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जनसत्ता खेल: सुनील छेत्री ने रच दिया इतिहास

सुनील छेत्री ने भारतीय फुटबॉल में शून्य को भरने का काम किया है। ऐसा नहीं है कि इससे पहले भारत के पास कोई स्टार नहीं था लेकिन उन्हें शायद इतने मौके नहीं मिले। बाइचुंग भूटिया, आइएम विजयन, पीटर थंगराज जैसे बेहतरीन खिलाड़ी भारत के पास थे लेकिन सुविधाओं की कमी ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय सितारा बनने नहीं दिया।

Author January 10, 2019 4:07 AM
सुनील छेत्री (फोटोः पीटीआई)

संदीप भूषण

भारतीय खेल जगत के लिए 2019 भाग्यशाली साबित हो रहा है। एक तरफ क्रिकेट में उसने सात दशक के सूखे को समाप्त करते हुए आस्ट्रेलियाई सरजमीं पर शृंखला जीती तो दूसरी तरफ एफसी फुटबॉल एशिया कप के पहले मैच में थाईलैंड को 4-1 से रौंद कर अपने इरादे जता दिए। भारत के लिए इस टूर्नामेंट में 1964 सबसे खास रहा था जब वह उपविजेता बना। उसके बाद 1984 और 2011 में भारत को दो मौके मिले भी लेकिन ग्रुप चरण से ही बाहर होना पड़ा। थाईलैंड के साथ मैच से भारत ने इस टूर्नामेंट के लिए बेहतरीन शुरुआत की और इस जीत के नायक रहे भारतीय कप्तान सुनील छेत्री के रेकार्ड तोड़ प्रदर्शन ने इसे और खास बना दिया। छेत्री ने इस मैच में दो गोल दागे। यह उनके अंतरराष्ट्रीय करिअर का 66वां और 67वां गोल था। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गोल के मामले में वे दुनिया के दिग्गज फुटबॉलर अर्जेंटीना के लियोनल मेस्सी से आगे निकल गए हैं।

संयुक्त अरब अमीरात में खेले जा रहे इस एशिया कप में भारत प्रबल दावेदार तो नहीं लेकिन उभरती प्रतिभा बनकर जरूर आया है। युवाओं की टीम में छेत्री के रूप में एक बेहतरीन और दमदार खिलाड़ी उनका मार्गदर्शन भी कर रहा है। छेत्री का अर्जेंटीना के मेस्सी को पीछे छोड़ना भले ही सिर्फ आंकड़ों का खेल हो लेकिन एशियाई परिप्रेक्ष्य में यह काफी बड़ी उपलब्धि है। छेत्री ने हर मैच में अपने योगदान से भारत को जीत दिलाई है।

भारत ने 55 साल के अंतराल पर इस टूर्नामेंट में जीत दर्ज की है। इस विजय के नायक रहे छेत्री अब अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल जगत में सक्रिय खिलाड़ियों में गोल करने के मामले में मेस्सी को पछाड़ने के साथ सबसे ज्यादा गोल करने के मामले में दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं। अब उनसे आगे सिर्फ क्रिस्टयानो रोनाल्डो ही हैं जिनके खाते में 85 गोल है। अपने इस नए रेकार्ड से छेत्री सबसे ज्यादा गोल करने वाले सर्वकालीन खिलाड़ियों की सूची में 20वें स्थान पर हैं। इस लिस्ट में भी उन्होंने मेस्सी और दिदिएर ड्रोग्बा जैसे दिग्गजों को पीछे छोड़ा है।

छेत्री ने भारतीय फुटबॉल को दिया नया आयाम
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय फुटबॉल टीम इतनी मजबूत नहीं मानी जाती लेकिन इसी टीम के सुनील छेत्री ने पहचान बनाई है। 2005 में पहला अंतरराष्ट्रीय गोल करने वाले छेत्री ने अब तक 105 मैच खेले हैं। उनका गोल औसत प्रतिमैच 0.63 का रहा है। उन्होंने अपने प्रदर्शन और लगन से लोगों को भारतीय फुटबॉल में भी दिलचस्पी लेने पर मजबूर किया। पिछले साल ही भारत इंटरकॉन्टिनेंटल कप की मेजबानी कर रहा था और शुरुआती मैच में भारत ने चीनी ताइपे को 5-0 से हराकर अपने दबदबे का नमूना पेश किया। हालांकि इस मैच को देखने के लिए दर्शक दीर्घा में काफी कम लोग थे। छेत्री ने इस मैच में हैट्रिक लगाई। वे दर्शकों की इस बेरुखी से नाराज थे और उन्होंने ट्विटर पर लोगों से भारतीय फुटबॉल देखने की अपील की। उनके इस भावुक ट्वीट ने कमाल दिखाया और इसके बाद हुए भारत के दो फाइनल मुकाबलों में बड़ी संख्या में दर्शक जुटे।

अभी लंबा सफर बाकी
सुनील छेत्री ने भारतीय फुटबॉल में शून्य को भरने का काम किया है। ऐसा नहीं है कि इससे पहले भारत के पास कोई स्टार नहीं था लेकिन उन्हें शायद इतने मौके नहीं मिले। बाइचुंग भूटिया, आइएम विजयन, पीटर थंगराज जैसे बेहतरीन खिलाड़ी भारत के पास थे लेकिन सुविधाओं की कमी ने उन्हें अंतरराष्ट्रीय सितारा बनने नहीं दिया। दर्शक दीर्घा में बैठे हर भारतीय की निगाह मैदान पर छेत्री को ही ढूंढती है। हालांकि छेत्री पहले भी कह चुके हैं कि वे कोई स्टार नहीं हैं और उनकी सफलता में पूरी टीम का योगदान है। यही सही भी है। फुटबॉल टीम गेम है और इसमें मिलकर ही बेहतर किया जा सकता है। भारतीय टीम ने शायद अभी तक खुद को इस लायक नहीं बनाया है तभी तो छेत्री जैसा स्टार भी हमें कभी फीफा विश्व कप तक नहीं पहुंचा पाया।

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