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जैवलिन थ्रोअर देवेंद्र झाझरिया ने दिल्ली में तोड़ा रियो ओलंपिक का कीर्तिमान, वर्ल्ड रिकॉर्ड के साथ कटाया टोक्यो का टिकट

देवेंद्र झाझरिया ने 2004 एथेंस पैरालंपिक खेलों में 62.15 मीटर दूर भाला फेंक विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने 12 साल बाद 2016 के रियो पैरालंपिक खेलों में 63.97 मीटर के थ्रो के साथ अपने ही रिकॉर्ड को बेहतर किया और दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे।

Edited By आलोक श्रीवास्तव नई दिल्ली | Updated: July 1, 2021 3:55 PM
देवेंद्र झाझरिया ने 2016 रियो पैरालंपिक्स में 63.97 मीटर दूर भाला फेंक वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। (सोर्स- ट्विटर)

भारतीय जैवलिन थ्रोअर (भाला फेंक एथलीट) देवेंद्र झाझरिया ने 30 जून 2021 को कीर्तिमान छुआ। भारत के दिग्गज पैरालंपियन ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय चयन ट्रायल के दौरान अपना ही विश्व रिकॉर्ड तोड़ा। देवेंद्र झाझरिया ने यह विश्व रिकॉर्ड 2016 रियो ओलंपिक में बनाया था। नया विश्व रिकार्ड बनाने के साथ ही देवेंद्र झाझरिया ने टोक्यो पैरालंपिक खेलों के लिए भी क्वालिफाई कर लिया।

आठ साल की उम्र में करंट के कारण अपना बायां हाथ गंवाने वाले देवेंद्र झाझरिया ने तीसरी बार वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा है। उन्होंने एथेंस पैरालंपिक में भी वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ा था। पैरालंपिक खेलों में पुरुषों की एफ-46 वर्ग में दो स्वर्ण पदक जीतने वाले 40 साल के देवेंद्र झाझरिया ने बुधवार को ट्रायल्स के दौरान 65.71 मीटर दूर भाला फेंका। अपने इस प्रदर्शन से उन्होंने न सिर्फ ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया, बल्कि 63.97 मीटर के अपने पिछले विश्व रिकार्ड में भी सुधार किया।

देवेंद्र झाझरिया ने 2016 रियो ओलंपिक में 63.97 मीटर दूर भाला फेंककर गोल्ड मेडल जीता था। देवेंद्र झाझरिया ने हिंदी में ट्वीट करके बताया, ‘जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम दिल्ली में आज क्वालिफाइंग प्रतियोगिता में 63.97 मीटर के अपने ही विश्व कीर्तिमान को तोड़कर नया कीर्तिमान 65.71 मीटर बना कर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालिफाई किया।’

देवेंद्र झाझरिया (Devendra Jhajharia) ने आगे लिखा, ‘मेरे परिवार का सहयोग तथा कोच सुनील तंवर और फिटनेस ट्रेनर लक्ष्य बत्रा की मेहनत से ये सब कर पाया हूं।’ टोक्यो पैरालंपिक खेल 24 अगस्त से शुरू होंगे। देवेंद्र झाझरिया तीसरी बार पैरालंपिक खेलों में हिस्सा लेंगे। उन्होंने 2004 एथेंस पैरालंपिक और 2016 में रियो पैरालंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीते थे।

देवेंद्र झाझरिया ने 2004 एथेंस पैरालंपिक खेलों में 62.15 मीटर दूर भाला फेंक विश्व रिकॉर्ड बनाते हुए स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद उन्होंने 12 साल बाद 2016 के रियो पैरालंपिक खेलों में 63.97 मीटर के थ्रो के साथ अपने ही रिकॉर्ड को बेहतर किया और दो स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय बन गए।

देवेंद्र झाझिरया ने हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, ‘मैं पिछले दो साल से सिर्फ अपने प्रशिक्षण पर ध्यान केंद्रित कर रहा हूं। मैं लॉकडाउन के दौरान साई (SAI) की गांधीनगर में मिली सुविधाओं के कारण ही कुछ कर पाया। मुझे अपने परिवार को महीनों तक देखने को नहीं मिलता है, लेकिन यही वह बलिदान है जो मैं अपने देश के लिए तीसरा गोल्ड मेडल पाने के लिए करने को तैयार हूं।’

उन्होंने बताया, ‘23 अक्टूबर को मेरे पिताजी का देहांत मेरे लिए बहुत बड़ा झटका था। हिंदू रीति रिवाज से से 12 दिन पूरे करते ही मां ने कहा, तेरा काम देश के लिए खेलना है तुम ट्रेनिंग पर जाओ। ऐसे हालात में मां को छोड़ना मेरे लिए मुश्किल था, लेकिन देश को प्राथमिकता दी। उसके बाद सात महीने हो गए, किसी से नहीं मिला।’

देवेंद्र झाझरिया के मुताबिक, ‘लगातार गांधी नगर ट्रेनिंग कैम्पस में रहा। रात को नौ बजे बस एक बार परिवार से बात होती है। छह साल का बेटा यह सब नहीं समझता, वह रोज कहता है कि आप कल ही आ जाओ। बेटी समझदार है, वह जिद नहीं करती। इन सब के बीच आज जो प्रदर्शन किया है, उससे बहुत खुश हूं। पिता के जाने के बाद और मजबूत हो गया हूं। मैं टोक्यो जाने से पहले परिवार से मिलने जाऊंगा।’

करंट के कारण खो दिया था बायां हाथ

देवेंद्र झाझरिया बताते हैं कि साल 1989 में जब वह आठ साल के थे तब एक हादसे ने उनके जीवन को बदल दिया। वह पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहे थे और तभी करंट की चपेट में आ गए। डॉक्टर्स ने खूब इलाज किया, लेकिन बायां हाथ काटना पड़ा। हालांकि, उन्होंने हार नहीं मानी और हालात से लड़ने की ठानी। पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने एक हाथ से भाला फेंकने की प्रैक्टिस शुरू की और खेल की दुनिया में शामिल हो गए। कोच आरडी सिंह ने उनकी प्रतिभा को निखारा। आज नतीजा सबके सामने है।

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