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15 साल की बेजोड़ पारी के बाद संगाकारा ने टांगा बल्ला

भारत के खिलाफ दूसरे टैस्ट मैच की समाप्ति के बाद विदाई समारोह में शुभकामनाएं और स्मृति चिन्ह हासिल करने वाले भावुक कुमार संगाकारा ने दूसरे टैस्ट के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया..

Author August 25, 2015 9:43 AM
श्रीलंकाई विकेटकीपर बल्लेबाज कुमार संगकारा (रॉयटर्स फोटो)

भारत के खिलाफ दूसरे टैस्ट मैच की समाप्ति के बाद विदाई समारोह में शुभकामनाएं और स्मृति चिन्ह हासिल करने वाले भावुक कुमार संगाकारा ने दूसरे टैस्ट के बाद क्रिकेट से संन्यास ले लिया। विदाई समारोह में वे अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाए और नम आंखों और रूंधे गले से उन्होंने सभी को धन्यवाद दिया। संगाकारा ने कहा कि जब कोई अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेता है तो यह बात अंतिम लम्हों तक उसके जेहन में नहीं आती। आप क्रिकेट मैच समाप्त करते हो और फिर अपने बारे में गुजरे हुए समय को लेकर बात करने के लिए उतरते हो। आखिरी बार मैदान में उतरने के बारे में उन्होंने कहा- तैयारियां वैसी ही रहीं जैसी हमेशा होती थीं। मैंने यह बात जेहन में नहीं आने दी कि यह मेरा आखिरी टैस्ट मैच है। दिन के आखिर में आप पर भावनाएं हावी होती है जब यह अहसास होता है कि अब उल्टी गिनती शुरू हो गई है।

श्रीलंका और भारतीय क्रिकेटरों द्वारा दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर के बारे में संगाकारा ने कहा कि यह (गार्ड ऑफ ऑनर) आपको याद दिलाता है कि यह वास्तव में अंत है। कोई विकल्प नहीं है और आपको इसे स्वीकार करके आगे बढ़ना होता है। मैं भाग्यशाली रहा कि मुझे इतने वर्षों तक सहयोग मिला। मैं खुशकिस्मत हूं कि मुझे पिछले पांच दिनों में लोगों का प्यार मिला। उन्होंने निराशा जताई कि श्रीलंका दूसरे मैच में भारत को जीतने और श्रृंखला में 1-1 से बराबरी करने से नहीं रोक पाया।

इस 37 वर्षीय वामहस्त बल्लेबाज ने कहा- दुर्भाग्य से हम वैसा नहीं खेल पाए जैसा खेल सकते थे। भारत ने बेहतरीन क्रिकेट खेली। लेकिन व्यक्तिगत रूप से मैंने हर पल का पूरा लुत्फ उठाया हालांकि टीम का हारना निराशाजनक रहा। मुझे बहुत खुशी है कि मैं इतना भाग्यशाली रहा कि एक और टैस्ट मैच खेल पाया।

संगाकारा ने अपने परिजनों, मां पिताजी, पत्नी बच्चों तथा करीबी दोस्तों और समर्थकों के सामने अपने करिअर का अंत किया और उन्होंने इसे विशेष क्षण बताया। उन्होंने कहा- कुछ खास क्षण थे। कई कारणों से आज का दिन भी विशेष था। यह पहला अवसर था जबकि मेरे माता पिता, भाई बहन, पत्नी और बच्चे एक जगह बैठकर मुझे खेलते हुए देख रहे थे। यह हमेशा मेरे लिए यादगार रहेगा। मैंने अपनी पत्नी, बच्चों और माता पिता के साथ समय नहीं बिताया। मेरे माता पिता ने कभी इसकी शिकायत नहीं की। वे कभी कभार ही मैच देखने आते थे लेकिन वे मेरे खेल पर करीब से नजर रखते थे।

इस मौके का गवाह बनने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री भी स्टेडियम में मौजूद थे। राष्ट्रपति ने उन्हें ब्रिटेन में श्रीलंका का उच्चायुक्त बनने की पेशकश की। संगाकारा ने कहा- मैं राष्ट्रपति के आग्रह का सम्मान करता हूं। मुझे उनसे इस बारे में और बात करने की जरूरत है। मैं इसके लिए बेहद अनुभवहीन हूं। आपको इसके लिए खास ज्ञान की जरूरत होती है। मैं इस बारे में विचार करूंगा और फिर जवाब दूंगा।

संगाकारा ने भावभीनी विदाई समारोह में आंसुओं पर काबू रखने की पूरी कोशिश की जबकि सुनील गावस्कर ने ‘पूर्व क्रिकेटरों के क्लब’ में उनका स्वागत किया। मैच के बाद विदाई समारोह में सभी हस्तियों ने एक के बाद एक उन्हें स्मृति चिन्ह भेंट किए और शुभकामनाएं दी। अपने विदाई भाषण में उन्हें अपने पूर्व स्कूल के प्रिंसिपल से लेकर कोचों और भारतीय टीम को भी धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि लोग मुझसे बड़ी उपलब्धियों के बारे में सवाल करते हैं, शतक, विश्व कप जीत लेकिन मैं ऊपर दर्शक दीर्घा में देखता हूं तो पिछले 30 साल के मेरे सारे दोस्त आज मेरा खेल देखने आए हैं। मैं चाहे जीतूं या हारूं लेकिन मेरे परिवार का प्यार बरकरार रहा जो सबसे बड़ी उपलब्धि है।

समारोह से पहले संगाकारा ने भारतीय टीम के सदस्यों से हाथ मिलाया और गले भी मिले। उन्होंने मैदानकर्मियों को ऑटोग्राफ दिए और तस्वीरें खिंचवाई। वहां मौजूद अतिथियों में श्रीलंका के राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरिसेना, प्रधानमंत्री रानिल विक्रमसिंघे, सुनील गावस्कर और श्रीलंका के एकमात्र विश्व कप विजेता कप्तान अर्जुन रणतुंगा शामिल थे।

गावस्कर ने इस मौके पर कहा कि मैं आपको जीवन में शानदार दूसरी पारी के लिए शुभकामना देता हूं। उम्मीद है कि यह आपकी पहली पारी की तरह शानदार होगी। मैं पूर्व क्रिकेटरों के क्लब में शामिल होने पर आपका स्वागत करता हूं। उन्होंने कहा कि आप श्रीलंकाई ड्रेसिंग रूम में बड़े भाई की भूमिका में रहे। क्रिकेटप्रेमियों को आपके बल्ले से रनों की बरसात हमेशा याद रहेगी। हमेशा विदाई यादगार नहीं होती। आपने इतने साल अपेक्षाओं का भारी बोझ सहा है। आप जीत के साथ नहीं जा सके लेकिन आपकी उपलब्धियां हमेशा याद रहेंगी।

हर टैस्ट टीम के खिलाफ शतक जमाने वाले 12 क्रिकेटरों में शामिल संगाकारा को कोहली ने भी सम्मानित किया। भारतीय कप्तान ने उन्हें टीम के हर सदस्य के ऑटोग्राफ वाली टीम जर्सी भेंट की। संगाकारा जब बोलने के लिए आए तो अपने आंसुओं पर काबू रखना उनके लिए मुश्किल हो गया था। उन्होंने कहा मुझे कई लोगों को धन्यवाद देना है।

अपने सभी पूर्व कप्तानों को, साथी खिलाड़ियों को जिन्होंने हमेशा सहयोग और प्रेरणा दी। ड्रेसिंग रूम में बिताए हर पल को मैं याद करूंगा। कई लोग मुझसे पूछते हैं कि मेरी प्रेरणा क्या है। मेरे माता पिता और भाई बहन मेरी प्रेरणा रहे हैं। शुक्रिया अम्मा और अप्पाची। मुझे बहुत अच्छे माता पिता और भाई बहन मिले जिन्होंने हमेशा मेरा साथ दिया, चाहे मैं अच्छा खेलूं या नहीं। घर पर मैंने हमेशा महफूज महसूस किया। उन्होंने कहा कि लोग कहते हैं कि आप अपना परिवार नहीं चुन सकते लेकिन मैं खुशकिस्मत हूं कि आपके घर में पैदा हुआ। मैं जज्बाती नहीं होता लेकिन यह दुर्लभ मौका है कि मेरे माता पिता और भाई बहन यहां हैं।

उन्होंने भावभीनी विदाई के लिए अपनी टीम और भारतीय टीम को धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि विराट और भारतीय टीम को शुक्रिया जिन्होंने यहां बेहतरीन क्रिकेट खेली। मैं ऐसा ही चाहता था। भारतीय टीम काफी कठिन प्रतिद्वंद्वी रही। हमने आपको हराने की कोशिश की। कई बार सफल हुए तो कई बार नहीं लेकिन यहां आने का शुक्रिया।

संगाकारा ने कहा कि एंजेलो और मेरी टीम से कहूंगा कि आपके पास बेहतरीन टीम और उज्ज्वल भविष्य है। निर्भीक होकर खेलो। हारने से मत डरो। आइसीसी के मुख्य कार्यकारी डेविड रिचर्डसन ने भी संगाकारा की तारीफ की। संगाकारा को सात बार (2006, 2007, 2008, 2010, 2011, 2012 और 2014) आइसीसी टैस्ट टीम में शामिल किया गया।

उन्हें 2012 में आइसीसी वर्ष के सर्वश्रेष्ठ क्रिकेटर की सर गैरी सोबर्स ट्राफी और 2011 और 2013 में आइसीसी वर्ष का सर्वश्रेष्ठ वनडे क्रिकेटर चुना गया। रिचर्डसन ने कहा कि कुमार संगाकारा क्रिकेट के महानतम खिलाड़ियों और दूतों में से हैं। उन्होंने अपने सुनहरे करिअर में बल्लेबाजी, विकेटकीपिंग और अपने आचरण से बेहतरीन प्रदर्शन किया। वे मिहानतम खिलाड़ियों में से एक हैं।

उन्होंने कहा कि तीनों प्रारूपों में 28016 रन बनाकर उन्होंने खुद को महानतम खिलाड़ियों की जमात में शामिल कर लिया। उन्हें 2011 में लार्ड्स पर एमसीसी स्पिरिट आफ क्रिकेट काउड्रे लेक्चर देने के लिए बुलाया गया। वे 2007 से 2015 तक आइसीसी क्रिकेट समिति के भी सदस्य रहे। उन्होंने कहा कि हम कुमार और उनके परिवार को खेल में इस योगदान के लिए धन्यवाद देते हैं।

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