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विराट कोहली के साथ ही इन पांच खिलाड़ियों ने भी टीम इंडिया में शुरू किया था अपना सफर, आज हैं गुमनाम

विराट की कप्तानी में अंडर-19 वर्ल्ड कप में रवींद्र जडेजा, इकबाल अब्दुल्ला, मनीष पांडे, सौरव तिवारी, तन्मय श्रीवास्तव, प्रदीप सांगवान, अभिनव मुकुंद जैसे खिलाड़ियों ने भारत के लिए खिताब जीता।

Author नई दिल्ली | January 18, 2017 11:42 AM
विराट कोहली के नेतृत्व में 2008-09 में भारत की अंडर-19 टीम ने मलेशिया में हुए वर्ल्ड कप में खिताबी जीत हा​सिल किया था।(Photo: BCCI)

वर्तमान समय में विराट कोहली और क्रिकेट एक दूसरे के पर्यायवाची बन चुके हैं। क्रिकेट का चाहे कोई भी फॉर्मेट हो विराट कोहली का जिक्र हर जगह है। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि विश्व क्रिकेट भी विराट कोहली की बैटिंग का कायल हो चुका है। देशी मीडिया हो या विदेशी मीडिया अगर स्पोर्ट्स में क्रिकेट की बात हो तो विराट कोहली उस चर्चा में जरूर शामिल रहते हैं। विराट कोहली की अगुवाई में भारत ने 2007-08 में मलेशिया में हुए अंडर-19 वर्ल्ड कप में दूसरी बार यह खिताब जीता। उस टूर्नामेंट में विराट कोहली का प्रदर्शन शानदार रहा था, जिसकी बदौलत उसी साल भारत की सीनियर टीम में डेब्यू करने का मौका मिल गया। विराट कोहली के साथ अंडर-19 वर्ल्ड कप में खेलने वाले और घरेलू क्रिकेट में अच्छा प्रदर्शन करने वाले कुछ अन्य खिलाड़ियों ने भी भारत की राष्ट्रीय टीम में डेब्यू किया था, लेकिन उनमें से कोई भी खिलाड़ी कोहली के साथ कम्पीट नहीं कर सका।

हम आपको भारतीय टीम के मौजूदा कप्तान विराट कोहली के साथ भारतीय टीम में डेब्यू करने वाले ऐसे ही पांच खिलाड़ियों के बारे में बता रहे हैं, जो आज गुमनाम हो चुके हैं और कहीं चर्चा में नहीं है…

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मनप्रीत गोनी: आईपीएल में एमएस धोनी के नेतृत्व वाली चेन्नई सुपरकिंग्स टीम के लिए खेलने वाले मनप्रीत गोनी ने अपनी तेज गेंदबाजी से सबको प्रभावित किया था। आईपीएल में अपने प्रदर्शन के कारण वो भारत के राष्ट्रीय टीम के चयनकर्ताओं की नज़र में आए और उन्हें टीम में खेलने का मौका भी मिला। मनप्रीत गोनी ने दो वनडे मैचों में भारत का प्रतिनिधित्व किया लेकिन वे कुछ खास प्रदर्शन नहीं कर सके। 33 वर्षीय तेज गेंदबाज मनप्रीत गोनी के व्यक्तिगत और पारिवारिक जिंदगी में कई उतार चढ़ाव आए, जिसका सीधा असर उनके क्रिकेट करियर पर पड़ा। साल 2009 का आईपीएल सीज़न उनके लिए अच्छा नहीं रहा और वे चयनकर्ताओं की नजरों से उतर गए। साल 2009-10 के रणजी सीज़न में गोनी ने अपनी फ़ॉर्म वापस पाई और 31 विकेट लिए, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी।

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सुब्रमण्यम बद्रीनाथ: सुब्रमझयम बद्रीनाथ भी मनप्रीत गोनी की तरह एमएस धोनी की नेतृत्व वाली आईपीएल टीम चेन्नई सुपरकिंग्स के हिस्सा थे। वह महेंद्र सिंह धोनी के लिए आईपीएल में तुरुप के इक्के थे। उन्होंने कई मौकों पर अपनी शानदार बल्लेबाजी से सीएसके को जीत दिलायी। ब्रद्रीनाथ की प्रतिभा पर किसी को कभी भी शक नहीं रहा लेकिन वे टीम इंडिया में अपनी जगह पक्की नहीं कर सके। हालांकि, 36 साल के एस बद्रीनाथ ने भारत के लिए क्रिकेट के तीनों फ़ॉर्मेट में डेब्यू किया, लेकिन कभी पक्के तौर पर टीम का हिस्सा नहीं बन सके। घरेलू क्रिकेट में 10 हजार से ज्यादा रन बना चुके बद्रीनाथ के लिए वापसी की राह लगभग बंद हो चुकी है, क्योंकि उनकी उम्र अब उनके चयन की इजाजत नहीं देती।

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मनोज तिवारी: घरेलू क्रिकेट में लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले 31 साल के मनोज तिवारी ने टीम इंडिया में डेब्यू किया था। ऑस्ट्रेलियाई दौरे पर 2008 में उन्हें पहला वनडे खेलने का मौका भी मिला लेकिन वो ब्रेट ली की गेंद पर बोल्ड आउट हुए और उनके करियर को ग्रहण लग गया। अगले तीन साल तक वो एक बार फिर घरेलू क्रिकेट में रन बनाते रहे लेकिन, उन्हें दोबारा मौका 2011 में वेस्ट इंडीज़ दौरे पर मिला, जब टीम इंडिया के सीनियर खिलाड़ियों को आराम दिया गया। 12 वनडे मैचों में मनोज ने एक शतक बनाया है। मनोज तिवारी बंगाल की तरफ से खेलते हुए रणजी में अपनी प्रतिभा साबित कर चके हैं, लेकिन बड़े-बड़े नामों के बीच वे कहीं खो जाते हैं। भारतीय टीम में जब सीनियर खिलाड़ियों को आराम दिया जाता है तो, उन्हें टीम में जगह मिलती है, लेकिन वरिष्ठ खिलाड़ियों की टीम में वापसी के बाद मनोज तिवारी को दरकिनार किया जाता रहा है।

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प्रज्ञान ओझा: गलत गेंदबाजी एक्शन वाले गेंदबाजों पर आईसीसी गाज गिराए इससे पहले ही बीसीसीआई ने अपने गेंदबाजों पर लगाम कसनी शुरू कर दी और प्रज्ञान ओझा भी इसके शिकार बने। बांए हाथ के स्पिनर प्रज्ञान ओझा ने 24 टेस्ट मैचों में भारत के लिए 113 विकेट हासिल किए हैं। हालांकि, राष्ट्रीय टीम में प्रज्ञान ओझा की वापसी अब मुश्किल है, क्योंकि रवींद्र जडेजा लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं और वो भी बाएं हाथ के ही गेंदबाज हैं। दूसरी तरफ आर अश्विन हैं और जयंत यादव के रूप में भारत को एक और उभरता हुआ टैलेंट मिल चुका है। ऐसे में प्रज्ञान ओझा का अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट करियर अब खत्म माना जा सकता है।

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यूसुफ पठान: यूसुफ पठान को अपनी विस्फोटक बल्लेबाजी और किफायती स्पिन गेंदबाजी के चलते भारत के लिए सीमित ओवरों के क्रिकेट में डेब्यू करने का मौका मिला। यूसुफ 2007 में खेले गए आईसीसी T20 वर्ल्ड कप के पहले संस्करण में भारतीय टीम का हिस्सा रहे लेकिन उन्हें पाकिस्तान के खिलाफ सिर्फ एक मैच खेलने का मौका मिला। यूसुफ को सबसे बड़ी सफलता आईपीएल से मिली, जब उन्होंने राजस्थान रॉयल्स के 2007 में चैंपियन बनने में अहम भूमिका निभाई और अगले साल टीम इंडिया में भी डेब्यू किया। यूसुफ पठान ने अपनी प्रतिभा के साथ न्याय नहीं किया, इसका साफ पता उनके अंतरराष्ट्रीय T20 करियर से लगता है। उन्होंने 22 टी20 मैचों में एक अर्द्धशतक भी नहीं बनाया। इस फॉर्मेट में उनका सर्वाधिक स्कोर नाबाद 37 रन है। वहीं, यूसुफ पठान 57 वनडे अंतराष्ट्रीय मैचों में 1000 रन भी पूरा नहीं कर सके। इस दौरान 41 वनडे पारियों में उन्होंने 810 रन बनाए, इसमें दो शतक और सिर्फ तीन अर्द्धशतक शामिल हैं।

विराट की कप्तानी में अंडर-19 वर्ल्ड कप में रवींद्र जडेजा, इकबाल अब्दुल्ला, मनीष पांडे, सौरव तिवारी, तन्मय श्रीवास्तव, प्रदीप सांगवान, अभिनव मुकुंद जैसे खिलाड़ियों ने भारत के लिए खिताब जीता। लेकिन, रवींद्र जडेजा को छोड़कर कोई भी अन्य खिलाड़ी टीम इंडिया में बड़ा नाम नहीं बन सका। मनीष पाण्डेय टीम इंडिया के लिए सीमत ओवरों के क्रिकेट में खेल रहे हैं, लेकिन वो भी टीम में अवपना स्थान पक्का नहीं कर सके हैं।

वीडियो: गेंद से छेड़छाड़ के आरोपों पर विराट कोहली ने कहा- “मुझे सिर्फ हंसी आई”

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