खलनायक बनी। एबी डिविलयर्स और फाफ डुप्लेसिस जब लय में थे और बल्लेबाजी पावरप्ले चल रहा था तभी बारिश आ गई। बारिश थमी तो ओवरों की तादद कम कर 43 कर दिया गया। हालांकि दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों ने बाकी के बचे ओवरों में लप्पेबाजी जम कर की और पांच विकेट पर 281 रन बना लिए। डकवर्थ लुइस नियमों के तहत न्यूजीलैंड को 298 रनों का लक्ष्य मिला और उसने छह विकेट खो कर इसे पार कर लिया।

इस बार दक्षिण अफ्रीकी टीम की दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी। उनकी बल्लेबाजी में गहराई थी और दुनिया के सबसे बेहतरीन गेंदबाज उसके पास थे।

लेकिन जब दिन किसी टीम का नहीं होता है तो फिर न तो तुर्रम खान चलते हैं और न ही कोई खलीफा रंग जमा सकता है। सेमीफाइनल में ऐसा ही हुआ। डेल स्टेन, फिलेंडर और मोर्कल सरीखे बड़े नाम गेंदबाजी से कोई कमाल नहीं दिखा सके और न्यूजीलैंड के आलराउंडर ग्रांट इलियट अचानक नायक बन कर उभरे और सारे बड़े नामों को पीछे छोड़ दिया। विश्व कप में अब तक बल्ले से कोई करिश्मा नहीं कर सके इलियट ने सही समय पर अपने खेल को ऊंचाई दी और मैच के सिकंदर बन गए।

तीन विकेट 149 रनों पर निकल जाने के बाद इलियट ने आलराउंडर कोरी एंडरसन के साथ मिल कर चौथे विकेट के लिए सौ से ज्यादा रनों की साझेदारी कर टीम को पहले पटरी पर लाए और फिर आखिरी ओवर में टीम को जीत दिला कर न्यूजीलैंड के फाइनल में खेलने के सपने को पूरा किया।

स्टेन की गेंद को छह रनों के लिए भेज कर इलियट ने हवा में मुट्ठी भांज कर और बल्ले को लहरा कर जो प्रतिक्रिया दी, वह अपने आप में सारी कहानी बयां करती है। इस छक्के के बाद इलियट हवा में छलांग लगा कर जश्न मना रहे थे तो स्टेन जमीन पर पसर कर मातम। और एक स्टेन ही क्या, कप्तान डिविलयर्स, मोर्कल, मिलर सभी के आंखों का तटबंध टूट गया था और आंसुओं से भीगा चेहरा बता रहा था कि विश्व कप से कितने नजदीक आकर वे कितने दूर हो गए हैं। पहले भी ऐसा ही हुआ था और इस बार भी ऐसा ही हुआ।

खिताब के बड़े दावेदार के रूप में था दक्षिण अफ्रीका लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंच कर टीम फिर ठहर गई। कोई नहीं बता सकता कि इस टीम के साथ ही ऐसा क्यों होता है। 1992 में पहली बार विश्व कप के सेमीफाइनल में जगह बनाने के बाद से लगातार यह टीम अचानक लय खोती है और फिर नाकआउट दौर में हार कर खिताबी दौड़ से बाहर हो जाती है। दक्षिण अफ्रीकी टीम कभी भी कमजोर नहीं रही है लेकिन एक पड़ाव पर आकर टीम की लय खो जाती है। और इसी एक वजह से टीम को चोकर्स कहा जाता रहा है।

पर इस हार-जीत से परे महत्त्वपूर्ण यह रहा कि मैच रोमांचक हुआ। इस विश्व कप में इस तरह के एकाध ही मैच हुए थे। लेकिन पहला सेमीफाइनल रोमांच से भरा था और देखने वालों के पूरे पैसे वसूल हुए। दिलों की धड़कनें भी बढ़ीं और सांसें भी थमीं। न्यूजीलैंड तो सेमीफाइनल में पहुंच गई है। अब दूसरी टीम कौन होगी, बस इंतजार एक दिन और।
फ़ज़ल इमाम मल्लिक

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