जोश हेजलवुड- छोटे शहर का हीरो; भाला फेंक में जीता था गोल्ड मेडल, ओलंपिक में ले सकते थे हिस्सा

हेजलवुड ऑस्ट्रेलिया के बड़े शहर सिडनी से 300 किलोमीटर उत्तर में रहते थे। उनके छोटे से गांव में सिर्फ 300 लोग रहते थे। अब वहां की आधिकारिक जनसंख्या 450 हो गई है। उनके आस-पास ज्यादा बच्चे नहीं थे। जोश को स्कूली जीवन में भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) में महारत हासिल थी।

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जोश हेजलवुड ने 52 टेस्ट में 201, 54 वनडे में 88 और 9 टी20 में 9 विकेट लिए हैं। (सोर्स – सोशल मीडिया

जोश हेजलवुड ने एडिलेड में भारतीय टीम को करारी शिकस्त देने में अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने दूसरी पारी में 5 ओवर में 8 रन देकर 5 विकेट चटकाए थे। हेजलवुड के इस शानदार प्रदर्शन के बाद उनके पिता ट्रेवर हेजलवुड ने बेटे को बधाई दी और कहा, ‘‘शानदार मेरे बेटे। यह बिल्कुल वैसा ही प्रदर्शन था जैसा 1985 में मैंने नेमिघा के खिलाफ किया था। मैंने 4 रन देकर 5 विकेट लिए थे।’’ हेजलवुड के पिता ने ऑस्ट्रेलिया के एक समाचार पत्र द लोकल को दिए इंटरव्यू में अपने संघर्ष की कहानी बताई।

ट्रेवर ने बताया कि वे पहले काफी लापरवाह थे। गोल्फ खेलने से पहले उन्होंने अपने हाथ और पैर कि उंगलियों को तुड़वा लिया था। फिर इस्पात निर्माण करने की व्यवसाय की ओर ध्यान दिया। फॉक्स स्पोर्ट्स टीवी को दिए एक साक्षात्कार में उन्होंने स्वीकार किया कि वह अपने बेटे के क्रिकेट में आगे बढ़ने में मार्गदर्शक नहीं थे। उन्होंने कहा, ‘‘जब जोश छोटा था तो मैं व्यस्त था।उसने शायद अपने बड़े भाई एरॉन को चुना था, लेकिन मैं हमेशा दोनों का हौसला बढ़ाता था।’’ भले ही पिता अपनी गलतियों को स्वीकार कर रहे हो, लेकिन हेजलवुड का कहना है कि जो कुछ भी प्रतिभा मुझे मिली है वह मेरे पिता से मिली है और मैं उन्हीं की तरह हूं।

हेजलवुड ऑस्ट्रेलिया के बड़े शहर सिडनी से 300 किलोमीटर उत्तर में रहते थे। उनके छोटे से गांव में सिर्फ 300 लोग रहते थे। अब वहां की आधिकारिक जनसंख्या 450 हो गई है। उनके आस-पास ज्यादा बच्चे नहीं थे। जोश को स्कूली जीवन में भाला फेंक (जेवलिन थ्रो) में महारत हासिल थी। न्यू साउथ वेल्स इंस्टीट्यूट ऑफ स्पोर्ट्स के सांख्यिकीविद् (statistician) डेविड टेरबॉटन का कहना है कि 18 साल पहले जोश के आंकड़े शानदार थे। 12 साल की उम्र में उन्होंने 53.11 मीटर दूर थ्रो किया था। वह स्टेट स्कूल का रिकॉर्ड था। डेविड टेरबॉटन के मुताबिक, जोश ओलंपिक में गोल्ड मेडल जीत सकते थे।

टेरबॉटन ने कहा, ‘‘अगर वह “अगर अच्छी तरह से तैयार किया जाता था तो वह ऐसा कर सकता था। उसके शुरुआती दिनों ने संकेत दिए थे कि वह ओलंपियन बन सकता है। मुझे यह जानकारी नहीं है कि हम उसे वहां क्यों नहीं ले जा सके।’’ इस बारे में खुद हेजलवुड ने कहा, ‘‘मैं 12 साल का था जब पहली बार थ्रो किया था। मैंने नेशनल लेवल तक पहुंच गया था। कई गोल्ड मेडल भी जीते थे। वह शानदार था। यह मैं सिर्फ सर्दियों में करता था। मुझे वह कंपटीशन पसंद था।’’ जोश ने 52 टेस्ट में 201, 54 वनडे में 88 और 9 टी20 में 9 विकेट लिए हैं।

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