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समय के साथ निखरा ईशांत का खेल

आंकड़ों को गौर से देंखें तो ईशांत ने पिछले दो तीन साल में काफी बेहतर किया है। कम से कम 60 टैस्ट में 200 विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अंतिम एक तिहाई मुकाबलों में सबसे बेहतर औसत से गेंदबाजी करने वालों में ईशांत सबसे ऊपर हैं।

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ऐसा कम ही होता है जब कोई खिलाड़ी लगातार खराब प्रदर्शन करे और कप्तान व चयनकर्ता उसे टीम में बनाए रखें। लेकिन ईशांत शर्मा के मामले में यही हुआ। उन्हें टीम में बनाए रखने का कारण भी है। टैस्ट करिअर में 97 मैच खेलने वाले इस तेज गेंदबाज का औसत 32.39 है लेकिन उन्होंने हाल के दिनों में शानदार खेल दिखाया है। उनकी गेंदबाजी में पैनापन भी देखने को मिला है।

कोरोना विषाणु के कारण अस्त-व्यस्त पड़े क्रिकेट जगत में सब कुछ ठीक रहा तो आस्ट्रेलिया के खिलाफ होने वाली आगामी टैस्ट शृंखला ईशांत के लिए खास तोहफा लाएगा। शृंखला के तीसरे मुकाबले में वे 100 टैस्ट खेलने वाले भारत के दूसरे तेज गेंदबाज बन जाएंगे।

दरअसल, ईशांत शर्मा को टीम में शामिल करने को लेकर कई बार सवाल उठाए गए। हालांकि यह सच है कि समय के साथ उन्होंने अपने खेल में काफी बदलाव किया। उनके प्रदर्शन को परखने के लिए पूरे करिअर को दो भाग में देखा जाना चाहिए।

पहले भाग में कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाए लेकिन दूसरे में तहलका मचा कर रख दिया। पहले 48 टैस्ट में उनका औसत 38.44 रहा तो अंतिम के 49 टैस्ट में उनका औसत 27.21 रहा है। अंतिम 33 टैस्ट में इस गेंदबाज का औसत 22.90 रहा। पिछले 19 टैस्ट मुकाबलों में उनका औसत 19.14 रहा। इस दौरान उन्होंने अपने स्ट्राइक रेट में भी लगातार सुधार
किया है।

ईशांत ने टीम में जगह बनाए रखने के लिए हर संभव प्रयास किया है। उनके दो भागों में बंटे करिअर को देखें तो दूसरे भाग के खेल में लगभग 29 फीसद सुधार हुआ है। जिन खिलाड़ियों ने 60 से ज्यादा मैच खेल कर 200 से ज्यादा विकेट लिए हैं, उनमें ईशांत का खेल में सुधार का फीसद सबसे बेहतर है। जेम्स एंडरसन से लेकर रिचर्ड हेडली और मोर्नी मॉर्कल से एंड्यू फ्लिंटॉफ व इमरान खान तक जैसे दिग्गजों की सूची में ईशांत का नाम सबसे ऊपर है।

एंडरसन के करिअर के पहले भाग में औसत 30.74 का रहा वहीं दूसरे में 27.21 का। हेडली का पहले में 25.54 तो दूसरे में 19.62। ऐसे ही अन्य खिलाड़ियों को देखें तो मोर्कन ने दूसरे हाफ में 18.9 फीसद सुधार किया तो इमरान खान ने 16.9 फीसद। इस लिहाज से चयनकर्ताओं ने ईशांत पर जो भरोसा जताया वह किसी भी लिहाज से गलत नहीं है।

आंकड़ों को गौर से देंखें तो ईशांत ने पिछले दो तीन साल में काफी बेहतर किया है। कम से कम 60 टैस्ट में 200 विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अंतिम एक तिहाई मुकाबलों में सबसे बेहतर औसत से गेंदबाजी करने वालों में ईशांत सबसे ऊपर हैं। उन्होंने अपने करिअर के पहले दो तिहाई मुकाबलों में 37.58 के औसत पर गेंदबाजी की। सुधार की बात करें तो इन दो भागों में उन्होंने 39.08 फीसद सुधार किया। इसके बाद सबसे बेहतर सुधार करने वालों में जेम्स एंडरसन और एमजी जॉनसन का नाम है। एंडरसन ने अपने करिअर के अंतिम एक तिहाई मुकाबलों में 21.18 का औसत बरकरार रखा है और 28.85 फीसद सुधार किया।

ईशांत के 31 जुलाई, 2016 तक के प्रदर्शन को देखें तो उनका औसत 37.05 था। कम से कम 70 टैस्ट खेलने वाले या 1750 ओवर फेंकने वाले गेंदबाजों में सबसे खराब औसत की बात करें तो ईशांत कार्ल हूपर और रवि शास्त्री के बाद तीसरे नंबर पर थे। हूपर का औसत 49.42 और शास्त्री का 40.96 रहा है। बाद के दो खिलाड़ी डेनियल विटोरी और गैरी सोबर्स का औसत क्रमसे 34.36 और 34.03 रहा है। हालांकि ईशांत ने अपने खेल में जबरदस्त सुधार किया है और वह भारतीय टीम के गेंदबाजी आक्रमण के अगुआ बन कर उभरे हैं।

आंकड़ों को गौर से देंखें तो ईशांत ने पिछले दो तीन साल में काफी बेहतर किया है। कम से कम 60 टैस्ट में 200 विकेट लेने वाले गेंदबाजों की सूची में अंतिम एक तिहाई मुकाबलों में सबसे बेहतर औसत से गेंदबाजी करने वालों में ईशांत सबसे ऊपर हैं। उन्होंने अपने करिअर के पहले दो तिहाई मुकाबलों में 37.58 के औसत पर गेंदबाजी की। सुधार की बात करें तो इन दो भागों में उन्होंने 39.08 फीसद सुधार किया।

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