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कपिल देव, एमएस धोनी हों या विराट कोहली, नहीं होनी चाहिए खिलाड़ियों की पूजा, इंडियन क्रिकेट फैंस से बोले गौतम गंभीर

गौतम गंभीर से पूछा गया था कि क्या आपको लगता है कि यह ‘हीरो पूजा’ भविष्य के स्टार को उभरने से दबा देती है? इसके जवाब में गंभीर ने खुलकर अपनी राय रखी।

कपिल देव, एमएस धोनी हों या विराट कोहली, नहीं होनी चाहिए खिलाड़ियों की पूजा, इंडियन क्रिकेट फैंस से बोले गौतम गंभीर
कपिल देव, एमएस धोनी और विराट कोहली की ही अगुआई में भारतीय क्रिकेट टीम इंग्लैंड के लॉर्ड्स में टेस्ट मैच में जीत हासिल कर पाई है।

गौतम गंभीर ने भारतीय क्रिकेट में ‘हीरो पूजा’ को लेकर नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि विराट कोहली, एमएस धोनी जैसे शीर्ष सितारों के प्रति जुनून को रोकना चाहिए और प्रसारकों से लेकर मीडिया तक सभी को टीम के अन्य खिलाड़ियों पर भी ध्यान देना चाहिए। गौतम गंभीर का मानना है कि ‘हीरो पूजा’ की शुरुआत 1983 में कपिल देव से शुरू हुई, जब भारत ने विश्व कप जीता था।

द इंडियन एक्सप्रेस के आइडिया एक्सचेंज में गौतम गंभीर ने कहा, ‘ड्रेसिंग रूम में स्टार या हीरो नहीं बनाएं। स्टार या हीरो केवल भारतीय क्रिकेट होना चाहिए, व्यक्ति नहीं।’ गौतम गंभीर ने सोशल मीडिया फॉलोअर्स को ‘देश में सबसे नकली चीज’ कहा। उन्होंने लोगों से महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करने का आग्रह किया, भले ही वह छोटा ही क्यों न हो।

गौतम गंभीर से पूछा गया था कि क्या आपको लगता है कि यह ‘हीरो पूजा’ भविष्य के स्टार को उभरने से दबा देती है? इसके जवाब में गंभीर ने खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने एशिया कप 2022 में अफगानिस्तान के खिलाफ मैच का उदाहरण दिया, जिसमें विराट कोहली ने शतक लगाया था और भुवनेश्वर कुमार ने 5 विकेट लिए थे।

गौतम गंभीर ने कहा, भुवनेश्वर के बारे में क्या? उन्होंने कहा, ‘जब कोहली ने 100 रन बनाए तो पूरे देश में जश्न मनाया गया, लेकिन 5 विकेट लेने वाले एक छोटे से शहर मेरठ के भुवनेश्वर कुमार के बारे में किसी ने बात करने की जहमत तक नहीं उठाई। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण था। उस कॉमेंट्री बॉक्स में मैं अकेला था, जिसने ऐसा कहा था। उन्होंने 4 ओवर फेंके और 5 विकेट हासिल किए।’

गंभीर ने कहा, ‘मुझे नहीं लगता कि कोई इसके बारे में जानता है। लेकिन कोहली का स्कोर 100 होता है और इस देश में हर जगह जश्न मनाया जाता है। भारत को इस ‘हीरो पूजा’ से बाहर आने की जरूरत है। चाहे वह भारतीय क्रिकेट हो, चाहे वह राजनीति हो, चाहे वह दिल्ली क्रिकेट हो। हमें स्टार्स की पूजा बंद करनी होगी। हमें केवल एक चीज की पूजा करने की जरूरत है, वह है भारतीय क्रिकेट या फिर दिल्ली या भारत।’

गंभीर ने सवाल उठाते हुए पूछा, ‘यह किसने क्रिएट किया? इस दो चीजों ने बनाया। पहला सोशल मीडिया फॉलोवर्स, जो शायद इस देश में सबसे नकली चीज है, क्योंकि आपके कितने फॉलोअर्स हैं, इससे आपकी हैसियत का अंदाजा लगाया जाता है। वही एक ब्रांड बनाता है। दूसरा मीडिया और ब्रॉडकॉस्टर्स हैं।’

गंभीर ने कहा, ‘यदि आप हर दिन एक ही व्यक्ति के बारे में बात करते रहते हैं, तो वह अंततः एक ब्रांड बन जाता है। ऐसा ही 1983 में हुआ। शुरुआत धोनी से ही क्यों? इसकी शुरुआत 1983 में हुई थी। जब भारत ने पहला विश्व कप जीता था, तब सब कुछ कपिल देव के बारे में था। जब हम 2007 और 2011 में जीते थे तो धोनी के बारे में ही चर्चा थी। इसे किसने बनाया? किसी भी खिलाड़ी ने नहीं किया। बीसीसीआई ने भी नहीं किया।’

उन्होंने पूछा, ‘क्या समाचार चैनलों और प्रसारकों ने कभी भारतीय क्रिकेट के बारे में बात की है? क्या हमने कभी कहा है कि भारतीय क्रिकेट को फलने-फूलने की जरूरत है? दो या तीन से अधिक लोग हैं जो भारतीय क्रिकेट के स्टेकहोल्डर्स (हितधारक) हैं। वे भारतीय क्रिकेट पर राज नहीं करते हैं, उन्हें भारतीय क्रिकेट पर राज नहीं करना चाहिए।’

गंभीर ने अपनी बात जारी रखते हुए कहा, ‘भारतीय क्रिकेट पर उस ड्रेसिंग रूम में बैठे 15 लोगों का राज होना चाहिए। हर किसी खिलाड़ी का योगदान है…। मैं अपने जीवन में कभी किसी को फॉलो नहीं कर पाया। यही मेरी सबसे बड़ी समस्या रही है। मीडिया और प्रसारक एक ब्रांड बनाते हैं। कोई दूसरा ब्रांड नहीं बनाता है।’

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