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‘शर्म नहीं आती, 6 साल में देश का ये हाल कर दिया’, केंद्रीय मंत्री ने ज्योति को बताया हिम्मती तो भड़के लोग

ज्योति ने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बैठाकर गुड़गांव से दरभंगा तक की करीब 1200 किमी की दूरी 8 दिन तय की। ज्योति ने इस दौरान रोजाना 100 से 150 किमी साइकिल चलाई।

Author Edited By ROHIT RAJ नई दिल्ली | Updated: May 24, 2020 10:14 AM
केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद और ज्योति। (सोर्स – सोशल मीडिया)

कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन के बीच घायल पिता को गुड़गांव से साइकिल पर बैठाकर बिहार के दरभंगा पहुंची 15 साल की ज्योति कुमारी की तारीफ केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने की है। उन्होंने ज्योति को हिम्मती बताया। प्रसाद ने ट्वीट कर कहा कि उन्होंने खेल मंत्री किरण रिजिजू से इस टैलेंट को पहचानने की बात कही है। इससे पहले भारतीय साइक्लिंग फेडरेशन (सीएफआई) ने ज्योति को दिल्ली आकर ट्रायल देने का मौका देने की बात कही है। अगर वो ट्रायल पास करती है, तो उसे दिल्ली स्थित आईजीआई स्टेडियम परिसर में अत्याधुनिक नेशनल साइक्लिंग अकादमी में प्रशिक्षु के रूप में चुना जाएगा।

रविशंकर प्रसाद ने कहा, ‘‘बिहार की एक लड़की के साहस के बारे में जाना, जिसने गुरुग्राम से दरभंगा तक अपने पिता के साथ 1000 से ज्यादा किलोमीटर तक साइकिल चलाई। उनकी प्रतिभा निखारने के लिए खेल मंत्री किरण रिजिजू से बात की। साथ ही खेल मंत्री से बिहार की इस साहसी लड़की को प्रशिक्षण और छात्रवृत्ति के माध्यम से पूर्ण समर्थन देने का अनुरोध किया है। यदि वह इच्छुक हैं, तो उन्हें एक साइक्लिस्ट के रूप में विकसित किया जा सकता है।’’


कानून मंत्री के इस ट्वीट पर कई लोग भड़क गए। एक यूजर ने लिखा, ‘‘6 साल में देश का ये हाल बना दिया कि एक बेटी को 1200 किमी अपने पिता को लाद साइकिल से जाना पड़ रहा है। पर शर्म तो आएगी नहीं।’’ वहीं एक अन्य यूजर ने लिखा, ‘‘मोदी जी मजदूरों को ट्रेन से पहुंचा देते लेकिन मोदी जी ने दिमाग से काम लेकर ओलंपिक के लिए खिलाड़ी ढूंढ लिए।’’ एक यूजर ने कहा, ‘‘ये नेता लोगों को बेवकूफ ही समझते हैं, गरीबी और लाचारी को कैसे घुमा कर टैलेंट बता रहे हैं। जनता सच में बेवकूफ है।’’


एक यूजर ने कमेंट किया, ‘‘सवाल हजार किमी साइकिल चलाने का है कि उस नाकाम व्यवस्था पर जिसकी वजह से एक मासूम लड़की को ये भुगतना पड़ा। हर जगह कट पेस्ट कर बयान देने से संवेदनशीलता अपना अर्थ और महत्व खो देती है। नेताओं के शब्दों से तो संवेदनशीलता के शब्द भी कटार जैसे चुभते हैं।’’ ज्योति ने पिता मोहन पासवान को साइकिल पर बैठाकर गुड़गांव से दरभंगा तक की करीब 1200 किमी की दूरी 8 दिन तय की। ज्योति ने इस दौरान रोजाना 100 से 150 किमी साइकिल चलाई।

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