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भारतीय फुटबॉल : विश्व कप न सही एशियाई कप में ही दिखाओ दम

भारत भले ही स्पेन की ला-लीगा या इंग्लैंड की इंग्लिश प्रीमियर लीग का हिस्सा नहीं है। फिर भी पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमियों के साथ भारतीय फुटबॉल प्रेमी भी घर बैठे इन मैचों का आनंद ले रहे हैं। अब 3 जून, 2021 से भारत के फुटबॉल प्रेमी भी भारतीय टीम को मैदान में खेलते हुए देख पाएंगे।

भारतीय फुटबाल टीम की दमखम की परीक्षा एशिया कप में होगी। (Source: Indian Football Team Twitter)

आत्माराम भाटी
कोविड-19 महामारी से पूरी दुनिया परेशान है। खेल जगत भी कोरोना के इस चक्रव्यूह में फंसा रहा। देश ही नहीं विश्व स्तर पर होने वाले कई बड़े आयोजन तय समय पर नहीं हो पाए। लेकिन, अब यूरोप व एशिया के कुछ देशों में कम होते कोविड के असर के बाद मैदान में खेलों का रोमांच लौटने लगा है। खासकर फुटबॉल के मुकाबले यूरोप में दर्शकों की अनुपस्थिति के साथ पूरे रोमांच के साथ खेले जा रहे हैं।

भारत भले ही स्पेन की ला-लीगा या इंग्लैंड की इंग्लिश प्रीमियर लीग का हिस्सा नहीं है। फिर भी पूरी दुनिया के फुटबॉल प्रेमियों के साथ भारतीय फुटबॉल प्रेमी भी घर बैठे इन मैचों का आनंद ले रहे हैं। अब 3 जून, 2021 से भारत के फुटबॉल प्रेमी भी भारतीय टीम को मैदान में खेलते हुए देख पाएंगे। विश्व कप 2022 व एशियाई कप 2023 के संयुक्त क्वालिफायर मैचों के लिए भारतीय टीम कप्तान सुनील छेत्री की अगुआई में दोहा में है। टीम दोहा के जसीम बिन हमद मैदान पर तीन जून को पहले मैच में अपने समूह ‘ई’ की नंबर एक टीम मेजबान कतर से खेलेगी। दूसरे मैच में सात जून को बांग्लादेश और 15 जून को अफगानिस्तान के खिलाफ भी इसी मैदान पर खेलेगी।

भारतीय फुटबॉल प्रेमियों का भले ही इन मैचों से मनोरंजन होगा। लेकिन, इतना तय है कि भारतीय टीम का इन तीनों मैचों में परिणाम उसे किसी भी हालात में विश्व कप-2022 के लिए योग्यता नहीं देगा। कारण यह कि भारत अपने समूह में अब तक खेले गए पांच पात्रता मुकाबलों में तीन अंक प्राप्त कर चौथे स्थान पर है। बांग्लादेश व अफगानिस्तान के खिलाफ भारत जीत भी जाए तो भी कतर के खिलाफ जीतना आसान नहीं होगा। ऐसे में 2022 के फीफा विश्व के लिए अगले चरण में पहुंचना नामुमकिन होगा। हां, यह जरूर है कि भारतीय टीम का विजयी प्रदर्शन उसे 2023 में होने वाले एशियाई कप के लिए पात्रता दिलवा देगा।

भारतीय टीम का प्रदर्शन पिछले कुछ समय से ज्यादा तो नहीं, कुछ अच्छा रहने लगा है। क्योंकि पिछले मुकाबले में उसने अपने से कहीं ज्यादा मजबूत कतर व ओमान को ड्रॉ खेलने पर मजबूर किया। (यह बात अलग है कि एशिया की प्रमुख टीम यूएई से क्वालिफाइंग मुकाबले में 0-6 से मात खानी पड़ी।) ऐसे में उम्मीद जगी रहेगी कि मुख्य प्रशिक्षक इगोर स्टिमैक के मार्गदर्शन और कप्तान सुनील की अगुआई में कुछ चमत्कारिक प्रदर्शन कर यह टीम अपने देश के फुटबॉल प्रेमियों को आनंदित करने में कामयाब हो जाए।

आज भारतीय फुटबॉल टीम के प्रदर्शन में कुछ सुधार आ रहा है तो उसका सबसे बड़ा कारण इंडियन सुपर लीग है। इस लीग में भारतीय खिलाड़ियों को दुनिया के बेहतरीन खिलाड़ियों के साथ मैदान में उम्दा कोचों के मार्गदर्शन से सीखने को मिल रहा है। लेकिन फिर भी भारतीय खिलाड़ियों के खेल में दमखम व बेहतरीन तालमेल से गेंद को गोल में पहुंचाने वाला स्तर नजर नहीं आ पाया है जो यूरोप, अफ्रीका व एशिया की प्रमुख टीमों यूएई, जापान, कतर की टीमों में देखने को मिलता है। यही कारण है कि भारतीय फुटबॉल प्रेमी के दिल में इस बात की टीस जरूर है कि जब भारत के एक छोटे से राज्य के क्षेत्रफल और आबादी के बराबरी वाले अफ्रीकी देश इस खेल में अपनी धाक विश्व कप में दिखा रहे हैं तो एक अरब पैंतीस करोड़ की आबादी वाला देश 50 खिलाड़ी भी तैयार नहीं कर पा रहा जो देश को फुटबॉल में विश्व के अग्रिम पंक्ति के देशों के साथ खड़ा कर सकें?

साठ के दशक तक हमारे देश में फुटबॉल के प्रति दीवानगी देखी जा सकती थी। भारतीय टीम ने 1952 से 1960 तक ओलंपिक में भाग लिया। 1956 मेलबर्न ओलंपिक में सेमीफाइनल खेला। 1951 व 1962 एशियाई खेलों में स्वर्ण तथा 1964 में रजत पदक जीते। लेकिन उसके बाद भारत का प्रदर्शन गिरता गया। और भारतीय फुटबॉल किसी गहरे कुएं में गोते लगाने लगी। विश्व स्तर पर तो क्या एशिया में भी हमारी कोई सम्मानजनक रैंकिग नहीं है।

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