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आईपीएल फिक्सिंग: पूर्व प्रशासकों और खिलाड़ियों ने किया सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत

पूर्व क्रिकेट प्रशासकों ने एन श्रीनिवासन को हितों के टकराव के आधार पर बीसीसीआई के किसी भी चुनाव को लड़ने से रोकने के उच्चतम न्यायालय के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे कदाचार समाप्त होगा और देश में खेल के संचालन में पारदर्शिता आएगी। न्यायालय ने आज बहुतप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुये कहा कि […]

Author January 22, 2015 8:41 PM

पूर्व क्रिकेट प्रशासकों ने एन श्रीनिवासन को हितों के टकराव के आधार पर बीसीसीआई के किसी भी चुनाव को लड़ने से रोकने के उच्चतम न्यायालय के फैसले की सराहना करते हुए कहा कि इससे कदाचार समाप्त होगा और देश में खेल के संचालन में पारदर्शिता आएगी।

न्यायालय ने आज बहुतप्रतीक्षित फैसला सुनाते हुये कहा कि चेन्नई सुपर किंग्स के अधिकारी और बीसीसीआई के निर्वासित अध्यक्ष के दामाद गुरुनाथ मयप्पन तथा राजस्थान रॉयल्स के सह-मालिक राज कुन्द्रा के खिलाफ सट्टेबाजी के आरोप साबित हो गये हैं जबकि श्रीनिवासन के खिलाफ पर्दा डालने के आरोप ‘साबित नहीं हुये।’

बीसीसीआई और आईसीसी के पूर्व प्रमुख शरद पवार ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के फैसले से पिछले कुछ समय से भारतीय क्रिकेट में चल रही अवांछित चीजों का अंत होगा।

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि श्रीनिवासन बाहर हो गया है। क्रिकेट में लंबे समय से काफी चीजें हो रही है और इस फैसले से इन सभी को समाप्त करने में मदद मिलेगी। अभी क्रिकेट ढांचे में बदलाव लाने की जरूरत है।’’

पवार ने हालांकि इस बात से इन्कार किया कि वह बोर्ड की अगुवाई कर सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘मैं या (बीसीसीआई के एक अन्य पूर्व अध्यक्ष) शशांक मनोहर व्यक्तिगत तौर पर दिलचस्पी नहीं रखते हैं लेकिन हम क्रिकेट के प्रशासनिक ढांचे को मदद करने में रुचि रखते हैं।’’

बीसीसीआई के एक अन्य पूर्व प्रमुख एसी मुथैया ने श्रीनिवासन से आईसीसी अध्यक्ष पद से हटने की अपील भी की। बीसीसीआई में हितों के टकराव को लेकर अदालतों में मामले दर्ज करने वाले मुथैया ने कहा, ‘‘उन्हें (श्रीनिवासन) आईसीसी से भी बाहर निकलना चाहिए। जब देश में ही वह वांछित नहीं है तब वह आईसीसी में कैसे बने रह सकते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह ऐतिहासिक फैसला है। मद्रास उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय में पिछले छह साल से हितों के टकराव के लिये लड़ने के मेरे निर्णय की पुष्टि हुई है। उच्चतम न्यायालय के इस फैसले से बीसीसीआई में ढांचागत बदलाव होगा जिससे निश्चित तौर पर भद्रजनों के खेल में सुधार होगा।’’

बीसीसीआई के एक अन्य पूर्व अध्यक्ष आईएस बिंद्रा ने कहा, ‘‘न्यायालय ने बीसीसीआई पर भरोसा नहीं जताया है और अपनी जांच समिति गठित की है। वे सभी दोषी हैं। जो लोग पिछले कई महीनों से कार्रवाई नहीं कर पाये वे भी समान रूप से जिम्मेदार हैं। श्रीनिवासन पर ही पूरा दोष मढ़ना सही नहीं है क्योंकि उनके पदाधिकारी भी समान रूप से जिम्मेदार हैं।’’

इस मामले में याचिकाकर्ता और बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष आदित्य वर्मा ने कहा कि श्रीनिवासन का भविष्य अब समाप्त हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘श्रीनिवासन का तात्कालिक भविष्य समाप्त हो गया है क्योंकि उच्चतम न्यायालय ने बीसीसीआई को छह सप्ताह के अंदर चुनाव कराने का निर्देश दिया है और श्रीनिवासन हितों के टकराव के कारण चुनाव लड़ने के योग्य नहीं हैं। जो भी फैसला रहा मैन ऑफ द मैच क्रिकेट रहा। यह भद्रजनों का खेल है और लोग फिर से इसे इसी तरह से जानेंगे।’’

बीसीसीआई के पूर्व कोषाध्यक्ष और आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी के उजागर होने के बाद अपना पद छोड़ने वाले अजय शिर्के ने कहा, ‘‘इस फैसले से बोर्ड को भविष्य में पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से संचालित करने में मदद मिलेगी। लेकिन यह भविष्यवाणी करना मुश्किल है कि श्रीनिवासन क्या करेगा।’’

पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष और बंगाल क्रिकेट संघ के वर्तमान प्रमुख जगमोहन डालमिया ने कहा, ‘‘पहले मुझे विस्तृत फैसला पढ़ने दो, उसी के बाद प्रतिक्रिया दूंगा। हो सकता है कि दो दिन बाद।’’

पूर्व भारतीय सलामी बल्लेबाज अंशुमन गायकवाड़ ने कहा, ‘‘जब उच्चतम न्यायालय ने अपना फैसला दे दिया है तो आप उसको चुनौती नहीं दे सकते। मैं इस मामले के बारे में ज्यादा नहीं जानता लेकिन यदि कोई गलत काम करता है तो क्या बीसीसीआई भ्रष्ट हो जाएगा। यह उसी तरह से है कि बेटा दोषी है और पिता को जेल भेज दो। इसके पीछे कुछ तर्क होगा।’’

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