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कैसे बदली अवेश खान की जिंदगी: कभी गुमटी चलाते थे पिता, आज पॉश होटलों में होती है खातिरदारी

क्रिकेटर अवेश कहते हैं कि मेरी मां हमेशा कहती है कि पैसे को हमेशा सही से खर्च करना चाहिए। मुझे घर देखना है क्योंकि मेरे पिता की गुमटी बंद हो चुकी है। उनके पास कोई नौकरी नहीं है। मेरे पिता मुझे फैंसी कार और कपड़े खरीदने की इजाजत नहीं देते।

कैसे बदली अवेश खान की जिंदगी: कभी गुमटी चलाते थे पिता, आज पॉश होटलों में होती है खातिरदारी
भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी अवेश खान (Photo: Express photo by Partha Paul)

भारतीय क्रिकेटर अवेश खान के पिता कभी गुमटी चलाते थे, आज पॉश होटलों में उनकी खातिरदारी होती है। वार्मअप मैच में वेस्टइंडीज के खिलाफ चार विकेट लेने के बाद गुजरात के वडोदरा के पॉश होटल में बैठे अवेश कुछ अलग ही दिख रहे थे। यदि किसी ने छह साल पहले उनसे पूछा होता कि क्या वे कभी इस तरह के पॉश होटल में बैठेंगे, तो वे शायद यही कहते ‘नहीं!’ वजह ही कुछ ऐसी है। अवेश जब 14 साल के थे, तब उनके परिवार में अचानक कुछ ऐसा बदलाव हुआ, जिसके लिए वे तैयार नहीं थे। अवेश के पिता मोहम्मद आशिक खान की मध्य प्रदेश के इंदाैर में सड़क किनारे पान की गुमटी थी, जिसे सड़क चौड़ीकरण के दौरान हटा दिया गया था। अवेश उस दिन को याद करते हुए कहते हैं कि उनके पिता बेरोजगार हो गए थे। घर में उदासी छा गई थी। सड़क का निर्माण शुरू हुआ। उनका परिवार दो वर्षों तक संघर्ष करता रहा।

अवेश कहते हैं, “गुमटी से पापा 500 रुपया प्रतिदिन कमा लेते थे। एक दिन सब टूट गया। अगले दो सालों तक जिंदगी संघर्ष में कटी। तब मैंने अपने आप से कहा कि मुझे कुछ करना ही पड़ेगा। ऐसे नहीं चलेगा।” अवेश ने क्रिकेट में अच्छा करने के लिए कड़ी मेहनत की। लेकिन सबकुछ उनके अनुसार नहीं रहा। न तो पॉकेट में पैसे थे और न हीं किसी का सहारा। उनके पिता क्रिकेट को लेकर उत्साही थे लेकिन, अवेश कहते हैं कि वे अपने अथक प्रयास के बावजूद मौका नहीं मिल पा रहा था।वे कहते हैं, “मेरे पिता को क्रिकेट के बारे में काफी समझदारी थी। लेकिन मैं अपने परिवार को फिर से खुश देखना चाहता था। सबके लिए यह खेल था, लेकिन मेरे लिए अपने परिवार में खुशियां वापस लाने का रास्ता।”

क्लब गेम में अच्छा खेलने के बावजूद तेजी से उभरते हुए गेंदबाज को जिला स्तरीय टीम में मौका नहीं मिला। यह तब की बात है जब इंदौर में भारत के पूर्व बल्लेबाज अमय खुरसिया की एकेडमी में सेलेक्शन ट्रायल हुआ था और अवेश को चुन लिया गया था। खुसरिया इस 16 वर्षीय खिलाड़ी से काफी प्रभावित हुए और राज्य के चयनकर्ताओं से उन्हें मध्य प्रदेश अंडर 16 में खेलने का अनुरोध किया था। उन्हें चुन लिया गया। अवेश कहते हैं, “जिंदगी बदलनी शुरू हो गई।” हालांकि, उनके परिवार के लोग चिंतित थे। वे हमेशा कहते थे कि जो कमाते हो, उसमें से कुछ बचाया करो। यूं ही पैसे खर्च न किया करो। अवेश याद करते हुए कहते हैं, “मुझे याद है कि अंडर 16 टीम में खेलते हुए 100 रुपये मिलते थे। वह 17 दिनों का कैंप था, मुझे 1700 रुपये मिले। मैंने इसे खर्च नहीं किया। मैं घर गया और पैसे दादी को दे दिए। दादी ने कहा था कि अब तू समझदार हो गया है।”

अवेश के पिता यह चाहते थे कि वह हमेशा मैदान पर दिखे। जब अवेश इंडिया अंडर 19, इंडिया ए और आईपीएल में खेलने गए, उनका क्रिकेट कॅरियर आकार लेने लगा। परिवार की स्थिति सामान्य होने लगी। लेकिन वे अपनी और अधिक पहचान बनाना चाहते थे। उनके पिता ने बड़ी बहन की शादी के लिए पांच लाख रुपये उधार लिए थे। तब अवेश को इंडिया अंडर 19 वर्ल्ड कप क्रिकेट के लिए चुन लिया गया और वे यूएई गए। हालांकि, टीम यह कप अपने नाम नहीं कर सकी, इसके बावजूद अवेश खुश थे क्योंकि उन्होंने अपने पिता का कर्ज चुकता कर दिया। दो साल बाद उन्हें फिर इंडिया अंडर 19 वर्ल्ड कप टीम के लिए कोच राहुल द्रविड द्वारा चुन लिया गया।

अवेश कहते हैं, “मेरी मां हमेशा कहती है कि पैसे को हमेशा सही से खर्च करना चाहिए। मुझे घर देखना है क्योंकि मेरे पिता की गुमटी बंद हो चुकी है। उनके पास कोई नौकरी नहीं है। मेरे पिता मुझे फैंसी कार और कपड़े खरीदने की इजाजत नहीं देते। एक बार मैंने 4000 रुपये की एक जिंस खरीद ली थी, तब उन्होंने कहा था कि ‘पैसा आराम से खर्च करो।’ मध्यमवर्गीय परिवार के लिए एक-एक पैसे की कीमत होती है। मेरे पास अभी भी एक स्कूटर है, जिसका उपयोग मैं प्रैक्टिस करने जाने के लिए करता हूं। सब बोलते हैं ‘कार ले लो’, मैं बात टाल देता हूं। ईद के समय भी, हम अधिक पैसे खर्च नहीं करते। मेरे परिवारवाले मुझे कहते हैं कि सबसे पहले जिंदगी में स्थायित्व जरूरी है।”

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