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सौरभ चौधरी का धमाका, एशियन गेम्स में गोल्ड के बाद अब बने जूनियर वर्ल्ड चैंपियन, नया वर्ल्ड रेकॉर्ड भी बनाया

चौधरी मूल रूप से मेरठ में कलीना के रहने वाले हैं। 581 अंक हासिल कर वह फाइनल मुकाबले के लिए क्वालिफाई हुए थे। उन्होंने एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता था।

Author September 6, 2018 11:19 AM
आईएसएसएफ चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने के बाद कुछ यूं नजर आए चौधरी। (फोटोः ISSFWCH)

एशियन गेम्स में जलवा बिखेरने के बाद भारतीय युवा निशानेबाज सौरभ चौधरी का धमाका जारी है। दक्षिण कोरिया में गुरुवार (छह सितंबर) को आईएसएसएफ चैंपियनशिप में उन्होंने गोल्ड मेडल (स्वर्ण पदक) अपने नाम किया। उन्होंने इस उपलब्धि के साथ 10 मीटर एअर पिस्टल इवेंट में एक नया वर्ल्ड रेकॉर्ड बनाया। चूंकि चौधरी ने यह पदक जूनियर वर्ग में जीता है, लिहाजा वह जूनियर वर्ल्ड चैंपियन बन गए हैं।

सौरभ ने फाइनल मुकाबले में कुल 245.5 अंक हासिल किए। यह जूनियर वर्ग में वर्ल्ड रेकॉर्ड है, जबकि देश के अर्जुन चीमा इवेंट में तीसरे स्थान पर रहकर कांस्य पदक पाए। उन्हें 218 अंक मिले। वहीं, कोरिया के लिम होजिन ने रजत पदक पर कब्जा जमाया। उनको प्रतियोगिता में 243.1 अंक मिले थे।

चौधरी मूल रूप से उत्तर प्रदेश में मेरठ स्थित कलीना इलाके के रहने वाले हैं। 581 अंक हासिल कर वह फाइनल मुकाबले के लिए क्वालिफाई हुए थे। उन्होंने एशियन गेम्स में भी स्वर्ण पदक जीता था।

बता दें कि सौरभ बागपत स्थित स्कूल में 10वीं के छात्र हैं। उनके भाई के अनुसार, गांव व आसपास में जब भी मेले लगते हैं, तो भाई वहां ईनाम जीतकर लाता। दरअसल, सौरभ मेले में गुब्बारों पर निशाना लगाते और बदले में उन्हें ईनाम मिलता था। घरवालों को जब लगा कि सौरभ की दिलचस्पी इसमें जरूरत से अधिक बढ़ रही है तो उन्होंने उसका भरपूर साथ दिया। आर्थिक हालात ठीक नहीं होते हुए भी घरवालों ने सौरभ को एक लाख 75 हजार रुपए की बंदूक दिलाई।

सौरभ इससे पहले कोच की बंदूक से प्रैक्टिस करते थे। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ ने उन्हें गोल्ड मेडल जीतने पर ईनाम के रूप में 50 लाख देने की घोषणा की थी। सरकार के प्रवक्ता ने बताया, “मुख्यमंत्री ने यह भी ऐलान किया है कि सौरभ को राज्य सरकार में राजपत्रित अधिकारी का पद दिया जाएगा।”

युवा निशानेबाज जिस जगह से ताल्लुक रखते हैं, वहां निशानेबाजी की आधुनिक सुविधाएं नहीं हैं। उनका मानना है कि उन्हें भी असुविधाएं झेलनी पड़ी थीं। बोले थे, “जब आप एक स्तर पर पहुंच जाते हो तो अभ्यास के लिए उस तरह की सुविधाएं भी चाहिए होती हैं। अभी जहां मैं अभ्यास करता हूं वहां ज्यादा सुविधाएं नहीं हैं। रेंज अच्छी नहीं है, कम्प्यूटर वाली लाइन भी नहीं है। यह सब सरकार को उपलब्ध कराना चाहिए। सरकार का ऐसा करने से काफी हौसला बढ़ता है।”

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