ताज़ा खबर
 

ऋषभ पंत पर सभी एकमत, भरोसा रखो; खेलाते रहो

किसी भी बल्लेबाज की फार्म गड़बड़ा सकती है। लेकिन उस चूक का क्या करें जो उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ विकेटकीपर के तौर पर की।

पंत में महान विकेटकीपर बनने के गुण हैं। उन पर भरोसा जताना सही है।

अपनी खूबियों से खिलाड़ी टीम में जगह बनाता है। प्रदर्शन के दौरान की गई गलतियां उसे आलोचना के घेरे में लाती हैं। लेकिन कुछ खिलाड़ी अपवाद होते हैं। अपनी नैसर्गिक प्रतिभा से वे सभी को अपना कायल बना लेते हैं। वे अपने प्रति लोगों में इतना विश्वास जगा देते हैं कि उनकी गलतियों को भी नजरअंदाज कर दिया जाता है। हर कोई उनके समर्थन में खड़ा हो जाता है और भरपूर मौका दिए जाने की वकालत करता है। यह इसलिए होता है ताकि टीम में स्थापित किया जा सके। ऐसे ही एक क्रिकेटर हैं ऋषभ पंत जो विकेटकीपिंग कला से ज्यादा अपनी धाकड़ बल्लेबाजी के लिए मशहूर हैं।

आइपीएल में हम इस खिलाड़ी की करिश्माई बल्लेबाजी देख चुके हैं। टैस्ट क्रिकेट में परंपरागत रूप से दो सबसे सशक्त देशों आस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के खिलाफ उन्हीं की सरजमीं पर शतकीय पारियां खेलकर इस खिलाड़ी ने खूब सुर्खियां बटोरी हैं। विकेट के पीछे रेकार्ड भी बनाया है। ताबड़तोड़ बल्लेबाजी उनकी ताकत है। यही वजह है कि पंत क्रिकेट के तीनों फार्मेट – टेस्ट, वनडे और टी20 – में पहली पसंद बन गए।

पर आज बल्ले से चल रहा विफलता का दौर, विकेटकीपर के तौर पर चूक और सबसे अहम डीआरएस को बेकार करवा देना सभी कुछ उनके खिलाफ जा रहा है। लेकिन इसके बावजूद कोच हो या कप्तान, बोर्ड अध्यक्ष हो या क्रिकेट विशेषज्ञ हर कोई उन्हें बराबर मौका देते रहने का पक्षधर है।
यह ठीक है कि विकेटकीपर को अपनी क्लास दिखाने, प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने में समय लगता है। यह समय उन्हें द्बिपक्षीय सीरिज में जितना चाहे, दे दिया जाए, लेकिन जब बात आइसीसी टूर्नामेंटों की आती है तो क्या ऐसा दांव खेलना टीम इंडिया को महंगा नहीं पड़ सकता है?

किसी भी बल्लेबाज की फार्म गड़बड़ा सकती है। लेकिन उस चूक का क्या करें जो उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ विकेटकीपर के तौर पर की। दो बार कप्तान रोहित शर्मा उनके भरोसे डीआरएस लेने गए और दोनों ही बार फैसला खिलाफ गया। विकेटकीपर कैच लपकता है तो वह सौ फीसद आश्वस्त रहता है। लेकिन दोनों बार पाया गया कि गेंद का बल्ले से संपर्क नहीं हुआ था। स्टंपिंग में भी वे गड़बड़ाए और गेंद को विकेट के पीछे की बजाय आगे से ही लपक लिया जो नियमों के खिलाफ है। इससे बल्लेबाज को वापस क्रीज पर बुला लिया गया। दूसरी बार वे मामूली अंतर से बच गए।

इन घटनाओं ने महेंद्र सिंह धोनी की याद तरोताजा कर दी। चयनकर्ता टीम में उन्हें वापस नहीं लेना चाहते। वे भविष्य की ओर देखना चाहते हैं। धोनी की क्लास अलग है। विकेटकीपिंग – खास तौर से स्टंपिंग – में वे बेजोड़ हैं। डीआरएस के प्रति भी उनका नजरिया काफी अच्छा है। वैसे मैदान पर उनका अनुभव, उनकी सलाह, क्षेत्ररक्षण की सजावट में कप्तान की मदद जैसे मुद्दों पर उनकी बड़ी भूमिका रहती है। बल्लेबाजी उनकी विस्फोटक नहीं रही। उनकी फिनिशिंग पावर भी कमजोर पड़ी है। पर वे रणनीति बनाकर खेलने वाले खिलाड़ी हैं। अभी उन्होंने संन्यास की घोषणा नहीं की है। ऐसे में टी20 विश्व कप के लिए टीम में उनकी वापसी से इनकार नहीं किया जा सकता है।

पंत में महान विकेटकीपर बनने के गुण हैं। उन पर भरोसा जताना सही है। उन्हें परिपक्व होने दीजिए। वे खुद जानते हैं कि टीम में बने रहने के लिए उनसे जो अपेक्षाएं रखी गई हैं, उन पर खरा उतरना है। गलतियों की टी20 जैसे फार्मेट में कोई गुंजाइश नहीं है। एक चूक मैच में बदल सकती है। इसलिए बल्लेबाजी ही नहीं, विकेटकीपिंग की कला में भी पारंगत होना होगा। ऋषभ की प्रतिभा का सिक्का तो विदेशी क्रिकेट विशेषज्ञ भी मानते हैं। उनकी पंत को सलाह है कि वे धोनी बनने की कोशिश नहीं करे। धोनी ने विकेटकीपिंग के बड़े मानदंड स्थापित किए हैं। पंत को अपने मानदंड बनाने चाहिए। यह दौर विकेटकीपर बल्लेबाजों का है। उनकी बल्लेबाजी क्षमता पर कोई संदेह नहीं, बस उन पर भरोसा रखिए।

Next Stories
1 पत्नी प्रेग्नेंट थी तो Prostitute से संबंध बनाते थे इंग्लैंड फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान वेन रूनी, 1 रात के लिए खर्चते थे 1 लाख
2 बांग्लादेश के खिलाफ कप्तान विराट कोहली ने टीम में किया ये बड़ा बदलाव
3 Happy B’Day Manoj Tiwari: गौतम गंभीर को कोलकाता में पीटने की दी थी धमकी, रणजी मुकाबले में हो गई थी बहस
ये पढ़ा क्या?
X